मायावती को हराना चाहते हैं उन्हीं के गांव वाले

मायावती को हराना चाहते हैं उन्हीं के गांव वाले
Mayawati

sandeep tomar | Publish: Dec, 27 2016 04:34:00 PM (IST) Noida, Uttar Pradesh, India

गांव को इतना कुछ देने के बाद भी इस वजह से खुश नहीं हैं गांव वाले

नोएडा। गृहजनपद में अपनी जीत का दावा करने आैर सभी को अपना रिश्तेदार बताने वाली मायावती राजनीति में आने के बाद अपने पैतृक गांव बादलपुर में तीन बार आर्इ हैं। वह आठ साल पहले अपने गांव पहुंची थीं। यह दावा उन्हीं के गांव के लोगों ने किया है। यहीं कारण है कि उनके न आने से उनके किले आैर पार्क के बाहर गंदगी नजर आने लगी हैं। इसके साथ ही अब गांव वालों और मायावती के बीच भी दूरी नजर आने लगी है।

21 साल में तीन बार अपने गांव बादलपुर आर्इ हैं मायावती

राजनीति करियर शुरूआत होने के बाद मायावती सन १९९५ में अपने गांव बादलपुर पहुंची थीं। इसी मौके पर उन्होंने गांव में अपने परिवार आैर अन्य लोगों से मुलाकात की। इसके बाद १९९७ में मायावती दूसरी बार गांव वालों के बुलाने पर अपने गांव पहुंची। गांव के बुजुर्ग नंबरदार जगदीश ने बताया कि १९९७ में मायावती से हम लोगों ने पैतृक गांव आने का निवदेन किया था। इस पर वह गांव आर्इ थीं। जिस पर गांव वालों ने मायावती को दो से तीन लाख रुपये भेंट कर उनका अभिनंदन किया था। इसके बाद वह २००८ में आखिरी बार अपने गांव पहुंची। लेकिन इसके बाद से कर्इ बार बुलाने पर भी मायावती ने गांव को देखना तो यहां के लोगों का हाल चाल लेना तक मुनासिब नहीं समझा। मायावती को अपने गांव में पहुंचे करीब आठ साल हो गये है।

मायावती के खूबसूरत किले के बाहर बदसूरती का मंजर

मायावती के किले में लाखों रुपये की कीमत का पत्थर आैर पेड़ पौधे लगे हैं। वहीं उसके बाहर आपको बदसूरती का मंजर दिखार्इ देगा। मायावती के इस किले के चारों तरफ गोबर आैर कचरे का ढ़ेर लगा हुआ है। एेसे में करोड़ों रुपये की लागत से बने। इस किले की रंगत पर बट्टा सा लगता दिखार्इ पड़ता है।

बुजुर्गों ने कहा बसपा नहीं दूसरे दल को देंगे वोट

मायावती के अपने ही गांव में सालों से न आने आैर किसी से कोर्इ संपर्क न करने से गांव वालों के दिलों में दूरी आने लगी है। यह बात गांव के ही एक बुजुर्ग ने कही है। उन्होंने कहा कि अब बसपा सुप्रिमो मायावती आैर किसी गैर दल के नेता में हमारे लिए कोर्इ फर्क नहीं है। एेसे में हम मायावती को चुनने के बजाए, इस बार किसी अन्य पार्टी के नेता को वोट देकर चुुनेंगे। जो हमारी बात सुने आैर विकास करें।
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