रिपोर्ट में दावा: गंगा का पानी न तो पीये और न ही नहाने में करें इस्तेमाल, नहीं तो हो सकती हैं ये बीमारियां

रिपोर्ट में दावा: गंगा का पानी न तो पीये और न ही नहाने में करें इस्तेमाल, नहीं तो हो सकती हैं ये बीमारियां

Virendra Sharma | Publish: Sep, 07 2018 04:34:50 PM (IST) Noida, Uttar Pradesh, India

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जारी की आॅनलाइन चेतावनी

नोएडा. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने जीवनदायिनी गंगा के जल को लेकर चेतावनी जारी की है। सीपीसीबी के अनुसार गंगा का पानी पीने व नहाने के योग्य नहीं है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अनूपशहर से बह रही गंगा जल में बॉयोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) निर्धारित मानकों के अनुसार अधिक पाई गई है। यहां के नरौरा में बॉयोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड के साथ-साथ पीएएच वैल्यू भी ज्यादा पाया गया है। ऐसा गंगा घाट पर फैली गंदगी की वजह से होना बताया जा रहा है। दरअसल में गंगा के घाट पर अधिक गंदगी होती है। गंगा की सफाई को लेकर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते है।

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नहाने योग्य नहीं है गंगा का पानी

गंगा नदी उत्तराखण्ड के गगोत्री से होकर देश में बह रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुताबिक उत्तराखंड के शहरों में गंगा का पानी पीने योग्य है। यह वेस्ट यूपी के बिजनौर से होकर गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ, कानपुर, वाराणसी आदि जिलों से होकर गुजरती है। यूपी के बिजनौर और गढ़मुक्तेश्वर की बात करें तो यहां गंगा जल पीने के साथ—साथ नहाने के योग्य भी नहीं है। सीपीसीबी के मुताबिक अनूपशहर में गंगा नदी के पानी में बॉयोकेमिकल ऑक्सीजन डिमाण्ड (बीओडी) निर्धारित मानकों से अधिक पाया गया है, जबकि नरौरा में पीएएच वैल्यू भी ज्यादा पाया गया है। अलीगढ़ के कछला घाट पर भी पीएएच वैल्यू निर्धारित मात्रा से ज्यादा और कन्नौज में ऑक्सीजन की मात्रा कम मिली है। कन्नौज में बॉयोकेमिकल ऑक्सीजन डिमाण्ड का स्तर अधिक पाया गया है। यूपी के कानपुर और इलाहबाद, मिर्जापुर, वाराणसी में भी यहीं हालत है।

पिछले कुछ सालों में गंगा नदी की साफ-सफाई को लेकर सरकार भी सजग नजर आई है। साथ ही साफ-सफाई पर करोड़ों रुपये भी खर्च किए जाते है, लेकिन हालत कुछ उलट है। गंगा नदी में गंदगी मिलती है। गंगा का पानी मटमैला होता है। साथ ही फैलने वाली गंदगी को लेकर कोई इंतजाम भी घाट पर नहीं दिखाई देते है। पर्यावरणविद्ध रामवीर तंवर ने कहा कि बिजनौर से लेकर गाजियाबाद के गढ़तुक्तेश्वर, बुलंदशहर के नरौरा, मिर्जापुर, इलाहाबाद घाट आदि पर होने वाली गंदगी को लेकर लोग भी जिम्मेदार है। साथ ही सरकार भी गंभीर नहीं है। उन्होंने बताया कि गंगा में लोग ही गंदगी अधिक करते है। इसके लिए समाज के लोगों को भी जिम्मेदार होना होगा। उन्होंने बताया कि सरकार भी सफाई के नाम पर ढोल पिटती नजर आती है। लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी नतीजे नहीं आते है। वहीं डॉक्टरों की माने तो गंदे पानी के इस्तेमाल से पेट संबंधी गंभीर बीमारियां हो सकती है। इससे डायरिया, बुखार, लीवर आदि की बीमारी होने की संभावना रहती है।

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