मुलायम-अखिलेश में से किसी को नहीं मिलेगी साइकिल

मुलायम-अखिलेश में से किसी को नहीं मिलेगी साइकिल
Mulayam Singh Akhilesh Yadav

sandeep tomar | Publish: Jan, 02 2017 04:19:00 PM (IST) Noida, Uttar Pradesh, India

चुनाव चिन्ह साइकिल पर मची रार के बीच इलेक्शन कमीशन ने बयान जारी किया है

नई दिल्ली/नोएडा. सपा परिवार की लड़ाई अब साइकिल की लड़ाई में तब्दील हो चुकी है। खबर है कि सपा के दोनों धड़ों ने चुनाव आयोग में यह लिखित रूप से दावा किया है कि असली सपा उनकी है, इसलिए पार्टी का चुनाव चिन्ह साइकिल उनके ही पास रहना चाहिए। अगर चुनाव आयोग समय रहते इस मामले पर फैसला नहीं लेता है तो बहुत सम्भव है कि दोनों ही धड़ों को इस चुनाव का सफर बिना साइकिल के ही तय करना पड़े। चुनाव आयोग ने भी इस बारे में बयान जारी करते हुए कहा है कि अगर हालात यही रहे तो चुनाव चिन्ह साइकिल को फ्रीज किया जा सकता है।

रामगोपाल यादव ने अखिलेश की तरफ से चुनाव आयोग को एक पत्र लिखकर यह बताया है कि पार्टी ने एक राष्ट्रीय अधिवेशन में अखिलेश यादव को सपा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना है और आगे से पार्टी के महत्वपूर्ण निर्णय उन्ही के द्वारा किये जाएंगे। पत्र में इस बात का भी उल्लेख है कि पार्टी का चुनाव चिन्ह साइकिल उन्हीं के पास सुरक्षित रहेगा। वहीं मुलायम की तरफ से भी चुनाव आयोग को एक पत्र लिखकर यह कहा गया है कि पार्टी का गत रविवार को हुआ राष्ट्रीय अधिवेशन गैरकानूनी था और उसमें लिए गए फैसले असंवैधानिक हैं। पत्र में साइकिल का चिन्ह उन्हीं के पास सुरक्षित रहने की बात की गयी है।

विचार कर रहा चुनाव आयोग

जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग दोनों पक्षों के दावों पर आज सोमवार को विचार करेगा। वह यह समझने की कोशिश करेगा कि कानूनी पहलुओं के मद्देनजर किस पक्ष का दावा सही है और साइकिल चिन्ह किसके पास रहना चाहिए। आयोग के समक्ष यह विकल्प भी होगा कि वह तकनीकी पहलुओं पर पर्याप्त विचार करने के लिए अधिक समय ले। ऐसे में वह कुछ समय के लिए साइकिल का चुनाव चिन्ह जब्त भी कर सकता है। ऐसे में सपा के दोनों ही धड़ों को साइकिल से हटकर कोई दो अलग-अलग चुनाव चिन्ह दिए जा सकते हैं।

बता दें कि उत्तर प्रदेश की ही एक अन्य पार्टी अपना दल का मामला इसी तरह से अटका पड़ा है। अपना दल के संस्थापक अध्यक्ष सोनेलाल पटेल की असामयिक मृत्यु के बाद उनकी बेटी अनुप्रिया पटेल और उनकी मां के बीच इसी तरह पार्टी पर वर्चस्व की जंग छिड़ गयी थी। दोनों ही पक्ष चुनाव आयोग में पार्टी के सिम्बल को लेकर दावा पेश कर रहे थे। अंततः हुआ ये कि चुनाव आयोग ने पार्टी का सिम्बल जब्त कर लिया और दोनों ही धड़ों को अलग-अलग चुनाव चिन्ह देकर चुनाव लड़ने की इजाजत दी। यह मामला अभी भी चुनाव आयोग के समक्ष विचार के लिए लम्बित है।
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