अखिलेश को मिला पार्टी का नाम और सिंबल, इन लोगों का मिला साथ 

अखिलेश को मिला पार्टी का नाम और सिंबल, इन लोगों का मिला साथ 
akhilesh yadav

सपा के बड़े नेता और रामगोपाल यादव साफ कर चुके हैं कि कोई समझौता नहीं होगा

सौरभ शर्मा, नोएडा। अगर अखिलेश यादव और पिता मुलायम सिंह यादव के बीच समझौता नहीं होता है तो अखिलेश को एक ऐसा विकल्प मिल गया है, जिसे प्रदेश की जनता के साथ देश की जनता भी स्वीकार्य करेगी। इसके लिए सभी तरह के प्रयास भी शुरू हो गए हैं, जिस पार्टी और सिंबल के साथ अखिलेश चुनाव लड़ सकते हैं वो भी पूरी तरह से समाजवादी और लोहियावाद को मानने वाली है। आइए आपको भी बताते हैं कि अखिलेश यादव किस नाम की पार्टी और सिंबल के साथ चुनाव लड़ सकते हैं। 

अखिलेश और मुलायम के बीच समझौते के प्रयास जारी 

सीएम और समाजवादी पार्टी के मुखिया एवं पिता के बीच समझौता कराने के तमाम प्रयास चल रहे हैं। समाजवादी पार्टी के बड़े नेता और रामगोपाल यादव साफ कर चुके हैं कि कोई समझौता नहीं होगा, लेकिन समाजवादी पार्टी के नेता समझ चुके हैं कि अखिलेश ही जनता के स्वीकार्य हैं। उनके बिना समाजवादी पार्टी आगे नहीं बढ़ सकती है। वहीं, पार्टी के विधायकों की भी स्थिति भी साफ हो चुकी है। प्रदेश के 189 विधायक अखिलेश के साथ हैं। वहीं बाकी विधायक मुलायम सिंह के साथ हैंं। ऐसे में साफ हो गया है कि प्रदेश में मौजूदा समय में मुलायम से ज्यादा अखिलेश को पसंद किया जा रहा है। 

इस पार्टी और सिंबल का ले सकते हैं नाम 

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि अगर अखिलेश और मुलायम का समझौता नहीं होता है और अखिलेश को सपा और साइकिल नहीं मिलती है तो वो किस पार्टी और सिंबल की ओर जाएंगे। सुनने में ये भी आ रहा है कि रामगोपाल पहले ही पार्टी रजिस्ट्रेशन और सिंबल के लिए अप्लाई कर चुके हैं, लेकिन इस समय जो सबसे बड़ी खबर आ रही है वो है कि अखिलेश यादव अपने सबसे करीबी नीरज शेखर (चंद्रशेखर के बेटे) की पार्टी से चुनाव लड़ सकते हैं। पार्टी का नाम समाजवादी जनता पार्टी है और उसका सिंबल बरगद का पेड़ है। सूत्रों की मानें तो नीरज शेखर पूरी तरह से अखिलेश के साथ हैंं। वहीं, इस मामले में दोनों के बीच आम सहमति भी बन चुकी है। 

कौन देख रहा है सजपा

मौजूदा समय में समाजवादी जनता पार्टी (सजपा) कमल मोरारका के हाथों में है। कमल मोरारका पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के साथ तमाम काम भी देख रहे हैं। कमल मोरारका चंद्रशेखर केे पीएम के दौराम मिनिस्टर भी रहे थे, जिस कारण से कमल मोरारका को भी कोई दिक्कत नहीं होगी। ऐसे में जल्द ही इस बात की घोषणा होने के साथ पार्टी का प्रचार और चुनाव की तैयारी शुरू हो जाएगी। वहीं, दूसरी ओर यूपी में हाशिये में सजपा अखिलेश का साथ मिलने के बाद नई संजीवनी भी मिलेगी। इस बारे में जब समाजवादी पार्टी के वेस्ट यूपी के वरीष्ठ नेता गोपाल अग्रवाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि अभी कोशिश की जा रही है कि समझौता किया जाए। इसी में पार्टी और सभी की भलाई है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो समाजवादी जनता पार्टी बेहद उपयुक्त है।
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