क्या सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों की उपेक्षा हो रही है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था कि क्या सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों की उपेक्षा हो रही है। पाठकों के जोरदार जवाब आए। पेश हैं कुछ चुनिंदा जवाब।

By: shailendra tiwari

Updated: 08 Sep 2020, 05:35 PM IST

अस्पताल के नाम से भय का माहौल
सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों की भारी उपेक्षा हो रही है और प्राइवेट अस्पतालों की फीस आसमान छू रही है। इसके कारण लोगों में अस्पताल के नाम से भय का माहौल बन गया है और लोग कोरोना के लक्षणों को भी छुपा रहे हैं। सरकार, डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधकों को इस महामारी काल में मेडिकल कोड ऑफ एथिक्स का अनुसरण करना चाहिए और मानवता का परिचय देना होगा!!
-भीम जायसवाल, रायपुर, छत्तीसगढ़
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भयावह हालात
सरकार व चिकित्सा विभाग का रवैया बहुत निराशाजनक है। सरकारें व चिकित्सा विभाग के जवाबदेह अधिकारी एक रटी-रटाई बात बोल कर अपनी जिम्मेदारी पूरी समझते हैं कि भर्ती हुए मरीजों को पूरी सुविधाएं दे रहे हैं और इसके लिए हमारे कलेक्टर से लेकर मेडिकल सुपरिटेंडेंट, नोडल आफिसर, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ सारे लोग जी जान से लगे रहते हैं। कोशिश करते हैं कि सबसे अच्छी सुविधाएं हम दे सकें जिससे वे ठीक हो कर जा सकें। मुश्किल यह है कि जमीनी हकीकत इन दावों से इतर और भयावह है।
-अभय गौतम, कोटा
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सुविधाओं का अभाव
सरकारी अस्पतालों में मरीजों की उपेक्षा की वजह वर्क कल्चर का अभाव है। सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का भी अभाव है, जिससे भी मरीजों की देखभाल नहीं हो पा रही है। असल में सरकारी अस्पतालों का सिस्टम ही बिगड़ गया है, जिसका खमियाजा कोरोना पीडि़त मरीज भुगत रहे हैं। वर्तमान में सिस्टम में सुधार की जरूरत है।
-सालूराम सियोल चौधरी, गुड़ामालानी, बाड़मेर
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बेबस हैं मरीज
सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था बिगड़ी हुई है। एक तरफ जहां कोविड 19 महामारी के शिकार हुए मरीज का उपचार सुचारू रूप से नहीं हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ सामान्य मरीजो के साथ-साथ दूसरे गम्भीर रोगों से ग्रस्त मरीज़ो का उपचार भी सही ढंग से नहीं हो रहा है। इससे बेबस और लाचार मरीज निजी अस्पतालों में जाने और कर्जदार बनने को मजबूर हैं।
-गोपाल अरोड़ा, जोधपुर
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सजग हैं चिकित्साकर्मी
वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते समूचा विश्व संक्रमण के दौर से गुजर रहा है। सजग प्रहरी बन कर डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्नीशियन आदि ने कोरोना से लड़ाइ में महती भूमिका का निर्वहन किया है। कोरोना वायरस ने समूचे विश्व में दहशत फैला रखी है। एक वर्ग निजी अस्पतालों की बजाय सरकारी अस्पतालों में इलाज कराना सही मान रहा है। कुछ शिकायतें आ रही हैं कि मरीज के प्रति संवेदना नहीं दिखाई जा रही हैै। कोई भी प्राकृतिक आपदा लंबे समय रहती है तो हालात बिगड़ जाते हैं। इसी कारण कहीं-कहीं उपेक्षा नजर आ रही है।
-विद्याशंकर पाठक सरोदा, डूंगरपर
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व्यवस्था में सुधार की जरूरत
निश्चित रूप से सरकारी अस्पतालों में मरीजों की उपेक्षा होती है। इतना होने के बावजूद आज भी सरकारी अस्पताल सस्ते इलाज की वजह से गरीबों के मसीहा ही बने हुए हैं। बीमा पॉलिसी की मोटी रकम पाने की लालसा ने प्राइवेट अस्पतालों ने गरीबों को तो दूर ही कर दिया है या फिर गरीब खुद ही दूर हो गए हैं। मानव हित में अस्पतालों की कुव्यवस्था को सुधारना जरूरी है।
महेश नेनावा, इंदौर, मध्यप्रदेश
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हर कोरोना मरीज का सही इलाज हो
सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों की उपेक्षा देखने को मिलती है। आम कोरोना मरीज को संपूर्ण कोरोना किट की सुविधा नहीं दी जाती है। इससे मरीजों को जान का खतरा रहता है। यह सब कोरोना मरीज के इलाज के प्रति सरकार की ठोस गाइडलाइन की कमी के कारण होता है। सरकारों को एक ठोस नीति बनानी होगी, जिससे सरकारी अस्पतालों में हर कोरोना मरीज का इलाज गंभीरता से हो।
-महेंद्र खोजा, जोधपुर
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मरीज बढऩे से भी बिगड़ी व्यवस्था
सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए सरकार की ओर से अनेक सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं, परंतु बढ़ते मरीजों के कारण सुविधाएं कम पड़ रही हैं और स्टाफ की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। फिर अब चिकित्सा को सेवा का माध्यम मानने वाले कम ही लोग हैं। इससे कोरोना मरीजों कि उपेक्षा होना स्वाभाविक है। कभी-कभी रोगी और उसके परिवार की स्टाफ के प्रति नकारात्मक सोच भी उपेक्षा का कारण बन जाती है।
-रामेश्वर लाल, आमेटा कारोलिया, राजसमन्द
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जान से खिलवाड़ न हो
कोरोना से संक्रमित गरीब लोगों के लिए सरकारी अस्पताल ही अंतिम सहारा है। वहां मरीजों की उपेक्षा उनके जीवन के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ है। आए दिन समाचार पत्र इस तरह के उदाहरण से भरे मिलते हंै। इस संकट के समय चिकित्साकर्मियों का मरीजों के प्रति संवेदनशील होना आवश्यक है।
-मुकेश नखतदान, बालेवा
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जरूरी है सेवा भाव
सरकारी अस्पतालों में कोरोना के गंभीर मरीजों की देखभाल की व्यवस्था कम है। कारण भी साफ है कि दूसरे मरीजों से भी अस्पताल भरे हुए पड़े हैं। प्राइवेट अस्पतालों में अच्छी सुविधाएं है। सभी अच्छी सेवा करें तो कोरोना से जल्दी मुक्ति मिलेगी। इसके लिए सभी मेें सेवा का भाव जरूरी है। सुरक्षित रहें और दूसरों को भी सुरक्षित रखो।
-हरि सिंह राजपुरोहित, बेंगलूर

