तीन तलाक: आतिया साबरी जैसी कई पीड़ित मुस्लिम महिलाओं के लिए खुली इंसाफ की राह

ये है मुस्लिम महिला की हक की लड़ाई लड़ने वाली आतिया की कहानी, जिसकी आपबीती सुन आपकी आंखें भी  नम हो जाएगी

By: pallavi kumari

Updated: 22 Aug 2017, 12:09 PM IST

नोएडा. आपको सहारनपुर की मुस्लिम महिला आतिया साबरी तो याद ही होगी। जो काफी हिम्मत कर के तीन तलाक के मामले में खुलकर सामने आई थी। तीन तलाक पर आतिया ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। और आज उनकी जैसी कई महिलाएं जो तीन तलाक का दंश झेल रही थी, सुप्रीम कोर्ट ने आज उनको बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एक बार में तीन तलाक पर अगले छह महीने तक के लिए रोक लगा दी है। सुप्रीम ने कोर्ट ने कहा है कि संसद इसपर 6 महीने के भीतर कानून बनाए। संसद जब तक इस पर कानून नहीं लाती तब तक तीन तलाक पर रोक रहेगी। अगर 6 महीने के भीतर कानून नहीं बनता है तो ये तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आगे भी जारी रहेगा।


रूला देती है आतिया की कहानी

सहारनपुर के मंडी कोतवाली के आली की चुंगी की आतिया साबरी का निकाह 25 मार्च 2012 को हरिद्वार में लक्सर के गांव सुल्तानपुरी कुन्हारी के वाजिद अली के साथ हुआ था। निकाह के बाद दो बेटियां पैदा हुई। इसी बात से खफा होकर ससुरालियों ने उस पर चरित्र खराब होने का आरोप लगाकर 13 नवंबर 15 को जहर खिलाकर मारने का प्रयास किया। उन्हें घर से निकाल दिया। साल 2016 में आतिया के पति ने कागज पर तीन तलाक लिखकर आतिया से अपना रिश्ता तोड़ लिया था।

 

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जहर पिलाकर मारने की मारने की गई थी

आतिय का कहना है कि दिसंबर 2015 में उन्हें जहर पिलाकर मारने तक की कोशिश की गई थी, पड़ोसियों ने उन्हें बचाया। इसके बाद वह अपने मायके चली गई थीं, जहां वह करीब डेढ़ साल तक रहीं। ससुराल में आतिया को दहेज के लिए भी प्रताड़ित किया जा रहा था। दहेज में मिले सामान को बेच दिया गया था और लाखों रुपए कैश की मांग की जा रही थी।

 तीन तलाक की प्रक्रिया को गलत ठहराते हुए आतिया ने 8 जनवरी 17 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। 15 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए बाल कल्याण एवं विकास मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय और अल्प संख्यक मंत्रालय के सचिवों, दारुल उलूम देवबंद पीड़ितों के पति वाजिद अली को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के आदेश दिए। बता दें कि इस मामले में दारुल उलूम देवबंद भी शामिल है, कागज पर लिखकर तलाक के इस ममाले में शरीयत ने शौहर वाजिद से आतिया का तलाक जायज ठहराया था।

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आतिया तीन तलाक के विरोध में सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। उसका आरोप था कि उसके पति ने उसकी बिना जानकारी के एक कागज पर तीन तलाक लिखकर भेज दिया। उसके पति ने देवबंद दारुल उलूम की फतवा कमेटी को आधी अधूरी जानकारी देकर फतवा जारी करा लिया। देवबंद दारुल उलूम ने भी उससे पूछे बगैर और मामले की पूरी तहकीकात किए गए बगैर तलाक दिए जाने का फतवा जारी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में आतिया ने फतवा को लेकर देवबंद की कमेटी को भी प्रतिवादी बनाया था।


तीन तलाक के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जाने वाली आतिया साबरी कहती हैं कि तीन तलाक की व्यवस्था खत्म होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि न तो वह शरीयत के खिलाफ हैं और न ही देवबंद के फतवों से उन्हें परहेज है। लेकिन महिलाओं के लिए वह व्यवस्था में सुधार चाहतीं हैं। किसी भी व्यक्ति को जरा सी बात पर तीन तलाक देकर किसी की जिंदगी बर्बाद करने का क्या अधिकार है। उससे कम से कम मामले की पूरी जानकारी करनी चाहिए। महिला से पूछा जाना चाहिए कि क्या वह भी तलाक चाहती है या नहीं। तलाक के बाद महिला कहां जाए, कौन करेगा अचानक तलाक मिलने वाली महिला और उसके बच्चों की परवरिश। वह सिर्फ अपने लिए ही नहीं समाज की महिलाओं के न्याय की बात कर रही है।

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