आपकी बात: घरेलू हिंसा पर रोक कैसे लगाई जा सकती है?

  • पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था, पेश हैं पाठकों की चुनिंदा प्रतिक्रियाएं

By: shailendra tiwari

Published: 16 Oct 2020, 05:38 PM IST

कुरीतियों को खत्म करें
घरेलू हिंसा पर रोक लगाने के लिए महिलाओं को शिक्षित करना एक उपाय हो सकता है, पर समस्या का पूरा समाधान नहीं। इसके साथ-साथ हमें उस पुरुष प्रधान सत्ता का अंत भी करना होगा, जो सदियों से चली आ रही है। हमें समाज की उन कुरीतियों को दूर करना होगा, जो घरेलू हिंसा को बढ़ाती है। जैसे पुत्र न होने पर महिला की उपेक्षा की जाती है। मासिक धर्म के दौरान उससे दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है। समाज में ***** समानता की सोच विकसित करना आवश्यक है।
-हिमांशु गुप्ता, खरगोन, मप्र
..............

बदलना होगा नजरिया
भारत में महिलाओं की सुरक्षा अब भारत में एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर बहुत हद तक बढ़ी है। महिलाएं अपने घरों से बाहर निकलने से पहले दस बार सोचती हैं, खासकर रात में। भारत मे महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार प्राप्त है। इसके बावजूद महिलाओं का उत्पीडऩ होता है। महिलाएं अब देश में सम्मानित पदों पर हैं, लेकिन अगर हम पर्दे के पीछे नजर डालें, तो भी हम देखते हैं कि उनका शोषण हो रहा है। प्रत्येक दिन हम अपने देश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले भयावह अपराधों के बारे में पढ़ते हैं। घरेलू हिंसा को रोकने के लिए पुरुषों के साथ-साथ स्वयं नारी को नारी के प्रति सोच का नजरिया बदलना होगा।
-डॉ. अजिता शर्मा, उदयपुर
...............

शीघ्र न्याय जरूरी
महिलाओं की सुरक्षा व संरक्षण के लिए बने कानूनों की सफल क्रियान्विति जरूरी है। किसी महिला का शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक या यौन शोषण किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाना जिसके साथ महिला के पारिवारिक संबंध हैं, घरेलू हिंसा में शामिल है। घरेलू हिंसा पर तभी रोक लगाई जा सकती है, जब अन्याय का शिकार होती महिलाओं को शीघ्र न्याय मिले।
-शिवजी लाल मीना, जयपुर
................

नारी स्वावलंबन ही उपाय
जो नारियां घरेलू हिंसा की शिकार होती हैं, उन्हें स्वावलंबी बनाया जाए। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा, जिससे वे किसी भी घरेलू हिंसा का मुकाबला कर सकेंगी। शिक्षित, स्वावलंबी नारी ही समाज को शक्तिशाली बना सकती है। घरेलू हिंसा के कानूनों को कड़ा बनाना चाहिए। जब लड़की अपने पैरों पर खड़ी होने लायक हो, तभी उसका विवाह किया जाना चाहिए।
-सुभाष चन्द्र पारीक, जयपुर
...........

दंपती में समन्वय जरूरी
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में घरेलू हिंसा की मुख्य जड़ पति-पत्नी के रिश्तों के मध्य बढ़ती खटास के साथ ही दहेज प्रथा भी है। सामाजिक युगलों के मध्य आजीवन समन्वय, महिलाओं का सम्मान व सशक्तीकरण के साथ ही दहेजमुक्त समाज का होना भी आवश्यक है।
-लोकेश बड़वाडी, गठवाडी, जयपुर
..................

बेरोजगारी और नशा है प्रमुख वजह
बेरोजगारी और नशा घरेलू हिंसा के सबसे प्रमुख कारण हैं। इन दोनों समस्याओं का निराकरण होने पर घरेलू हिंसा पर एक सीमा तक रोक लग सकती है। केवल कानून बना देने से कोई परिवर्तन नहीं होगा। बेरोजगारी और नशे पर लगाम लगाकर ही घरेलू हिंसा पर रोक लगाई जा सकती है।
-अविनाश भोजक, नोहर, हनुमानगढ़
.................

