ट्रैवलॉग अपनी दुनिया : धार्मिक अनुष्ठान थे प्राचीन ओलंपिक खेल

ओलंपिया और वहां होने वाला खेल मेला आपका परिचय ग्रीस के उस प्राचीन धर्म से करवाता है, जो हिन्दू देवी-देवताओं की याद भी दिलाता है। यह जानकर आप हैरान रह जाएंगे कि प्राचीन ओलंपिक खेल वहां के लोगों के लिए एक धार्मिक अनुष्ठान थे।

By: विकास गुप्ता

Published: 22 Jul 2021, 01:11 PM IST

तृप्ति पांडेय, (कला, संस्कृति और पर्यटन विशेषज्ञ)

ओलंपिक खेल लगातार समाचार पत्रों की सुर्खियां बने हुए हैं। ये खेल पिछले साल होने वाले थे, लेकिन कोविड के चलते नहीं हो पाए। कोविड की लहरें तो अब भी आ-जा रही हैं, पर अब ओलंपिक की नैया को उसके नाविकों ने पार उतारने की ठान ली है। पिछले कुछ दिनों से मुझे अपनी एक यात्रा याद आने लगी और एक दिन अचानक मैं मन ही मन मुस्करा पड़ी। भव्य खेल स्टेडियम बैठ कर भले ही मैंने आधुनिक ओलंपिक नहीं देखे हों, लेकिन पहली विदेश यात्रा के दौरान ही मुझे वह ऐतिहासिक स्थान देखने का मौका मिला, जहां न केवल सबसे पहला ओलंपिक हुआ था, बल्कि सदियों तक ऐसे आयोजन हुए थे, यानी कि 'ओलंपिया'।

स्पष्ट है कि तब ये खेल आज की तरह अलग-अलग देशों में नहीं होते थे। ओलंपिया और वहां होने वाला खेल मेला आपका परिचय ग्रीस के उस प्राचीन धर्म से करवाता है, जो हिन्दू देवी-देवताओं की याद भी दिलाता है। यह जानकर आप हैरान रह जाएंगे कि प्राचीन ओलंपिक खेल वहां के लोगों के लिए एक धार्मिक अनुष्ठान थे। प्रकृति के पुजारी प्राचीन ग्रीस निवासी हिन्दू आस्था के समान अनेक देवी -देवताओं को मानते थे, जिनके मुखिया थे जीअस। इनको बिजली और मौसम के देवता के रूप में पूजा जाता था। इनके बारे में सुन कर मुझे अपने इंद्र देवता और रोमन देवता जुपिटर याद आ गए थे। जीअस का एक मंदिर भी हुआ करता था। उनकी सोने और हाथी दांत से बनी लगभग 41 फुट ऊंची कुर्सी पर बैठी प्रतिमा प्राचीन काल के आश्चर्यों में से एक थी। कुछ सिक्कों और लिखित जानकारी से ही आप उसका अनुमान लगा सकते हैं, क्योंकि जिस समय इन खेलों पर पाबंदी लगाई गई थी, इसे भी नष्ट कर दिया गया था। माना जाता है कि इन खेलों की शुरुआत ईसा पूर्व 776 में हुई थी और पाबंदी 393 ईसवी में लगा दी गई थी। उस समय के इतिहास की कहानी वहां के खंडहरों के बीच साथ में मौजूद गाइड हमें सुना रहे थे।

एक दिलचस्प किस्सा बदनाम रोमन सम्राट नीरो से जुड़ा था। ईसा पूर्व दूसरी सदी में प्राचीन ग्रीस को रोमन साम्राज्य ने अपने शासन में ले लिया और धीरे-धीरे खेलों का स्तर भी घटता गया। हद तो तब हो गई जब नियमों को ताक में रखकर रोम के सम्राट नीरो ने वहां रथ दौड़ में चार की बजाय दस घोड़ों वाले रथ को दौड़ाया। इससे भी बड़ी बात यह कि भारी भरकम शरीर वाले नीरो ने बीच दौड़ में गिरने के बाद भी अपने आप को यह कह कर विजेता घोषित करवा लिया कि यदि दुर्घटना नहीं घटी होती, तो वही विजेता होता। और भी बहुत सी दिलचस्प किस्से सुने। इस तरह के किस्से-कहानियों को सुनते-सुनते मैंने एक तरह से उस जमाने के खेलों को महसूस कर लिया था, जिसके लिए उन खंडहरों के बीच खड़ा होना जरूरी है।

विकास गुप्ता
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