UP Election 2017: कांग्रेस की वापसी के लिए राज बब्बर ने बनाया ये मास्टर प्लान

UP Election 2017: कांग्रेस की वापसी के लिए राज बब्बर ने बनाया ये मास्टर प्लान
raj babbar

sandeep tomar | Publish: Dec, 04 2016 06:03:00 PM (IST) Noida, Uttar Pradesh, India

यूपी कांग्रेस में जमीनी राजनीति की वापसी कर जीत की उम्मीद कर रहे हैं प्रदेश अध्यक्ष

अमित शर्मा, नई दिल्ली/नोएडा. कभी देश के राजनीति की धड़कन रही कांग्रेस आज हाशिये पर है. आज उस प्रदेश में भी उसे एक पहचान की दरकार है जहां कभी उसके नाम की तूती बोलती थी. अपनी साख की वापसी के लिए पार्टी के द्वारा लगाया गया हर दांव अब तक कमोबेश असफल ही साबित हुआ है. ऐसे में पार्टी ने एक बार फिर अपने 'बेसिक' फैक्टर को आजमाने की कोशिश कर रही है. यानी पार्टी अपनी जड़ों की ओर एक बार फिर से देखने की कोशिश कर रही है. इसकी शुरुआत पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं के अनुभव को फिर से आजमाकर देखने से की जा रही है.

चाहिए कांग्रेस के सच्चे सिपाही

कांग्रेस पार्टी के एक सूत्र के मुताबिक़ प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर प्रदेश में कांग्रेस की वापसी के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं. इसके लिए उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भरोसे में लेकर एक प्लान तैयार किया है. वे प्रदेश के हर क्षेत्र से ऐसे पुराने कांग्रेसियों को ढूंढ कर संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं जिन्होंने कभी कांग्रेस में अपनी किस्मत आजमाई थी, जिन्हें आज भी कांग्रेस की नीतियों में भरोसा है. जानकारी के अनुसार राजबब्बर ने प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आज़ाद और कैम्पेन समिति के अध्यक्ष संजय सिंह को भरोसे में लेकर अपने विश्वस्त लोगों की एक कमेटी तैयार की है. इस कमेटी का काम हर एक क्षेत्र से विशेष मुद्दों की पहचान करना होगा जिसके आधार पर पार्टी चुनाव में अपना खोया आधार वापस पा सकती है.

ये है सबसे बड़ी जिम्मेदारी

पार्टी के एक वरिष्ठ सूत्र के मुताबिक़ पुराने कांग्रेसियों ने राजबब्बर को वह फार्मूला समझाने की कोशिश की है जिसके दम पर आज की स्थिति में भी पार्टी सम्मानजनक वापसी का ख़्वाब देख सकती है. जानकारी के अनुसार राजबब्बर को इस सच से अवगत कराने की कोशिश की गयी है कि राहुल गांधी की 'किसान यात्रा' और अन्य नेताओं की '27 साल, यूपी बेहाल' यात्रा लोगों तक अपनी पहचान छोड़ने में तो कामयाब जरूर हुई है, लेकिन इनका इतना असर नहीं हुआ है कि यात्रा में उमड़ी भीड़ वोटों में तब्दील हो सके. इसके लिए तो पार्टी को अलग ही रणनीति पर काम करना पड़ेगा.

जिताऊ उम्मीदवारों की तलाश

खबर है कि प्रदेश के कुछ वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं की राय पर प्रदेश अध्यक्ष ने यह सहमति दिखाई है कि जातिवाद के खांचे में बुरी तरीके से बंटे यूपी में पार्टी को जीत के लिए अलग ही तरीके आजमाने होंगे. इसके लिए सबसे बड़ा दांव जिताऊ उम्मीदवारों को ही टिकट दिए जाने की भी है.

पुराने कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी

इसी बात को ध्यान में रखते हुए इन भरोसेमंद सिपाहियों को उन लोगों की पहचान करने की जिम्मेदारी दी गयी है जिनके बल पर पार्टी यूपी में वापसी कर सके. पार्टी के इन भरोसेमंद पुराने कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी में हर एक विधानसभा क्षेत्र से उन उम्मीदवारों की पहचान करना शामिल है जो खुद अपने दम पर भी जीत दिलाने की क्षमता रखते हैं. यानी यह बात लगभग तय हो गयी है कि इस बार उन्हीं उम्मीदवारों को टिकट मिलने वाला है जो पार्टी की छवि से अलग अपने क्षेत्र में खुद की अपनी पहचान रखते हों और उनका खुद का अपना जनाधार हो.

सौ सीटों पर फोकस

पार्टी को यकीन है कि 403 सीटों की विधानसभा में उसे कम से कम सौ ऐसी सीटों और उनमें ऐसे उम्मीदवारों की पहचान करना है जो अपने दम पर भी पासा पलटने की क्षमता रखते हों. पार्टी के अनुसार यह काम बहुत मुश्किल नहीं होना चाहिए. पार्टी के वरिष्ठ नेता के अनुसार ऐसे सौ क्षेत्रों की पहचान कर पूरी मेहनत की जाय, इन सभी क्षेत्रों में पर्याप्त संसाधन लगाए जाएं, गांधी परिवार को भी इन क्षेत्रों में प्रचार करने के लिए राजी किया जाए तो पार्टी की साख में वृद्धि जरूर हो सकती है.

पीके से अलग होगी योजना

यहां यह बता देना भी जरूरी है कि कांग्रेस के 'तारणहार' बनकर आये प्रशांत किशोर उर्फ़ 'पीके' ने भी कुछ इसी तरह की योजना तैयार की थी. उन्होंने फॉर्म भरवाकर और हर एक क्षेत्र से उम्मीदवारों को जनता से सम्पर्क कर उनका रिकॉर्ड पीके के कार्यालय में जमा करने की बात कही थी. इसके आधार पर वे यह तय करना चाहते थे कि कोई उम्मीदवार किसी क्षेत्र विशेष में किस हद तक लोकप्रिय है और उसके वहां जीतने की क्या सम्भावनाएं थीं. इस योजना में सब कुछ अंतिम स्तर पर पीके की टीम से मिली सूचना के आधार पर तय होने वाला था.

अपने कार्यकर्ताओं पर भरोसा


वहीं राजबब्बर की योजना के मुताबिक अब ऐसे उम्मीदवारों की पहचान पार्टी के वे वरिष्ठ कार्यकर्ता होंगे जो लम्बे समय से पार्टी के साथ जुड़े रहे होंगे. यानि वे जो पार्टी के बुरे समय में भी पार्टी के प्रति अपनी लॉयल्टी बरकरार रखे हुए हैं. बब्बर को उम्मीद है कि किराए के तकनीकी सलाहकारों की बजाय 'अपने' कार्यकर्ता ज्यादा सटीक और ज्यादा पुष्ट सूचना देंगे जिसके आधार पर आकलन करना और उनसे उम्मीदें टिकाना ज्यादा सुखद परिणाम देने वाला होगा.
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