scriptAll about new draft of RMP Professional Conduct Regulations 2022 | आखिर क्या है चिकित्सकों के लिए आचार संहिता 'फिजिशियन्स प्लेज' का नया मसौदा | Patrika News

आखिर क्या है चिकित्सकों के लिए आचार संहिता 'फिजिशियन्स प्लेज' का नया मसौदा

न हिप्पोक्रेटिक ओथ, न चरक शपथ: 23 मई को राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने जारी किया था ड्राफ्ट रेगुलेशन

Published: June 09, 2022 11:05:58 pm

विश्व चिकित्सा संघ (डब्ल्यूएमए) के जेनेवा घोषणा पत्र का एक हिस्सा है - 'फिजिशियन्स प्लेज'। इसे सितम्बर 1948 में डब्ल्यूएमए, जेनेवा की दूसरी महासभा द्वारा अपनाया गया। कुछ माह पहले जब मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सकों को पारम्परिक तौर पर दिलाई जाने वाली शपथ 'हिप्पोक्रेटिक ओथ' के स्थान पर 'चरक शपथ' दिलाने का सुझाव दिया गया, तो यह विवाद की वजह बन गया। इसके बाद राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने चिकित्सकों के व्यावसायिक आचरण के लिए विनियम प्रारूप जारी किया है। खास बात यह है कि इसमें न तो हिप्पोक्रेटिक ओथ शामिल है न ही चरक शपथ, बल्कि 'एनएमसी, पंजीकृत चिकित्सक (व्यावसायिक आचरण) विनियम 2022' नाम से दर्ज एनएमसी के इस प्रारूप में 'द फिजिशियन्स प्लेज' को शामिल किया गया है।
क्या है 'फिजिशियन्स प्लेज'
क्या है 'फिजिशियन्स प्लेज'
क्या है 'फिजिशियन्स प्लेज'
यह डब्ल्यूएमए के जेनेवा घोषणा पत्र में 1948 में प्रस्तुत किया गया। समय के साथ इसमें कई संशोधन हुए। अंतिम संशोधन अक्टूबर 2017 में शिकागो में हुई 68वीं डब्ल्यूूएमए महासभा में हुआ। 23 मई को जारी किए गए एनएमसी के नियम प्रपत्र में इस फिजिशियन्स प्लेज को डब्ल्यूूएमए के 2017 घोषणा पत्र से लिया गया बताया है। आचार संहिता के बारे में प्रारूप में कहा गया है कि यह आचार संहिता पंजीकृत चिकित्सकों के लिए मरीज, समाज, पेशेवर सहयोगियों और स्वयं के प्रति प्रतिबद्धताओं के समुच्चय के रूप में काम करेगी। यह भी कहा गया, 'एनएमसी आचार संहिता को स्व-नियमन संबंधी दिशानिर्देशों के समुच्चय के तौर पर तैयार किया गया है जो व्यावसायिक एवं सामाजिक अपेक्षाओं को प्रतिबिंबित करने का काम करता है।'
कैसे अलग हैं नई सिफारिशें
नए प्रारूप में मरीज की स्वायत्तता और गरिमा के सम्मान को शामिल करते हुए मरीज को उच्चतम मानदंडों वाली सेवा अदायगी सुनिश्चित करने के लिए स्वयं अपने स्वास्थ्य व कुशलता का खयाल रखने की प्रतिज्ञा शामिल की गई है। पुराने घोषणा-पत्र में जबकि कहा गया था - 'मैं मानव जीवन का अत्यंत सम्मान करूंगा/करूंगी, तब से जब से वह गर्भ में आए', पर नए घोषणा-पत्र में कहा गया है-'मानव जीवन के लिए सर्वोच्च सम्मान बनाए रखूंगा/रखूंगी।'
चरक शपथ पर हुआ था विवाद
