सवाल, क्या सभी क्षेत्रों में हिंदी की स्थिति मजबूत हुई है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था कि क्या सभी क्षेत्रों में हिंदी की स्थिति मजबूत हुई है? पेश हैं चुनिंदा पाठकों की प्रतिक्रियाएं

By: shailendra tiwari

Updated: 13 Sep 2020, 05:44 PM IST

हिंदी की मजबूत स्थिति
भाषाएं अपनी बात लोगों तक प्रेषित करने तथा लोगों की बातों को समझने का सुगम माध्यम हंै। वैश्विक स्तर के साथ ही भारत में भी भाषाओं का विशेष महत्व है। भारत मे सैकड़ों भाषाएं तथा हजारों बोलियां प्रचलित हैं। किन्तु वैधानिक रूप से कुछ ही भाषाएं स्वीकार की गई हैं। इनमे हिंदी भाषा का स्थान सर्वश्रेष्ठ है। हिंदी भाषा के प्रादुर्भाव से विकास तक की कड़ी में इसके प्रचार, प्रकृति तथा लोकप्रियता में काफी परिवर्तन हुए हैं। हिंदी केवल भाषा ही नहीं, एक जीवनशैली भी है। वर्तमान में सभी क्षेत्रों में हिंदी की मजबूत पकड़ दिखलाई पड़ती है। सामाजिक, राजनीतिक तथा व्यावहारिक जीवन मे भी हिंदी की उपयोगिता बढ़ती ही जा रही है। आधिकारिक भाषा होने के कारण राजनीतिक क्षेत्रों में हिंदी की उपयोगिता है। साथ ही पत्र-पत्रिकाओं, साहित्य तथा शिक्षण संस्थानों में भी हिंदी की पकड़ मजबूत दिखाई देती है। इंटरनेट तथा विभिन्न सोशल मीडिया में भी हिंदी की उपलब्धता से इसकी उपयोगिता बढ़ी है। ऐसे ही विभिन्न क्षेत्रों जैसे व्यापार, वाणिज्य, शिक्षण, टीवी, सिनेमा आदि में हिंदी की उपयोगिता बढ़ती ही जा रही है। अत: कहा जा सकता है कि सभी क्षेत्रों में हिंदी की स्थिति मजबूत हुई है।
-अमित कुमार, गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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मजबूत संकल्प जरूरी
सभी क्षेत्रों में अभी हिंदी की स्थिति मजबूत नहीं हुई है। उच्च स्तर से निकलने वाले आदेश, बैंक व्यवहार के संदेश, फार्म, न्यायपालिका के कार्य, सरकारी योजनाओं के मसौदे, शेयर चर्चा, चिकित्सा व विज्ञान की शोध-चर्चा आदि क्षेत्रों में अंग्रेजी की पकड़ मजबूत बनी हुई है। इसके साथ ही बढ़ती निजी अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में अपने बच्चों को प्रवेश दिलाने की ललक हिंदी की मजबूती में बाधक है। कोई भी भाषा सीखना गुनाह नहीं है। गुनाह है तो बस दासता की भाषा को ही उच्च वर्ग व शासन-प्रशासन द्वारा कार्य-व्यवहार की सर्वश्रेष्ठ भाषा मान लेना हिंदी का उपयोग हर कार्य व्यवहार में लाने का मजबूत संकल्प ही हिन्दी भाषा को मजबूती प्रदान कर सकता है, बशर्त राजनीतिक अधिनायकवाद खत्म हो ।
-भगवती प्रसाद गेहलोत, मंदसौर
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उपेक्षित है हिंदी
हिंदी को लगातार उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है। जहां एक तरफ हमारी भाषा को मान्यता देने के लिए विश्व स्तर पर विश्व हिंदी पखवाड़े का आयोजन किया जाता है, वहीं दूसरी तरफ हमारे देश के ही कुछ राज्यों में इसका विरोध किया जा रहा है। हमारे लिए यह बड़े ही दुर्भाग्य की बात है। यहां तक कि हमारे कई राज्य यह कहने से भी नहीं चूक रहे हैं कि हिंदी भाषा को अपनाने से हमारी क्षेत्रीय भाषाएं दब जाएंगी अर्थात उनका अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। हमारे देश की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षा अखिल भारतीय सेवा की होती है, उसमें हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों कासकर अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की तुलना में काफी निम्न है। हिंदी माध्यम के विद्यार्थी परीक्षा देने से पहले ही हतोत्साहित हो जाते हैं।
