विश्व व समाज की बेहतरीन व्याख्या

‘मैं ही समाज’ पर प्रतिक्रियाएं

By: shailendra tiwari

Updated: 08 Sep 2020, 05:23 PM IST

सृष्टि की तरह स्वयं के लिए नहीं जीने का संदेश देते पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक गुलाब कोठारी के अग्रलेख ‘मैं ही समाज’ को प्रबुद्ध पाठकों ने प्रेरक संदेश बताया है और कहा है कि इसमें विश्व व समाज की जो व्याख्या की गई है, सरल शब्दों में इससे सुंदर व्याख्या नहीं हो सकती। उन्होंने यह विश्वास भी जताया है कि पत्रिका के जिन दो सामाजिक कर्तृत्व ‘सम्वाद उपनिषद और पत्रिका गेट’ का लोकार्पण प्रधानमंत्री के हाथों हुआ है, वे राष्ट्रीय धरोहर के रूप में प्रतिष्ठित होकर नई क्रांति फैलाने वाले साबित होंगे। पाठकों की प्रतिक्रियाएं विस्तार से-

जीवन का सार बताने वाली गहरी बात
कोठारी ने अपने अग्रलेख में इतनी गहरी बात लिखी है जो जीवन का सार प्रस्तुत करती है। वैज्ञानिक दृष्टि से, आध्यात्मिक दृष्टि से व व्यावहारिक दृष्टि से, यह आलेख हमारा मार्गदर्शन करता है।
डॉ. प्रकाश डोंगरे, सेवानिवृत्त प्राध्यापक, नरसिंहपुर
खुद के साथ समाज के लिए भी जिएं
पत्रिका के सम्वाद उपनिषद और पत्रिका गेट सामाजिक बोध से जुड़ी धरोहरें हैं, जो निश्चित तौर पर नई क्रांति को फैलाने वाली होंगी। कोठारी ने सामाजिक स्तर पर खुद की भूमिका, खुद का महत्व समझा और देशवासियों को भी इस बात का बोध कराया कि हमें खुद के साथ समाज के लिए भी जीना चाहिए, आगे आना चाहिए।
राकेश राणा, संस्थापक, जिला पत्र लेखक परिषद,, खरगोन
सांस्कृतिक विरासत बनेंगी ये धरोहरें
समाज से जो लिया है, उसे किसी न किसी रूप में वापस लौटाने का जिम्मा पत्रिका समूह कई वर्षों से निभा रहा है। मरूभूमि में अमृतम् जलम् हो या फिर नए जमाने में वैज्ञानिक दृष्टिकोण लिए उपनिषद हों, जयपुर का नवां दरवाजा। सांस्कृतिक विरासत व वास्तुकला की ये नजीर न सिर्फ राजस्थान के इतिहास के स्वर्णिम पन्नों पर दर्ज होगी, बल्कि लाखों-करोड़ों पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन उन्हें सांस्कृतिक विरासत का परिचय भी कराएगी।
गोविंद शर्मा, साहित्यकार, खंडवा
जड़ पदार्थों से जीवन का सबक
जीवन में सेवा का जो महत्व है, उसे जड़ पदार्थों से भी सीखा जा सकता है। आज के अग्रलेख में इस विषय को बहुत अच्छी तरह से प्रस्तुत किया गया है। अग्रलेख बहुत ही प्रशंसनीय है।
डॉ रश्मि बाजपाई, प्राचार्य, डाइट, मंडला
सामाजिक प्रतिबद्धता का परिचय
सामाजिक सरोकार से जुड़ा मीडिया भले ही आज व्यवसाय के रूप में फल फूल रहा है, लेकिन पत्रिका अखबार हमेशा सामाजिक कर्तव्यबोध के रूप में समाज को समयसमय पर नई दिशा दिखाता रहा है। पत्रिका गेट और दो ग्रंथ इसी सामाजिक प्रतिबद्धता का परिचय हैं।
चंद्रकांत पटेल, अधिवक्ता, अनूपपुर
खुद तपकर पारस बनाने की सोच पर जोर
पत्रिका समूह को पत्रिका गेट के शुभारंभ पर बधाई। कोठारी ने गीता के श्लोकों के माध्यम से परोपकार की मानव जीवन में महत्ता को व्यक्त किया है। काल चाहे जो भी हो हर अवधि में खुद तपकर दूसरों को पारस बनाने की सोच ही सृष्टि को आगे बढ़ाती है।
आरपी श्रीवास्तव, जिलाध्यक्ष पेंशनर्स एसोसिएशन, रतलाम
विश्व व समाज एक दूसरे से जुड़े हुए
कोठारी ने सही लिखा है कि जड़ एक है, ईश्वर रूप, विश्व एक वृक्ष है और हम सब इस वृक्ष के पत्ते हैं। कोई पत्ता जड़ से अलग नहीं हो सकता। यदि अलग होगा तो सूख जाएगा। हर पत्ता एक दूसरे के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ है। वर्तमान विश्व और समाज की इतने सरल शब्दों में व्याख्या नहीं हो सकती है।
सुरेन्द्र तिवारी, भोपाल सिटीजंस फोरम, भोपाल
सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन
आज का अग्रलेख समाज में आदमी की भूमिका को प्रदर्शित करता है। पत्रिका हमेशा से ही समाज के लिए कुछ कर गुजरने की क्षमता रखता है। यही व्यक्ति को समाज से जोडऩे का काम करता है। सामाजिक जिम्मेदारियों को यह समूह बखूबी निभाता है। बेबाकी से बात रखने का जज्बा सिर्फ पत्रिका में है।
नकुल जैन, अभिभाषक, श्योपुर
समाज को सही दिशा मिलेगी
पत्रिका ने हमेशा मूल्यों व सरोकारों को स्थान दिया है। सरोकारी श्रृंखला में पत्रिका गेट और सम्वाद उपनिषद ग्रंथ प्रेरणा देने वाले साबित होंगे। लेखक का चिंतन इन ग्रंथों में भी दिखेगा और समाज को सही दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगा।
अशोक अर्गल, महापौर, मुरैना
दूसरों की सेवा करने वाला सम्मान का भागीदार
यह बात बिल्कुल सत्य है कि जब सेवा का भाव जागता है तो अंहकार अपने आप मिट जाता है। जब व्यक्ति रक्षा व चिंता के साथ ही दूसरों की भी परवाह करता है तो वह सम्मान का भागीदार होता है। इस बात में भी दो राय नहीं है कि व्यक्ति एक स्थान पर रहकर कहीं भी किसी की भी सहायता कर सकता है।
भरत श्रीवास्तव, अध्यक्ष कायस्थ समाज, डबरा
एक जगह संजोई राजस्थानी संस्कृति
पत्रिका समूह ने पत्रिका गेट के माध्यम से राजस्थान की संस्कृति को एक जगह संजोया है। पत्रिका गेट न केवल पर्यटकों बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति का अहसास चिरकाल तक कराता रहेगा। समाज से जो मिला, उसे समाज को लौटाने की दिशा में पत्रिका समूह का प्रयास सराहनीय है। सम्वाद उपनिषद व शब्द यात्रा जैसी अदभुत कृति समाज के लिए धरोहर हैं।
दुर्गा प्रसाद आर्य, अध्यक्ष, गांधी आश्रम, छतरपुर

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