SC जज विवाद: लगता है जंगल से कोई शेर आ गया है, सब लोग भयभीत हैं, मुझे छोड़कर- यशवंत सिन्हा

Kaushlendra Pathak

Publish: Jan, 13 2018 05:20:44 PM (IST) | Updated: Jan, 13 2018 05:24:44 PM (IST)

Noida, Uttar Pradesh, India
SC जज विवाद: लगता है जंगल से कोई शेर आ गया है, सब लोग भयभीत हैं, मुझे छोड़कर- यशवंत सिन्हा

भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने सुप्रीम कोर्टे के जजों की समस्या पर बेबाकी से बात की है।

नोएडा। सुप्रीम कोर्ट के जजों के मसले पर भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने कहा लगता है जंगल से निकल कर कोई शेर आ गया है और सब लोग भयभीत हैं, मुझको छोड़कर शायद। पत्रिका डॉट कॉम से एक्सक्सूसिव बात करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि देश में ऐसी बातें हो रही हैं, जिसकी कभी चर्चा भी नहीं होती। उन्होंने कहा कि देश और देश के प्रजातन्त्र के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है। भारत तभी बचेगा, जब देश का प्रजातन्त्र बचेगा। अगर प्रजातन्त्र ही चला गया तो देश में कुछ बचेगा ही नहीं।

जजों की वक्तव्य से सीख ले सब लोग

पत्रिका डॉट कॉम से बात करते हुए यशवंत सिन्हा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जजों के वक्तव्य के चलते जो असाधारण स्थिति पैदा हुई है। उससे सबको सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के प्रजातन्त्र के बारे में, देश के भविष्य के बारे में, जिनको भी चिंता है, सबको भयमुक्त होकर डर को किनारे छोड़ते हुए आगे आना चाहिए, देश के प्रजातन्त्र की रक्षा के लिए।

जजों का मामला सियासी नहीं

जब उनसे पूछा गया कि जजों का मामला कहीं सियासी तो नहीं। इस पर उनका कहना था कि ये केवल सियासी नहीं है, सियासी एक छोटी बात होती है। ये सियासी इसलिए नहीं है कि जैसा जजों ने खुद कहा है कि ये देश के भविष्य के बारे में है। ये देश की प्रजातन्त्र की सुरक्षा के बारे में है। इसलिए, बाध्य होकर उन्हें अपनी बात सार्वजनिक रूप से कहनी पड़ी। भाजपा नेता ने कहा कि जजों ने जो एक शब्द कहा है कि वी आर गोइंग टु दी नेशन, वी आर टॉकिंग टु दी नेशन। ये देश की सार्वभौमिकता कहां है, वो देश की जनता के पास है। लोकतंत्र के चारों ऑर्गन, उनकी जो भी भूमिका है, वो भूमिका उसी से निकलती है, जो सार्वभौमिकता है और जो जनता के पास है। जनता के पास जाने का मतलब क्या हुआ, जो डेमोक्रेसी के चारो अंग हैं, उनसे ऊपर उठकर जनता को संबोधित कर रहे हैं।

जजों के बयान पर राजनीति होनी चाहिए

यशवंत सिन्हा से जब पूछा गया कि जजों के बायन पर राजनीति होनी चाहिए तो उनका कहना था बिल्कुल ही होनी चाहिए। उनका कहना था कि हर सोचने वाले हिंदुस्तानी को इसके बारे मे चिंता करनी चाहिए। जब जज बोल रहें है तो राजनीतिक पार्टी कैसे खामोश रह जाएगी। उनका कहना था कि अगर यहां पॉलिटिक्स नहीं होगी तो कहां पॉलिटिक्स होनी चाहिए। क्या नेता पेड़ पौधों के साथ या जंगली जानवरों के साथ राजनीति करें? राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा आज पेश हो गया है। अगर राजनीति का अर्थ है प्रजातन्त्र कि सुरक्षा तो यह आज का राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा है।

आज भी लोग डरे हुए हैं

भाजपा नेता जब पूछा गया कि मौजूदा समय इमरजेंसी से किस प्रकार अलग है या वही दोहराने की कोशिश है? इस पर उनका कहना था कि 1977 में इमरजेंसी लगी थी, उस समय के संबिधान के अनुसार, कभी कभी इमरजेंसी लग जाती है, डर पैदा कर के ताकि लोग डर जाएं। उन्होंने कहा कि आज भी लोग डरे हुए हैं। इसलिए कोई अपना काम नहीं कर पाएगा ठीक से।

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