-जबर सिंह, बाड़मेर
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हिंदी से दूरी
वर्तमान समय में हिन्दी भाषा को वह दर्जा नहीं मिल पाया है, जो अंग्रेजी को मिला हुआ है। हर माता-पिता यही चाहते हैं कि उनका बच्चा अंग्रेजी में शिक्षा ग्रहण करे क्योंकि इस भाषा में वे बच्चे का सुनहरा भविष्य देखते हैं। आज बड़े शिक्षण संस्थानों, कार्यालयों, बैंकिंग सेक्टर में हिन्दी की बजाय अंग्रेजी को अधिक महत्व दिया जाता है। सिविल सेवा जैसी परीक्षाओं में आज भी हिन्दी माध्यम वाले अभ्यर्थियों को कम सफलता मिलती है। कहने को तो प्रतिवर्ष हम हिन्दी पखवाड़ा तथा अन्य कई कार्यक्रम मनाते हैं, किन्तु इसकी उपेक्षा भी लगातार कर रहे हैं।
-कमल वर्मा, फुलेरा, जयपुर
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कुछ राज्यों में विरोध
हिन्दी विश्व की एक प्रमुख भाषा है। इसके बावजूद हिन्दी भाषा को सभी क्षेत्रों में अभी मजबूती नहीं मिली है। देश के कई राज्यों में ही इसका विरोध बना हुआ है। यह वास्तव में दुखद स्थिति है।
-कल्पेश कटारा, डूंगरपुर
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अंग्रेजी माध्यम स्कूलों का दबदबा
हिन्दी हमारी मातृ भाषा है। हिन्दी दिवस पर हर भारतीय इसके गुणगान करता है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। हम अपने बच्चों को अंग्रेजी माध्यम वाली स्कूल में दाखिला दिलाना अपनी शान समझते हैं। बड़े-बडे अधिकारी गण व नेता अपने भाषण में अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करना अपनी शान समझते है। हिंदी का प्रचार एक ढोंग है।
-डॉ. प्रकाश चन्द्र वर्मा, बीकानेर
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अंग्रेंजी को महत्व
दुनिया में 80 करोड़ से अधिक लोग हिंदी भाषी हैं। संसार में हिन्दी का चौथा स्थान है, जबकि भारत देश मे सिर्फ 44 प्रतिशत आबादी ही हिंदी भाषी हैं। आमतौर पर देखा जाए, तो हिन्दी भाषा की जगह अंग्रेजी को अहमियत दी जा रही हैं।
-वर्षा भूरिया, झुन्झुनूं
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अंग्रेजी को महत्व
सभी क्षेत्रों में हिन्दी कि स्थिति मजबूत नहीं हुई है, क्योंकि अंग्रेजी पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा हैं। हिन्दी भाषा को कम महत्व दिया जा रहा है। आज हरेक संस्था, कार्यक्रम, सभी में अंग्रेजी भाषा को महत्व दिया जा रहा है।
-कविता कुमावत, जयरामपुरा, आमेर
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सरकारी कार्यालयों में भी हिंदी कम
हिंदी भाषा राष्ट्र भाषा है। फिर भी लोग कम महत्व देते हैं। लोग क्षेत्रीय भाषा और अंग्रेजी को ज्यादा महत्व देते हैं। सरकारी दफ्तरों, कार्यालयों, कोर्ट में भी अंग्रेजी भाषा को महत्व मिलता है। लोगों ने अपने स्तर पर ही हिन्दी भाषा का महत्व कम कर दिया है ।
-राजेंद्र कुमार जांगिड़, बाड़मेर
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प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में अंग्रेजी का बोलबाला
यह कहना उचित नहीं होगा की हिंदी की स्थिति कमजोर हुई है। इस बात को भी स्वीकारा नहीं जा सकता कि यह बहुत मजबूत हुई है। ज्यादातर प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में आज भी अंग्रेजी मे लिखी किताबों का ही इस्तेमाल होता है। एक हिंदी माध्यम छात्र को आगे इन विषयो में कठिनाई जरूर आती है। इस कारण शुरुआत से ही लोग अंग्रेजी की तरफ रुख कर लेते है।
