आपकी बात, महिलाएं अब भी हर जगह असुरक्षित क्यों हैं?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया, पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: shailendra tiwari

Updated: 30 Sep 2020, 05:39 PM IST

कथनी और करनी में अंतर
हर जगह महिलाएं असुरक्षित हंै। रोजाना न जाने कितनी मासूम बच्चियां और महिलाएं यौन उत्पीडऩ की शिकार होती हंै। 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओÓ जैसे नारे भी लगाए जाते हैं, लेकिन महिलाओं के उत्पीडऩ के मामलों में कमी नहीं आई है। यह सही है कि महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए कई तरह के कानून बने हुए हैं, लेकिन जब तक त्वरित कार्रवाई नहीं होगी और दोषी को शीघ्रता से दंडित नहीं किया जाएगा, हालात बदलने वाले नहीं हंै। खासतौर पर पुरुषों की मानसिकता बदलनी आवश्यक है। महिलाओं को सिर्फ भोग की वस्तु मानना बंद करें और उनकी सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी मानें। महिला को देवी मानने वाले समाज में उनका उत्पीडऩ शर्म की बात है। इससे साफ है कि हमारी कथनी और करनी में भारी अंतर है। इसलिए सिर्फ हल्ला मचाने से कुछ नहीं होने वाला। अब तो सभी को जागना चाहिए और महिलाओं की सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं करना चाहिए।
-किशन खारडा, बीकानेर
...................

पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ा
एक रिपोर्ट के अनुसार भारत महिलाओं के लिए दुनिया का सबसे खतरनाक देश है, क्योंकि भारत में महिलाएं असुरक्षित है। देश के कई इलाकों में आज भी महिलाओं का रात में घर से बाहर निकलना आत्महत्या करने जैसा है। थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन द्वारा किए गए एक सर्वे में महिलाओं के प्रति होने वाली यौन हिंसा, सांस्कृतिक विसंगति और मानव तस्करी की घटना के आधार पर भारत को खतरनाक देशों की सूची में सबसे ऊपर रखा है। भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। इसका मुख्य कारण यहां के नेताओं की ओछी राजनीति और लचीला कानून है, जिसमें पीडि़ता को न्याय के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। इसके अलावा पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव के कारण हम नारी सम्मान को भूल गए हैं। हमें अपनी अपनी संस्कृति की ओर लौटना होगा और समझना होगा की नारी समाज की जननी है। जब नारी स्वस्थ और शिक्षित होगी, तभी समाज व देश का कल्याण हो सकेगा। हमें नारी का सम्मान करना होगा।
-सुदर्शन सोलंकी, मनावर,धार, मप्र
...........................

दोहरी मानसिकता
समाज की दोहरी मानसिकता महिलाओं की असुरक्षा का प्रमुख कारण है। महिलाओं के संबंध में दोहरी मानसिकता छोड़ें। संस्कारित एवं विवेक सम्पन्न समाज ही इस विद्रूप मानसिकता से निजात दिला सकता है। वैयक्तिक सम्मान एवं नैतिक उत्थान ही विकृत मानसिकता एवं व्यवहार का परिमार्जक साबित हो सकता है। आओ मिलकर स्वस्थ्य समाज, मानव एवं मानवता का सृजन करें। मानवता, नैतिकता एवं स्वस्थ मानसिकता महिलाओं के प्रति हो रहे पाशविक व्यवहार को नियन्त्रित करने में सहयोगी सिद्ध होगा। इसकी शुरुआत स्वयं से ही करें।
-डॉ.अमित कुमार दवे, उदयपुर
.......................

सशक्त नारी ही सरक्षित
जब तक महिलाओं को सशक्त नहीं बनाएंगे तब तक महिला हर जगह असुरक्षित रहेगी, तो हमें महिला सशक्तीकरण पर ध्यान देना चाहिए। जब सशक्त होगी नारी, तब सुरक्षित होगी नारी। हमे हमारे समाज की जो सोच है उसको परिवर्तित करने के लिए भी जितने प्रयास हो सकें, उतने करने होंगे, क्योंकि अगर महिलाओ के साथ अपने घर में ही हिंसा हो रही हो तो उनको अपने परिवार की इज्जत का हवाला देकर चुप करा दिया जाता है। हमारा समाज पुरुष प्रधान समाज है और इसी के कारण वर्षों से पुरुष महिलाओ को कमजोर मानकर पीड़ा देते आए हैं। हमें इन पुरुष प्रधान समाज की बेडिय़ों से महिलाओं को मुक्त कर, उनको शिक्षा के जरिए सशक् त करना होगा। हमारे समाज में शुरू से ही औरत को कमजोर माना जाता है। यह बताया जाता है कि महिलाएं कमजोर होती हंै। उनको बाहर जाकर काम नहीं करना चाहिए, उनको घर का काम ही करना चाहिए। हमें समाज को औरतों की ताकत से वाकिफ कराना होगा।
-मुदिता, सवाई माधोपुर
......................

संस्कार निर्माण की जरूरत
आज हम जब बात करते हैं महिला सशक्तीकरण की, महिलाओं की समानता की, लेकिन ये मुद्दे तब तक व्यर्थ हंंै जब तक महिलाएं ही सुरक्षित न हों। महिलाओं की सुरक्षा को हम उन्हीं परिस्थितियों में सुनिश्चित कर सकते हैं, जब लोगों की मानसिकता में सुधार के प्रयास किए जाएं। हम महिलाओं के हित में कितने ही कानून क्यों न बना लें, लेकिन संस्कारहीन दूषित मानसिकता के लोगों से महिलाएं हर जगह पीडि़त होती रहेगी। महिलाएं तभी सुरक्षित रहेंगी, जब बचपन से ही संस्कारो पर बल दिया जाए।
-डॉ. अजिता शर्मा, उदयपुर
.......................

कड़े कानून की जरूरत
महिलाओं के प्रति देशभर में क्राइम बढ़ते ही जा रहे हैं। महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार को कम करने के लिए सरकार को कठोर से कठोर कानून बनाने चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति महिलाओं के साथ हिंसा करने से पहले दस बार सोचे।
-इब्राहीम खान, बड़ाबास,अलवर
.......................

रूढ़िवादी मानसिकता हावी
महिलाओं को समान अधिकार दिए जाएं, ऐसी बातें तो बहुत की जाती हैं, पर समाज मे आज भी एक ऐसा तबका है, जो महिलाओं की आजादी को स्वीकार नहीं कर पा रहा है। इस वर्ग मे ज्यादातर ऐसे लोग हैं जो संस्कारहीन हैं और अपने रूढि़वादी विचारों से मुक्त नहीं हो पाए हैं। उन्हें महिलाओं का पुरुषों के साथ कदम मिला कर चलना रास नही आ रहा है। इन्हीं सब बातों के चलते महिलाओं पर जुल्म हो रहे हैं।
-नरेश कानूनगो, बेंगलुरु
......................

बदहाल कानून व्यवस्था
अभिभावकों की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने पुत्रों को महिलाओं का सम्मान करना सिखाएं। देश की कानून व्यवस्था की बदहाली को भी नकारा नहीं जा सकता।
-देवराज सिंह राठौर, सक्ती, छत्तीसगढ़

........................

दूषित मानसिकता
परिवारों में तकनीकी की दौड़ में बच्चों को आगे करने की रेस में संस्करों की शिक्षा की अवहेलना से नैतिकता की नींव कमजोर पड़ रही है। समाज में दूषित मानसिकता के पुरुषों की संख्या बढ़ा रही है ये भी महिलाओं के असुरक्षित होने का बहुत मुख्य कारण है।
-नीरू चतुर्वेदी, बूंदी
....................

शीघ्र न्याय जरूरी
महिलाएं अब भी असुरक्षित हैं। अखबारों में हर दिन इनके साथ हो रहे अत्याचारों की खबरें छपती हैं। जब तक इनकी सुरक्षा को लेकर सिर्फ बातें होंगी, खास परिवर्तन नहीं होने वाला। जब तक इनको शीघ्र न्याय नहीं मिलेगा और अपराधियों को सजा मिलने में देरी होती रहेगी ,तब तक महिलाएं अपने को हर जगह असुरक्षित महसूस करेंगी। महिलाओं को अधिक सजग और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है।
-अशोक कुमार शर्मा, जयपुर
.............