दोहरी मानसिकता
एक महिला शादी के बाद अपना परिवार छोड़ कर सुसराल आती है। पूरा जीवन अपने घर के लोगों की खुशी के लिए खपा देती है। इसके बाद भी कोई महिला घरेलू हिंसा का शिकार होती है, तो सुनकर दुख होता है। औरत अन्नपूर्णा भी होती है। एक तरफ तो लोग मंदिरों में देवी की पूजा करते हैं, दूसरी तरफ, महिलाओं पर आत्याचर किए जाते हैं। यह दोहरी मानसिकता क्यों? जिस घर में औरत खुशहाल रहती है, वह घर भी खुशहाल रहता है।
-शैलेंद्र गुनगुना झालावाड़
...............

नैतिक शिक्षा जरूरी
घरेलू हिंसा को रोकने के लिए सर्वप्रथम जो आवश्यक चीज है वह है नैतिक शिक्षा। बचपन से ही अगर अच्छे संस्कार मिल जाएं तो हर तरह की ङ्क्षहसा पर लगाम लग सकती है।
-धर्मवीर राड़, नागौर
..............

बेहतर वातावरण की जरूरत
घरेलू हिंसा के सभी पीडि़त आक्रामक नहीं होते हैं। हम उन्हें एक बेहतर वातावरण उपलब्ध करा कर घरेलू हिंसा के मानसिक विकार से बाहर निकाल सकते हैं। सुधार लाने के लिए सबसे पहले कदम के तौर पर यह आवश्यक होगा कि पुरुषों को महिलाओं के खिलाफ रखने के स्थान पर पुरुषों को इस समाधान का भाग बनाया जाए।
-अशोक खदाव, मादलिया, जोधपुर
............

खत्म करें पुरुषवादी सोच
घरेलू हिंसा पर रोक के लिए बच्चों में ऐसे संस्कार पैदा करें, जिससे पुरुष और महिला को समान समझने की मानसिकता विकसित हो। विद्यालय एवं कॉलेज के पाठ्यक्रम में परिवार से संबंधित पाठ्यक्रम हो, मनोवैज्ञानिक कक्षाओं का संचालन किया जाए। बालिकाओं को भी सक्षम बनाया जाए। महिला हिंसा की जड़ हमारी पुरुषवादी सोच है। इस सोच को समाप्त करके ही महिला हिंसा समाप्त कर सकते हैं।
-सत्तार खान कायमखानी, नागौर
............

नशा भी है प्रमुख कारण
घरेलू हिंसा का सबसे बड़ा कारण शराब है। एक व्यक्ति जब नशे की हालत में होता है तो उसे पता नहीं होता कि वह क्या कर रहा है। अगर लोग शराब सेवन छोड़ दें, तो घरेलू हिंसा बहुत कम हो सकती है । तालमेल का अभाव भी घरेलू रिश्ते में दरार बढ़ाता है। इसके लिए परस्पर भरोसा होना आवश्यक है, जो रिश्ते में मजबूत स्तम्भ का काम करती हैं।
-गोपाल यादव दुर्ग , छत्तीसगढ़
..........

आपसी प्रेम जरूरी
आपसी समझ में कमी, सहनशीलता का अभाव, आर्थिक और सामाजिक समस्याएं घरेलू हिंसा को बढ़ावा दे रही हैं । शिक्षा, संस्कृति, प्रेम और एक दूसरे के प्रति सम्मान की भावना ही घरेलू हिंसा पर प्रभावी रोक लगा सकती हैं। इसके अतिरिक्त घरेलू हिंसा रोकने के लिए कानून का कठोरता से पालन भी आवश्यक है। सबसे जरूरी है कि परिवार के मुखिया की समझ, सामंजस्यता और नियंत्रण। यदि परिवार में संस्कारों का उचित प्रवाह बना रहेगा, तो घरेलू हिंसा पर स्वत: रोक लग जाएगी।
-अरविंद शर्मा, जयपुर
............

