इतनी मुठभेड़ों से क्या फायदा, जब नहीं रोक पा रहे अपराध

Highlights
- गौरव चंदेल की हत्याकांड के बाद ज्वेलर नरेश को गोली मारने का मामला
- नोएडा पुलिस लोगों को सुरक्षा देने में हो रही फेल साबित
- कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद भी नहीं रुक रहे जघन्य अपराध

आशुतोष पाठक/नोएडा. हाल ही में नोएडा में दिनदहाड़े एक ज्वेलर को उसकी दुकान में घुसकर कुछ बदमाशों ने गोली मार दी। नरेश पवार नाम का यह शख्स दोपहर करीब साढ़े बारह बजे सेक्टर-12 स्थित अपनी दुकान पर आता है, तभी तीन बदमाश जो हेलमेट पहने हुए थे, वे भी वहां आते हैं और नरेश पर एक के बाद एक कई गोलियां चलाते हैं। इनमें दो गोली नरेश को लगती हैं। वह घायल होकर गिर पड़ते हैं। उन्हें अस्पताल ले जाया जाता है, जहां उनका आज भी इलाज चल रहा है। बदमाश नरेश को सिर्फ गोली मारने आए थे या उनका मकसद लूट का भी था, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है। लेकिन, एक बात साफ है कि नोएडा पुलिस यहां के लोगों को सुरक्षा देने में फेल साबित हो रही है। या यूं कहें कि लोगों के जान और माल की हिफाजत शायद नोएडा पुलिस कर नहीं पा रही।

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नरेश पवार का मामला कोई पहला या अंतिम नहीं है। उनसे पहले गौरव चंदेल के साथ जो हुआ, वह किसी से छिपा नहीं है। यही नहीं, गौरव के मामले को पुलिस ने जिस तरह शुरू से आखिरी तक हैंडल किया, वह भी शर्मनाक रहा। नरेश और गौरव जैसे कई और ऐसे उदाहरण हैं, जो पुलिस की कार्यप्रणाली के साथ-साथ उसके व्यवहार व मंशा पर भी सवाल खड़े करते हैं।

प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद अपराध को नियंत्रित करने के लिए जिस तरह अपराधियों को ठोको और जेल भेजो की नीति अपनाई गई, उससे सभी ने राहत महसूस की। सभी को यह लगा कि उनकी सुरक्षा बेहतर तरीके से होगी और वे हर तरह से सुरक्षित हैं। इसका कुछ हद तक फायदा भी हुआ और प्रदेशभर में, खासकर नोएडा में लोगों को संगठित अपराध से मुक्ति मिली। लेकिन बीते छह माह से, जिस तरह अपराध ने एक बार फिर यहां सिर उठाया है, उससे लगता है कि पुलिस का खौफ अपराधियों में नहींं रहा। मुठभेड़ों के नाम पर पैर में एक या दो गोली मारकर अपराधियों को जेल भेजने वाली पुलिस अब अपराधियों के सामने लाचार नजर आती है।

खासकर कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद नोएडा के लोग यह मानने लगेे थे कि अब यहां दिन या रात हर समय हर जगह वे सुरक्षित हैं, लेकिन नरेश पवार को दिनदहाड़े उनकी ही दुकान में जिस तरह गोली मारी गई, या उससे पहले एक शाम नोएडा की सडक़ पर गौरव चंदेल की हत्या उनकी ही कार में हुई, इससे पुलिस को लेकर लोगों के कई भ्रम दूर हो गए। नोएडा के लोग अब यह कहने लगे हैं कि पहले जो पुलिस सड़काें और चौराहों पर दिखती थी, वह अब पता नहीं कहां गुम है।

ऐसे में पुलिस अधिकारियों के लिए यह गंभीर चुनौती है कि वह खुद के प्रति लोगों में अविश्वास की जो भावना बढ़ी है, उसे न सिर्फ रोकें बल्कि सकारात्मक व्यवहार से मित्र होने का वही अहसास दिलाएं, जो जनता आपसे अपेक्षा करती है। साथ ही, अपराधियों में वह खौफ जगाएं कि अपराध करना तो दूर उसके बारे में सोचने पर भी उनकी रूह कांप उठे।

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Ashutosh Pathak
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