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कला-मन को नया रचने को प्रेरित भी करती है बरखा

Published: Jul 30, 2023 10:31:53 pm

Submitted by:

Nitin Kumar

आर्ट एंड कल्चरः यह सच है, चित्रकला, संगीत, नृत्य, नाट्य के मेल से महती सिरजा जा सकता है पर यह स्वत: हो तभी ठीक है

कला-मन को नया रचने को प्रेरित भी करती है बरखा
कला-मन को नया रचने को प्रेरित भी करती है बरखा
डॉ. राजेश कुमार व्यास
संस्कृतिकर्मी, कवि और कला समीक्षक
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सावन में घिर-घिर घटाएं बरसती हैं। बादलों से ढके आसमान का दृश्य और बरखा कला-मन को नया रचने को प्रेरित भी करती है। मेघ माने जीमूत। वह जो जीवन-जल को अपने में बद्ध रखता है। माने बांधे रखता है। सूर्य, मेघ, पशु-पक्षी, मंद बहती हवाएं और आम जन जब एक स्वर में गुनगुनाने लगें, समझ लीजिए तभी धरती-धन अन्न उपजता है। ब्राह्मण ग्रंथों में इसीलिए कृषि ‘सर्वदेवतामयी’ है। कालिदास ने मेघ को ‘कामरूप’ कहा है। इच्छानुसार रूप धरने वाला। उसका सौंदर्य अवर्णनीय है। इसीलिए मेघ की एक उपमा भगवान शिव का कंठ भी है।
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