समाज व कानून साथ मिलकर काम करे
देश मे घरेलू हिंसा के बढ़ते मामलों पर हमारे पास एक ही विकल्प है कि समाज और कानून दोनों अपने-अपने स्तर पर प्रयास करें। सबसे पहले सरकार को कड़े कानून बनाने चाहिए। फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाने चाहिए ताकि पीडि़त को तुरंत न्याय मिले। दूसरी तरफ समाज से ये अपेक्षा कि जाती है कि वह महिलाओं का सम्मान करने की परम्परा विकसित करे ।अभिभावक खुद बच्चों के साथ अच्छे से पेश आएं, ताकि उनकी मानसिकता पर नकारात्मक असर ना हो। समाज और कानून के आपसी समन्वय से ही इस समस्या से निजात पायी जा सकती है।
-गुमान दायमा हरसौर,नागौर
............

स्वस्थ संवाद जरूरी
घरेलू हिंसा के पीछे जो कारक हैं वह परिवार में किसी एक विशेष की सत्ता बनाए रखने की प्रबल इच्छा है। वह व्यक्ति अपनी सोच व समझ को ही महत्त्वपूर्ण व आखिरी मानता है। ऐसी स्थिति में सभी रिश्ते पिसते हैं, घर में कलह व भय का वातावरण बना रहता है। जो भी व्यक्ति घर में अपना अभिमत रखने का प्रयास करता है, तो उसे अनुशासनहीन माना जाता है। परिवारों में स्वस्थ संवाद और एक दूसरे के लिए सहयोग की भावना का विकास करके ही घरेलू हिंसा से बचा जा सकता है।
-गोपाल लाल पंचोली, शाहपुरा,भीलवाड़ा
......................

जागरूकता जरूरी
देश में घरेलू हिंसा के मामले निरंतर बढ़ते जा रहे हैं। वर्तमान समय में देखा जाए तो पिछड़े इलाकों में महिलाएं, पुरुष, बाल-बच्चे तथा बुजुर्ग घरेलू हिंसा के ज्यादा शिकार होते हैं। घरेलू हिंसा रोकने के लिए इससे जुड़े कानून व अधिनियम को सटीक रूप देने की जरूरत है। ग्रामीण इलाके में कानून की जानकारी का अभाव है। इसलिए पीडि़त अपनी आवाज नहीं उठा पाते। कई मामले सामाजिक पंच निपटा देते हैं।
-राजेन्द्र जांगिड़, बाड़मेर
....................

प्रभावी कानून जरूरी
घरेलू हिंसा हमारी संस्कृति और विकास में एक विकार है। इसे रोकने के लिए पुरुषों और समाज को अपनी मनोवृत्ति बदलनी होगी। घरेलू हिंसा की शिकार अधिकतर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं होती हैं, जिनका कारण बेमेल विवाह और समाज का डर है। सरकार को प्रभावी कानून बनाने चाहिए, ताकि घरेलू हिंसा पर लगाम लगाई जा सके
-किरताराम धेडू, जालोर
...................

राष्ट्रव्यापी अभियान जरूरी
महिला सुरक्षा को लेकर बनाए गए नियम व कानून के बाद भी महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध की घटनाएं समाज की स्त्री के प्रति संकुचित मानसिकता को व्यक्त करती है। भारत ही नहीं, अपितु विश्व स्तर पर घरेलू हिंसा के मामलों में निरंतर वृद्धि हो रही है। ऐसी हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए अब महिलाओं को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना आवश्यक है, ताकि वह स्वयं हानि पहुंचाने वालों के विरुद्ध आवाज उठा सकें। सामूहिक तौर पर इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए ऐसी हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए राष्ट्रव्यापी सामाजिक अभियान की शुरुआत करनी चाहिए।
-निष्ठा टहिलयानी, जयपुर

shailendra tiwari
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned