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प्रसंगवश : मिलावट रोकने के लिए वर्ष भर सक्रियता जरूरी

- मिलावट रोकने के लिए विभाग की वर्ष भर की सक्रियता से त्योहारी सीजन में भी मिलावट पर लगाम लग सकती है।

नई दिल्ली

Updated: October 29, 2021 08:47:51 am

मिलावटी खान-पान स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। स्वार्थ और लोभ के कारण कुछ लोग मिलावटी वस्तुएं बेचने के काले कारोबार में जुटे हुए हैं। उन पर लगाम लगाने वालों की नीयत पर भी सवाल उठ रहे हैं। तब ही तो केवल त्योहार के मौकों पर ही अपनी सक्रियता दिखा चुनिंदा जगहों पर नमूनों की कार्रवाई अंजाम दी जाती है। यह रस्म अदायगी जनता के स्वास्थ्य को कितना सुरक्षित रख पाती है, यह बड़ा सवाल है। जो थोड़ी बहुत कार्रवाई होती है, वह भयावह तस्वीर उकेरती है। दावा है कि त्योहार के समय सक्रियता से मिलावटियों पर लगाम लग सकेगी। पर वर्ष भर जो मिलावटी पदार्थ बिकते हैं, उसका क्या? तर्क होता है कि त्योहार पर मांग बढऩे से मिलावटी सामान बाजार में आ जाता है। आंकड़े तो कुछ और ही कहानी कहते हैं। कुल लिए गए नमूनों में से 18 प्रतिशत नमूने मिलावटी पाए जाते हैं। पन्द्रह प्रतिशत नमूनों में मिलावट जानलेवा होती है।

प्रसंगवश : मिलावट रोकने के लिए वर्ष भर सक्रियता जरूरी
प्रसंगवश : मिलावट रोकने के लिए वर्ष भर सक्रियता जरूरी

साफ है कि प्रदेश के लोगों के पेट में मिलावटी पदार्थ जा रहे हैं। इन पदार्थों के सेवन से स्वास्थ्य से संबंधित गंभीर समस्याएं भी हो जाती हैं। वर्ष भर पूरी सक्रियता से नमूने लेने और दोषियों पर समय रहते कड़ी कार्रवाई से ही मिलावट करने वालों में डर बैठ सकता है और उनके लालच को नियंत्रित किया जा सकता है। वर्ष भर की सक्रियता से त्योहारी सीजन में भी ये काली नीयत वाले मिलावट करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगे।

पूरे प्रदेश में करीब दस लाख कारोबारी हैं और उन पर कार्रवाई करने वाले महज पचास अधिकारी। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरकार मिलावट रोकने के प्रति कितनी गंभीर है? खान-पान की शुद्धता बनी रहे, यह जांचने वाले अमले के पास संसाधनों की कमी सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़ा करती है। गंभीरता की एक और बानगी यह भी है कि मिलावटखोरों के खिलाफ नया कानून तो बन गया, पर उसे लागू होने का ही इंतजार है। मिलावट रोकने के बड़े-बड़े नारों के साथ त्योहार के समय अभियान को हर वर्ष की कैलेंडर इवेंट बनाने से ज्यादा जरूरी असल में मिलावट को रोकना होना चाहिए। सरकार को इस दिशा में गंभीर होकर जांच करने वाले अमले के संसाधन बढ़ाने के साथ ही वर्ष भर प्रभावी कार्रवाई पर जोर देना होगा। तब ही प्रदेश की जनता की सेहत सुरक्षित रह पाएगी। (अ.सिं.)

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