देश में लॉकडाउन की भेंट चढ़ गई 60 लाख पेशेवर नौकरियां

पत्रिका स्पेशल रिपोर्ट

  • कोरोना काल में 27.11 फीसदी की तेजी से बढ़ी देश में बेरोजगारी दर
  • 2019 मई से अगस्त के दौरान 1.88 करोड़ पेशेवर कर्मचारी थे जो घटकर 2020 में 1.22 करोड़ रह गए
  • रोजगार छिनने वालों में दूसरे नंबर पर औद्योगिक कर्मचारी

 

By: shailendra tiwari

Updated: 30 Sep 2020, 03:21 PM IST

लॉकडाउन के दौरान रोजगार छिनने से वेतनभोगी कर्मचारियों में सबसे ज्यादा नुकसान पेशेवर कर्मचारियों का हुआ है। इनमें इंजीनियर (सॉफ्टवेयर इंजीनियरों समेत), फिजिशियन, टीचर, अकाउंटेंट, एनालिस्ट और ऐसे ही निजी या सरकारी संगठनों में कार्यरत पेशेवर कर्मचारी शामिल हैं। यह निष्कर्ष है सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के ताजा सर्वे का। सर्वे के मुताबिक, समान रूप से योग्यता प्राप्त ऐसे पेशेवर इनमें शामिल नहीं हैं जो स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करते हैं। ऐसे लोगों को बतौर स्वनियोजित पेशेवर उद्यमी वर्गीकृत किया गया है।

एक साल में कहां पहुंची बेरोजगारी
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मई से अगस्त तक 'जॉब लॉस'
2019 से 2020 तक - 66 लाख
मई-अगस्त 2020 - 59 लाख

(स्रोत: सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी)

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ये रहे कारण
-लगातार आर्थिक गतिविधियों पर बंदिशें
-स्थानीय स्तर पर व्यापारिक गतिविधियों पर तालाबंदी

जून में अनलॉक शुरू, पर नतीजा

-आर्थिक बहाली और रोजगार की संभावनाएं सुस्त पड़ीं
-सचिव और ऑफिस क्लर्क जैसे बीपीओ/केपीओ वर्कर और डेटा एंट्री ऑपरेटर यानी व्यापक तौर पर डेस्क वर्क करने वाले कर्मचारियों पर लॉकडाउन का ज्यादा असर नहीं पड़ा। इनमें से अधिकांश ने 'वर्क फ्रॉम होम' को अपना लिया। इस वर्ग के कर्मचारियों के रोजगार में 2016 से ही वृद्धि नहीं देखी गई है, बल्कि 2018 में 1.5 करोड़ से घटकर ऐसे रोजगार 2020 में 1.2 करोड़ तक सिमट गए।
-बीते एक वर्ष में रोजगार में गिरावट के लिहाज से दूसरे नंबर पर औद्योगिक कर्मचारी रहे। इस वर्ग में करीब 26 फीसदी रोजगार कम हुए।
-सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी के मुताबिक, भारत में कोरोना काल में बेरोजगारी दर 27.11 फीसदी बढ़ी है। जाहिर है, सरकार को बड़ा सोचना होगा, बड़े और साहसिक कदम उठाने होंगे और बड़े स्तर पर निवेश को तरजीह देनी होगी।

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2016 से 2020 तक जॉब मार्केट में पेशेवर कर्मचारियों का ग्राफ
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जनवरी-अप्रेल 2016 1.25 करोड़
मई-अगस्त 2019 1.88 करोड़
सितंबर-दिसंबर 2019 1.87 करोड़
जनवरी-अप्रेल 2020 1.81 करोड़*
मई-अगस्त 2020 1.22 करोड़**

* सीएमआइई के मुताबिक, जनवरी-अप्रेल 2020 के आकड़े में रोजगार के अवसरों में गिरावट पर कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए लागू किए गए लॉकडाउन का आंशिक असर शामिल है।
** जनवरी-अप्रेल के चार माह की तुलना में मई-अगस्त के दौरान पेशेवरों के रोजगार तेजी से गाज गिरी। 2016 के बाद पेशेवरों के रोजगार की इतनी खराब स्थिति कभी नहीं देखी गई थी। बीते चार वर्षों में रोजगार के लिहाज से अर्थव्यवस्था में हुई वृद्धि लॉकडाउन की भेंट चढ़ गई।
स्रोत: कंज्यूमर पिरामिड्स हाउसहोल्ड सर्वे, सीएमआइई

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