खुलासा: अपने नौनिहालों की देखभाल में सबसे फिसड्डी है उत्तर प्रदेश

खुलासा: अपने नौनिहालों की देखभाल में सबसे फिसड्डी है उत्तर प्रदेश

ओडिशा, झारखंड और बिहार जैसे राज्य भी बच्चों की देखभाल के मामले में यूपी से बहुत आगे

अमित शर्मा/नई दिल्ली/नोएडा. आबादी के मामले में देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश अपने नौनिहालों की देखभाल के मामले में सबसे गया गुजरा है. योगी आदित्यनाथ की सरकार के लिए यह कम बड़ी चुनौती नहीं कि ओडिशा, झारखंड और बिहार जैसे राज्य भी बच्चों की देखभाल के मामले में यूपी से बहुत आगे हैं.

नवजात बच्चों में संक्रामक बीमारियों के फैलने और उससे उनकी जान जाने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है. यही कारण है कि केंद्र सरकार ने बच्चों के मद्देनजर प्रमुख संक्रामक जानलेवा बीमारियों की पहचान कर उनसे बच्चों को बचाने के लिए एक विशेष टीकाकरण कार्यक्रम जारी कर रखा है. इसे हर राज्य के बच्चे को उसके जन्म से ही अनिवार्य रूप से देना होता है. इस कार्यक्रम के तहत सभी बच्चों को पांच वर्ष की उम्र तक 13 टीके दिए जाने होते हैं, लेकिन मामले का शर्मनाक पहलू यह है कि देश का कोई भी राज्य अपने सभी बच्चों को सभी टीके लगाये जाने का लक्ष्य पूरा नहीं कर पाता.

अपने नवजात बच्चों को सभी टीके लगाने में सबसे आगे तमिलनाडू है, जो अपने 81 फीसदी नौनिहालों को सभी टीके लगवा पाता है. गोवा छोटा और साक्षर राज्य है. कम आबादी के कारण यहां सभी बच्चों को टीके लगाये जाने का कार्यक्रम अपेक्षाकृत बहुत आसानी से पूरा कराया जा सकता है, लेकिन गोवा भी महज 79 फीसदी बच्चों को ही सम्पूर्ण टीकाकरण उपलब्ध करवा पाता है. देश का सबसे ज्यादा साक्षर राज्य केरल इस मामले में तीसरे नम्बर पर है और वह अपने 75 फीसदी बच्चों को सम्पूर्ण टीके लगवा पाता है.

अगर उत्तर प्रदेश की बात करें तो वो इस श्रेणी में सबसे निचले पायदान से सिर्फ एक कदम ऊपर यानी 27वें नम्बर पर आता है. यूपी में टीकाकरण का आंकड़ा राष्ट्रीय औसत 44 फीसदी से भी बहुत नीचे है. आंकड़े के अनुसार उत्तर प्रदेश अपने 23 फीसदी बच्चों को ही सभी टीके लगवा पाता है. उससे खराब स्थिति सिर्फ जनजातीय आबादी की प्रमुखता वाले राज्य नागालैंड की है जो सिर्फ 21 फीसदी बच्चों को ही सभी टीके लगवा पाता है.

टीकाकरण की स्थिति बेहद चिंताजनक

यूनिसेफ के अनुसार किसी भी देश की शिक्षा और गरीबी का सीधा सम्बन्ध उसके बच्चों को लगने वाले टीके से होता है. विकसित देशों में टीकाकरण की स्थिति बेहद अच्छी है तो अफ़्रीकी या गरीब एशियाई देशों में टीकाकरण की स्थिति बेहद खराब है. यही कारण है कि नवजात बच्चों की मौत के आंकड़े विकसित देशों में काफी कम और विकासशील देशों में बहुत अधिक होते हैं.

दुनिया के इक्कीसवीं सदी में जाने के बावजूद स्थिति यह है कि आज भी दस मिलियन बच्चों का सम्पूर्ण टीकाकरण नहीं हो पाता है. दुनिया के सभी बच्चों को टीका लगाने की संयुक्त राष्ट्र (यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य सन्गठन के संयुक्त प्रयास में) की कोशिश के मद्देनजर 25 दिसम्बर 2014 को मिशन इन्द्रधनुष की शुरुआत हुई और अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह को विश्व टीकाकरण सप्ताह के रूप में मनाने का निश्चय किया गया. यूनिसेफ ने घोषित किया कि दुनिया के सभी बच्चों को टीके लगाना उसका अधिकार है और किसी भी तरीके से उसके इस कर्तव्य से नहीं रोका जा सकता.

यूनिसेफ की इस जागरूकता मुहीम का ही असर हुआ कि कई विकासशील देशों ने इसके महत्त्व को समझा और अपने यहां टीकाकरण कार्यक्रम लागू किया. भारत ने भी यह तय किया है कि साल 2020 तक वह अपने सभी बच्चों के सम्पूर्ण टीकाकरण का लक्ष्य प्राप्त कर लेगा.

यूपी में टीकाकरण पीछे क्यों?

बाल स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ प्रदीप बरनवाल के मुताबिक़ बच्चों को सभी टीके लगाना उनकी जिंदगी के लिए बेहद आवश्यक होता है. स्वास्थ्य ही नहीं उनके मानसिक विकास के लिहाज से भी इन टीकों की बहुत बड़ी भूमिका होती है. उन्होंने बताया कि कई कारणों से बच्चों को सभी टीके लगाये जाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता है. इसमें सबसे बड़ी समस्या जागरूकता की है. कम पढ़े-लिखे माता-पिता बच्चों के लिए इनकी आवश्यकता को कम करके आंकते हैं और टीकाकरण में लापरवाही बरतते हैं.

डॉक्टर प्रदीप बरनवाल के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश की बहुत बड़ी समस्या माइग्रेशन की है. लोग रोजगार, शिक्षा या अन्य सुविधाओं की तलाश में अक्सर राज्य से बाहर चले जाते हैं. यही कारण है कि बच्चों के टीकाकरण का कार्यक्रम अधूरे में ही छूट जाता है. जबकि बच्चों के टीकाकरण का कार्यक्रम पूरे देश में चलता है और वे राज्य से माइग्रेशन भी करते हैं तो वे जाने वाले राज्य के स्वास्थ्य केंद्र में जाकर बच्चों के टीके लगवाने के कार्यक्रम को जारी करके बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं. लेकिन कई मामलों में ऐसा नहीं हो पाता है.

उन्होंने बताया कि शिक्षा में हो रहे सुधार, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, सरकार द्वारा लगातार बच्चों को टीके लगाने के लिए किये जा रहे प्रचार से लोगों में आ रही जागरूकता के कारण टीकाकरण बढ़ा है. पोलियो अभियान ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभायी है. लेकिन अभी भी बहुत कुछ किये जाने की जरूरत है.  (ये आंकड़े सरकार द्वारा 11 अक्टूबर 2007 को जारी की गयी रिपोर्ट पर आधारित है.)
खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned