नवाचार: मददगार साबित हो रहे हैं एआइ-प्रशिक्षित 'वर्चुअल मरीज'

- मरीजों के साथ चिकित्सकों के व्यवहार में सुधार की कवायद

By: विकास गुप्ता

Published: 20 Feb 2021, 07:27 AM IST

डैल्विन ब्राउन (इनोवेशंस रिपोर्टर)

स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) अर्थात कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने दस्तक दे दी है। एआइ के जरिए मरीजों, अस्पतालों और डॉक्टरों को बेहतर फैसले लेने में मदद मिली है। डॉक्टरों के खिलाफ मरीजों की आम शिकायत उनके व्यवहार को लेकर होती है। डॉक्टर डायग्नोसिस के लिए कठिन परिश्रम करते हैं, उनके काम के घंटे ज्यादा होते हैं, लेकिन मरीजों की अपेक्षा अधिक होती है।

अध्ययनों से पता चला है कि मरीज जब किसी क्लीनिक से निकलते हंै, तो उनकी चर्चा में ये ही मुद्दे होते हैं। सदियों पुरानी इस समस्या का समाधान ब्रिटेन के ऑर्थोपीडिक सर्जन एलेक्स यंग ने वर्ष 2018 में निकाला। यंग कहते हैं कि शिकायतें किसी भी क्षेत्र में हो सकती हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में शिकायतें दस गुना तक ज्यादा हो सकती हैं, क्योंकि डॉक्टर अक्सर बीमारी के बारे में ऐसे मरीजों को समझा रहे होते हैं जो चिकित्सा क्षेत्र के बारे में जरा भी नहीं जानते। तीन वर्ष बाद, जबकि कोविड महामारी ने स्वास्थ्य सुविधा क्षेत्र में उन्हें कुछ नया करने को प्रेरित किया, तो उनके स्टार्टअप वीर्टी ने पूरे यूरोप और अमरीका के अस्पतालों को 'वर्चुअल मरीज' भेजने शुरू किए कि किस तरह से लोगों से बेहतर व्यवहार किया जाए।

यंग कहते हैं कि हम वर्चुअल मरीजों के जरिए ऐसा डेटा-संचालित तरीका इजाद करना चाहते हैं जिससे डॉक्टर अच्छा व्यवहार करने और सम्प्रेषण कौशल का अभ्यास कर सकें। वर्चुअल मरीजों को ऐसे समझा जा सकता है जैसे कि एआइ-संचालित एनिमेशन जिसे चिकित्सकों के साथ संवाद करने के लिए प्रशिक्षित किया गया हो और जो उनके सहानुभूतिपूर्ण व पारस्परिक संवाद के कौशल का परीक्षण कर सके। यह सॉफ्टवेयर स्मार्टफोन या कम्प्यूटर पर वर्चुअल मरीजों को 'लाइव' भेजता है। एक बार प्रशिक्षण सत्र पूरा होने पर डॉक्टरों को उनकी गति के आधार पर चिह्नित किया जाता है। आधार यह होता है कि एआइ से उन्होंने जो सवाल पूछे और मरीजों ने जो जवाब दिए, उसके आधार पर उन्होंने आभासी मरीज का कितना सही डायग्नोसिस किया। मकसद यही है कि तकनीक के जरिए वास्तविक दुनिया में मरीजों के साथ चिकित्सकों के व्यवहार में सुधार लाया जाए। यूनाइटेड किंगडम के एनएचएस ने भी स्टाफ को पढ़ाने के लिए इस तकनीक का उपयोग किया है कि किस तरह से पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) का इस्तेमाल किया जाए और मरीजों और उनके परिजनों के साथ कैसा व्यवहार किया जाए।

विकास गुप्ता
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