2020 में भारतीय चिकित्सा परिषद का स्थान लेने वाली चिकित्सा शिक्षा व प्रैक्टिस नियामक संस्था एनएमसी ने मेडिकल कॉलेजों को सुझाव दिया कि चिकित्सकों को 'हिप्पोक्रेटिक ओथ' के स्थान पर 'चरक शपथ' दिलाई जाए। कुछ चिकित्सकों ने इस सुझाव का स्वागत किया पर भारतीय चिकित्सा संघ (आइएमए) ने इस पर स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया का ध्यानाकर्षित किया। आइएमए की आधिकारिक पत्रिका आइएमए न्यूज में प्रकाशित एक पत्र में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सहजानंद प्रसाद सिंह ने कहा, स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वासन दिया है कि चरक शपथ वैकल्पिक होगी और इसे 'हिप्पोक्रेटिक ओथ' की जगह लाने का दबाव नहीं बनाया जाएगा। राज्य सभा में स्वास्थ्य राज्यमंत्री ने भी कहा कि ऐसे बदलाव का कोई प्रस्ताव नहीं है।
महर्षि चरक और चरक संहिता
महर्षि चरक प्राचीन चिकित्सा के महान सम्मानीय चिकित्सक थे, जिन्होंने चिकित्सा व्यवसाय के नियमों व आदर्श सिद्धांतों का पालन किया। उनका कार्य किसी एक चिकित्सक का नहीं लगता और न ही यह सब एक ही समय पर लिखा गया। चरक संहिता एक औषधि संस्कार ग्रंथ है। इस चिकित्सकीय ग्रंथ में पहली व दूसरी सदी के समय के चिकित्सा व्यवसाय पर टिप्पणियां और विचार-विमर्श समाहित हैं। शल्य चिकित्सा के लिए जिस प्रकार सुश्रुत संहिता का उल्लेख किया जाता है, प्राचीन भारतीय औषधि के लिए चरक संहिता का जिक्र होता है। इसमें ऐसी चिकित्सा पद्धतियों का उल्लेख है, जो कई मायनों में यूनानियों की चिकित्सा पद्धतियों से आगे है।
शरीर क्रिया विज्ञान में प्राचीन भारतीय अभिरुचि का संबंध योग और अध्यात्मवाद से समझा जाता है। यह विधा बौद्धवाद, ईसाई मिशनरियों के आने एवं यूनानी चिकित्सा पद्धतियों के प्रचार-प्रसार के बाद फली-फूली। चरक संहिता के आदर्श विचार सार्वभौमिक हैं और आज भी प्रासंगिक और प्रभावी हैं।
'हिप्पोक्रेटिक ओथ' का इतिहास
हिप्पोक्रेटिक ओथ का संबंध यूनानी चिकित्सक हिप्पोक्रेट्स से है। यह चिकित्सकों द्वारा अपने व्यवसाय के दौरान अपनाए जाने वाले सिद्धांतों का प्रपत्र है। इसका प्राचीनतम संस्करण तीसरी सदी का माना जाता है और सहस्त्राब्दि पुराना संस्करण 'होली सी' के पुस्तकालय में संग्रहित बताया जाता है। हिप्पोक्रेट्स चिकित्सा पर 70 किताबों का संकलन है, जिसे कॉरपस हिप्पोक्रेटिकम कहा जाता है। हिप्पोक्रेटिक ओथ भी किसी एक व्यक्ति का कार्य नहीं माना जाता है।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

बड़ी खबरें

Amravati Murder Case: उमेश कोल्हे की हत्या का मास्टरमाइंड नागपुर से गिरफ्तार, अब तक 7 आरोपी दबोचे गए, NIA ने भी दर्ज किया केसमोहम्‍मद जुबैर की जमानत याचिका हुई खारिज,दिल्ली की अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजाSharad Pawar Controversial Post: अभिनेत्री केतकी चितले ने लगाए गंभीर आरोप, कहा- हिरासत के दौरान मेरे सीने पर मारा गया, छेड़खानी की गईIndian of the World: देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस को यूके पार्लियामेंट में मिला यह पुरस्कार, पीएम मोदी को सराहाGujarat Covid: गुजरात में 24 घंटे में मिले कोरोना के 580 नए मरीजयूपी के स्कूलों में हर 3 महीने में होगी परीक्षा, देखे क्या है तैयारीराज्यसभा में 31 फीसदी सांसद दागी, 87 फीसदी करोड़पतिकांग्रेस पार्टी ने जेपी नड्डा को BJP नेता द्वारा राहुल गांधी से जुड़ी वीडियो शेयर करने पर लिखी चिट्ठी, कहा - 'मांगे माफी, वरना करेंगे कानूनी कार्रवाई'
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.