जरूरी है शिक्षा पद्धाति में सुधार
सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए ढेरों कानून बना रखे हैं। ऐसा लगता है कि लोगों के मन में कानून का कोई डर नहीं है। इसकी वजह पुलिस और प्रशासन है। कानून में रही हुई कुछ खामियों की वजह से भी मुजरिम बच जाते है। अश्लीलता का प्रसार भी एक कारण है। अपने बचाव के लिए महिलाओं को प्रशिक्षित व जागरूक किया जाना चाहिए। साथ ही शिक्षा पद्धति में सुधार आवश्यक है।
-सुशील मेहता, ब्यावर
..............

संस्कारहीनता कारण है
महिलाएं असुरक्षित हैं। सवाल उठता है कि किससे? जाहिर है पुरुषों से। अशिक्षा, संस्कारहीनता, रूढि़वादी सोच, अनैतिकता, फिल्मों-टीवी के जरिए बढ़ती अश्लीलता, नारी को भोग की वस्तु मानने की मानसिकता, इन सबके मिले-जुले परिणाम की वजह से महिलाएं असुरक्षित हो गई हैं।
-जितेन्द्र तिलतिया, इंदौर
..............

संस्कारों की कमी
यह विडंबना है कि जैसे - जैसे देश में शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है, निर्भया जैसे मामले देखने को मिल रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर कमी कहां है? कमी है, हमारी सोच में, हमारे संस्कारों में। जब तक समाज का हर व्यक्ति महिला-पुरुष के सम्बन्धों से परे हटकर नहीं सोचेगा, तब तक हर जगह महिलाएं और बेटियां असुरक्षित ही रहेगी।
-हर्षिता शर्मा, झालावाड़
..................

कब सुधरेंगे हालात
कानून की दुर्बलता, पुलिस कार्रवाई में शिथिलता, पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण, अशोभनीय फैशन का चलन, नशीले पदार्थों का बढ़ता सेवन, अश्लील सामग्री की आसान उपलब्धता, आसान टारगेट, नैतिकता का पतन व सामाजिक मूल्यों में गिरावट इत्यादि कारणों से महिलाएं अब भी हर जगह अपने आपको असुरक्षित महसूस करती हैं। सवाल यह है कि हालात कब सुधरेंगे?
-श्याम सुन्दर कुमावत, किशनगढ़, अजमेर
.........................

बदलाव घर से हो
महिलाएं हर जगह असुरक्षित हैं। इसमें सब से बड़ा कारण पुरुषों की मानसिकता है। पुरुष अभी तक उन्हें उपभोग की वस्तु समझते हैं। इसमें बदलाव घर से ही सम्भव है। कुछ प्रतिशत में महिलाओं का लालच इसके लिए उत्तरदायी है, जिसके कारण वे कुचक्र में फंस जाती हैं।
-सुभाष चंद्र पारीक, जयपुर
..........

पुरुषों की मानसिकता
लचर कानून- व्यवस्था, पितृसत्तात्मकता से भरे समाज का महिलाओं के प्रति रवैया और महिलाओं को आज भी भोग्य वस्तु समान प्रस्तुत करने वाले सिनेमा प्रमुख कारण हैं, जिसकी वजह से महिलाएं आज भी असुरक्षित हैं। यदि, कड़े कानून हों और पुरुषों को महिला सुरक्षा, सम्मान के लिए संवेदनशील बनाया जाए तो शायद हालात बदल जाएं।
-भानु पटवा, अजमेर
............

महिलाओं की सुरक्षा पर हो विशेष ध्यान
देशभर में आए दिन महिलाओं के साथ बलात्कार, छेडख़ानी, हिंसा की घटनाएं सुनने-पढऩे को मिलती है। कुछ मामलों को छोड़ दें ,तो हजारों पीडि़त महिलाएं अब भी इंसाफ के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही हैं, लेकिन उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला। सरकारों को चाहिए कि हर बस स्टॉप, चौराहों पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष पुरुष व महिला पुलिकर्मियों की तैनाती की जाए। साथ ही साथ आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार कर फास्ट ट्रेक कोर्ट में मामला चलाकर 6 महीने के भीतर कठोर से कठोर सजा दी जाए।
-वसीम अख्तर, मांगरोल, बारां

shailendra tiwari
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned