आत्म-दर्शन: क्या है साधना

छल-कपट मत करो, छल-कपट करना आत्मा का स्वभाव नहीं है, अपितु छल-कपट को भूल जाना ही आत्मा का स्वभाव है।

By: विकास गुप्ता

Published: 12 Apr 2021, 08:03 AM IST

आचार्य विद्यासागर

जीवन का विकास आत्म-साधना के माध्यम से ही हो सकता है और वह साधना क्या है? सीधापन ही जीवन की साधना है। हमारे पास जो वक्रता है, टेढ़ापन है, उसका विमोचन ही जीवन की साधना है। तुम भी इस सीधेपन की साधना करो। छल-कपट मत करो, छल-कपट करना आत्मा का स्वभाव नहीं है, अपितु छल-कपट को भूल जाना ही आत्मा का स्वभाव है। छल-कपट से बचना बहुत बड़ा पुरुषार्थ है, बहुत बड़ी साधना है।

इस बात का ध्यान रखें कि हमारा जीवन तब नीचे गिर जाता है,जब हमारी दृष्टि नीचे गिर जाती है। पहले हमारी दृष्टि गिरती है। फिर बाद में हम गिरते हैं। कदमों का गिरना कोई गिरना नहीं है, जो अपने चरित्र से गिर गया वस्तुत: वह पतित हो गया। इसलिए अपने चारित्र की उज्ज्वलता के लिए अपनी दृष्टि को सीधा रखें यानी पवित्र रखें।

(आचार्य विद्यासागर एक प्रख्यात दिगम्बर जैन आचार्य हैं। उन्हें उनकी विद्वत्ता और तप के लिए जाना जाता है। आचार्य श्री हिन्दी, अंग्रेजी आदि 8 भाषाओं के ज्ञाता हैं ।)

विकास गुप्ता
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