जवाबदेही तय हो
वैश्विक महामारी कोरोना की घातकता, भयावहता व असाध्यता को देखते हुए सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों की उपेक्षा आम बात हो चुकी है। कोरोना काल में चिकित्सकों व चिकित्साकर्मियों की लापरवाही तथा संवेदनहीनता से अनेक मरीजों ने जान भी गंवाई है। लचर चिकित्सा व्यवस्था एवं प्रबंधन के कारण हालात बिगड़ रहे हैं। जवाबदेही तय होनी चाहिए !
-कैलाश सामोता, कुंभलगढ, राजसमंद
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समझनी होगी जिम्मेदारी
सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या एवं उनकी उचित देखभाल का अभाव वास्तव में चिंता का विषय है। इसके लिए सरकार को आवश्यक कदम उठाने चाहिए और साथ ही साथ मेडिकल स्टाफ और डॉक्टरों को भी अपनी जिम्मेदारी अच्छी तरीके से निभानी चाहिए। निजी अस्पतालों की बहुत ज्यादा फीस मध्यमवर्गीय परिवारों को सरकारी अस्पतालों में भर्ती करवाने के लिए मजबूर करती है। अत: उनका ध्यान रखना भी बहुत आवश्यक है ।
-हरकेश जारवाल, दौसा
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स्वास्थ्यकर्मी भी खतरे में
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों की देखभाल के लिए नर्सिंगकर्मी लगातार काम कर रहे हैंं। वेे अपने परिवारजनों से कई-कई दिनों तक मिल नहीं पाते हैं। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि ज्यादातर नर्सेज के पास गुणवत्तायुक्त मास्क, ग्लव्स और सैनिटाइजर तक उपलब्ध नहीं हैं। इससे स्वास्थ्यकर्मियों को बहुत ज्यादा खतरा है । कोरोनाकाल में सरकारी अस्पताल में ओपीडी के अलावा सिजेरियन आपरेशन की सेवाएं भी दी जा रही हं। साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने मोबाइल टेली मेडिसिन टीम बनाई है, जो लोगों को घर बैठे परामर्श और दवा संबंधित सेवाएं निशुल्क दे रही है।
-अशोक कुमार शर्मा, झोटवाड़ा जयपुर
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सरकारी अस्पतालों ने बेहतर काम किया
महामारी के इस कठिन समय में अस्पतालों ने अपना कर्तव्य अच्छे से निभाया है।् अपनी सुविधाओं और व्यवहार से सरकारी अस्पतालों ने सबका दिल जीता है। जहां एक तरफ निजी अस्पतालों ने मनमानी की और मरीजों से कई गुना शुल्क वसूला तो वहीं दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों ने नि:शुल्क सुविधाएं प्रदान की है। सरकारी कोविड सेंटरों में रहने, खाने और सोने की उत्तम व्यवस्थाएं की गई हैं। डॉक्टर और चिकित्साकर्मी अच्छा काम कर रहे हैं।
सुदर्शन सोलंकी, मनावर, मप्र
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उपेक्षा नहीं, हुआ इलाज
सरकारी अस्पतालों के सभी डॉक्टर, नर्स अन्य स्टाफ इस महामारी से निपटने के लिए भरसक प्रयास कर रहे हैं। आज इतने दिन हो चुके हैं इस महामारी को फैले हुए, लेकिन किसी भी सरकारी अस्पताल के कर्मचारी ने इस रोग से पीडि़त मरीजों के उपचार में कोई कसर बाकी नहीं रखी है। इसके अलावा जो निजी अस्पताल हैं, वहां तो इसको लेकर गोरखधंधा चल रहा है। मनमानी फीस वसूली जा रही है और बिना कोरोना के भी कोरोना पॉजिटिव बताकर पैसा ऐंठा जा रहा है, जबकि सरकारी अस्पतालों में इसका इलाज मुफ्त हो रहा है। कोरोना के मरीजों का अच्छे से इलाज किया जा रहा है। कई डॉक्टर भी इलाज करते- करते कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। फिर भी सरकारी अस्पताल में कार्यरत कर्मचारी अपने कर्तव्यों का निर्वाह अच्छी तरह से कर रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में कोरोना के मरीजों की उपेक्षा नहीं होती बल्कि उनका अच्छे से इलाज किया जा रहा है।
-इंदिरा जैन, शाहपुरा,भीलवाड़ा
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बदहाल व्यवस्था
सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के साथ कई बार दुव्र्यवहार किया जाता है। डॉक्टर, नर्सेज, वार्ड बॉय भी उनकी समय पर मदद करने से बचते हैं। केवल औपचारिकता निभाई जाती है। सरकारी अस्पतालों कि व्यवस्था बदहाल है।
-विरेन्द्र सिंह, मुआना,नागौर
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बेहतर इलाज
सरकारी अस्पताल पूर्ण समर्पण भाव से कोरोना मरीजों की सेवा दे रहे हैं। जब से यह महामारी आई है तबसे इस बीमारी से ग्रसित मरीजों की सेवा पूरी निष्ठा से की जा रही है। तभी मरीज इतनी संख्या में लोग ठीक हुए हैं। सरकारी अस्पतालों का सारा स्टाफ तन-मन से सेवा में जुटे है। इन पर संदेह करना बेमानी है।
-अरुण भट्ट, रावतभाट
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महज औपचिारिकता का निर्वाह
सरकारी अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों का गंभीरता से इलाज नहीं किया जाता। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर एवं स्टाफ केवल औपचारिकता पूरी करते हैं। वे अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर वापस लौट जाते हैं। पूरा सरकारी प्रबंधन तंत्र लापरवाही मेंं लिप्त रहता है। उनको मरीज की जान की कोई परवाह नहीं रहती।
-सतीश उपाध्याय, मनेंद्रगढ़ कोरिया, छत्तीसगढ़

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