तीन तलाकः मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को मंजूर नहीं हाई कोर्ट का फैसला

तीन तलाकः मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को मंजूर नहीं हाई कोर्ट का फैसला
Triple Talaq banned

sandeep tomar | Publish: Dec, 08 2016 04:56:00 PM (IST) Noida, Uttar Pradesh, India

हाई कोर्ट ने तीन तलाक को गलत ठहराते हुए कहा था कि कोई भी संविधान से ऊपर नहीं है

नई दिल्ली/नोएडा. इलाहाबाद हाई कोर्ट का तीन तलाक पर फैसला मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को मंजूर नहीं है. बोर्ड का कहना है कि तलाक का विषय इस्लामिक कानून का हिस्सा है जिसमें कोई कानूनी दखल स्वीकार्य नहीं हो सकती. बोर्ड ने हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील भी दाखिल करने की बात की है.

रखा जाता है महिलाओं का ख्याल

आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के एक प्रमुख सदस्य कमाल फारूकी के अनुसार तीन तलाक को इस आधार पर अस्वीकृत किया जाता है क्योंकि इसे महिलाओं के अधिकारों के हनन के रूप में देखा जाता है. लेकिन उन्होंने कहा कि यह सच नहीं है. सच तो यह है कि इस्लामी कानून में महिलाओं के अधिकारों का ख्याल रखा गया है. उन्होंने कहा कि किसी शादी में सम्बन्ध खराब होने की स्थिति में तीन तलाक शादी को ख़त्म करने का सबसे अच्छा तरीका है.

सबसे अच्छा इस्लामिक कानून

ऐसा फैसला देने वाले जज की इस्लामिक कानूनों पर समझ पर सवाल उठाते हुए मुस्लिम बोर्ड के अहम सदस्य फारूकी ने कहा कि उन्हें लगता है कि जिस न्यायमूर्ति ने यह फैसला दिया है उन्हें इस्लामिक कानूनों की सही जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि इस समय जितने भी प्रमुख धर्म हैं उसमें इस्लाम महिलाओं को सबसे अधिक सुरक्षित अधिकार देता है. जिन जोड़ों की शादी किसी भी वजह से नहीं निभ पाती है उनके लिए इस्लामिक कानून सबसे अच्छा रास्ता उपलब्ध करवाता है जिसमें दोनों लोग बिना किसी परेशानी के इस शादी को खत्म कर सकते हैं.

सरकारी कानून से आसान इस्लामी कानून

मौजूदा समय में अदालतों की खराब व्यवस्था की तरफ ऊंगली उठाते हुए फारूकी ने कहा कि आज अगर की भी जोड़े की शादी में कोई बाधा आ जाती है और वह इसे ख़त्म करने के लिए कानून का सहारा लेता है तो उसे इस शादी से कितने सालों में खत्म हो पायेगी, यह ठीक-ठीक कोई कह नहीं सकता. उन्होंने कहा कि हमे सच का सामना करना चाहिए और यह समझना चाहिए कि अनेक ऐसी शादियां होती हैं जिनमें लोगों की आपस में नहीं निभ पाती. ऐसे में उन्हें सुरक्षित बाहर निकलने का रास्ता दिया जाना चाहिए.  

तीन तलाक गलत, इस्लामिक कानूनों की हो रही गलत व्याख्या

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की यह टिप्पणी इलाहबाद हाई कोर्ट के उस फैसले के बाद आयी है जिसमें अदालत ने तीन तलाक को महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ बताया है. कोर्ट ने कहा है कि तीन तलाक असंवैधानिक और महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करने वाला भी है. कोर्ट ने कठोर टिप्पणी करते हुए यहां तक कह दिया कि कोई भी पर्सनल लॉ बोर्ड कानून के ऊपर नहीं है. हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि इस्लामिक कानूनों की गलत व्याख्या की जा रही है जिससे समाज में गलतफहमी फ़ैल रही है.

मोदी सरकार की साजिश के रूप में देख रहा है मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड


यहां यह भी बता दें कि वर्तमान केंद्र सरकार पहले ही इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौर से गुजर रही है. केंद्र सरकार ने एक हलफनामा देकर सर्वोच्च अदालत में यह साफ़ किया है कि वह तीन तलाक को समाप्त करने के खिलाफ नहीं है. हालांकि वर्तमान केंद्र सरकार मई 2014 में ही सत्ता में आयी है और उक्त विवाद कोर्ट में बहुत पहले से विचाराधीन है, लेकिन इसके बावजूद पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक प्रेस वार्ता कर इसे मोदी सरकार की साजिश करार दिया था. संगठन का कहना था कि यह जानबूझकर नरेंद्र मोदी सरकार के इशारे और किया जा रहा है जिससे समाज में सांप्रदायिक माहौल बिगड़े. बोर्ड ने कोर्ट के फैसले को खिलाफ आने की सूरत में देशव्यापी जन आंदोलन छेड़ने की चेतावनी भी दी है.
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