Big News: डीजे वाले बाबू जरा संभल कर: DJ को लेकर हाई कोर्ट का सख्त फैसला, लगाई पाबंदी

Big News: डीजे वाले बाबू जरा संभल कर: DJ को लेकर हाई कोर्ट का सख्त फैसला, लगाई पाबंदी

Ashutosh Pathak | Updated: 21 Aug 2019, 01:15:05 PM (IST) Noida, Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh, India

  • DJ बजाने को लेकर हाई कोर्ट का बड़ा फरमान
  • हाईकोर्ट ने डीजे पर लगाई पूरी तरह पाबंदी
  • कानून का उल्लंघन करने पर लगेगा लाख रुपये का जुर्माना

नोएडा। आज हर छोटे-बड़े अवसर पर लोग डीजे बजाकर, डांस करके जश्न मनाने लगे हैं। लेकिन अब हाई कोर्ट ने डीजे को लेकर बड़ फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने डीजे पर पूरी तरह पाबंदी लगा है। इसके सथ ह कोर्ट ने हिदायत दी है कि अगर किसी भी इलाके में ध्वनि प्रदूषण हुआ तो संबंधित पुलिस थाना इंचार्ज इसके लिए जवाबदेह होंगे। कोर्ट ने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों व हॉस्पिटल में भर्ती मरीजों के साथ आम लोगों के लिए ध्वनि प्रदूषण खतरा है।

हालाकि कोर्ट के इस फैसले से नोएडा के लोग काफी निऱाश हैं। उनका कहना है कि इस तरह तो कोर्ट हमारी आजादी को छीन रहा है। वहीं नोएडा के ही रहने वाले धर्मेश ने कहा कि सुप्रीम कोर्च के आदेश के बाद वैसे भी दस बजे के बाद कोई डीजे नहीं बजाता। लेकिन अब कोर्ट ने इसे पर भी पाबंदी लगा दी।

दरअसल हाईकोर्ट ने ये फैसला एक शख्स की याचिका पर दी है। जिसमें उसने बुजुर्गों, बच्चों और हॉस्पिटल का हवाला दिया था। वहीं कोर्ट ने कहा कि धार्मिक त्योहारों से पहले जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बैठक कर कानून का पालन सुनिश्चित कराए। ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून का उल्लंघन नागरिकों के मूल अधिकारों का उल्लंघन होगा

  • जिलाधिकारियों को ध्वनि प्रदूषण की शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर देने का निर्देश दिया है।
  • फोन नंबर सहित पूरा ब्योरा सार्वजनिक स्थलों पर सूचना बोर्डों में दिया जाएं।
  • शिकायत मिलने पर पुलिस तत्काल कार्रवाई करे और शोर बंद कराए।
  • हर शिकायत रजिस्टर में दर्ज की जाएगी।
  • शिकायतकर्ता का नाम गोपनीय रखा जाएगा, साथ अनाम शिकायत भी दर्ज करने के निर्देश
  • एसएमएस, वाट्सएप, ई-मेल आदि माध्यमों से या कॉल करके मिली शिकायत भी दर्ज की जाए।
  • आदेश की अवहेलना होने पर कोई भी व्यक्ति कोर्ट में अवमानना याचिका भी दायर कर सकता है।
  • ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण कानून का उल्लंघन करने वाले को पांच साल तक की कैद व एक लाख रुपये तक का जुर्माना देना पड़ सकता है।

इसके अलावा कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह प्रदेश के सभी शहरी इलाकों को औद्योगिक, व्यवसायिक और रिहायशी या साइलेन्स जोन के रूप में श्रेणीबद्ध करें।

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