-भारती नागर, कोटा
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इंटरनेट पर बढ़ रही है हिंदी
इंटरनेट पर हिंदी सामग्री का प्रयोग बढ़ रहा है। सोशल मीडिया के बाजार में आज कई मंच ऐसे हैं, जो हिंदी में लिख, बोल, पढ़कर अच्छा कमा रहे है। गूगल,अमेजॉन जैसी दिग्गज कंपनी भी हिंदी भाषा पर काम कर रही हंै। भारत मे हर साल १४ सितंबर हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। हिंदी पखवाड़ा आयोजित किया जाता है, जिसके अंतर्गत सरकारी विभागों स्कूलों में हिंदी में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। आज विदेशों में हिंदी भाषा अनुसंधान का विषय बन गया है।
-अशोक कुमार शर्मा, झोटवाड़ा ए जयपुर
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सभी क्षेत्रों में लगातार मजबूत
भाषा भावों और विचारों की संवाहक होती है। वर्तमान में हिंदी भाषा सभी क्षेत्रों में मजबूत होती दिखाई पड़ रही है। सोशल मीडया पर हिंदी भाषा का खास प्रभाव दिख रहा है। भारतीय यूटूबर में से लगभग 90 प्रतिशत हिंदी भाषा का प्रयोग कर रहे है।
-कमलेश गिल, झुंझुनूं
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विश्व के हर कोने में पहुंची हिंदी
आज हिंदी का वर्चस्व सभी क्षेत्रों में है। मोबाइल और इंटरनेट ने हिंदी को विश्व के कोने-कोने में पहुंचा दिया है।
रामेश्वर आमेटा, कारोलिया, राजसमन्द
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हिंदी भाषा को बढ़ावा दिया जाए
राष्ट्र भाषा हिंदी का उपयोग निश्चित तौर पर सभी क्षेत्रों में बढ़ गया है। आवश्यकता भी यही है कि अधिक से अधिक राजभाषा का उपयोग हो चाहे न्यायिक प्रक्रिया हो, संसदीय प्रक्रिया हो, अकादमिक क्षेत्र हो या फिर राजकीय कार्यालय हों। बैंकिंग क्षेत्र में अब भी हिंदी भाषा के उपयोग से अछूते हंै। अंग्रेजी की बाध्यता समाप्त होनी चाहिए। न्यायालयो और बैंक में आज भी अंग्रेजी का उपयोग ज्यादा होता है, जिसे बंद कर हिंदी भाषी पत्रावलियों का उपयोग की बाध्यता होनी चाहिए।
-खुशवंत कुमार हिंडोनिया, चित्तौडग़ढ़
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हर स्तर पर हिंदी की उपेक्षा
हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। फिर भी हरस्तर पर इसकी उपेक्षा हो रही है। पश्चिमी संस्कृति के असर के कारण हिंदी को नजरअंदाज किया जा रहा है। इसके चलते लोग बचपन से ही बच्चों में हिंदी के प्रति उपेक्षा का भाव भर देते हैं।
-रितु शेखावत जयपुर
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हर जगह अंग्रेजी का दखल
हमारे संविधान निर्माताओं ने हिंदी को लेकर जो सपना देखा था वह पूरा नहीं हो पाया। आधुनिकता के इस दौर में हर जगह अंग्रेजी का प्रभुत्व देखा जा रहा है। विद्यालय, दफ्तर, होटल आदि स्थानों पर हिंदी भाषा उपेक्षित सी दिखाई देती है।
-आराधना सोनी, पन्ना, मध्यप्रदेश
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हिंदी को मिले प्राथमिकता
बैंकों में हिंदी का चलन बढऩे से भी हिंदी मजबूत हुई है। न्यायपालिका में अब भी हिंदी उस मुकाम तक नहीं पहुंची जहां होना चाहिए। हमें हिंदी को लेकर आत्म विश्वास होना जरूरी है। चीन की तरह हमें अपनी भाषा में विकास को प्राथमिकता देना चाहिए।
-अरविंद भंसाली जसोल
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हर दिल का अरमान है ङ्क्षहदी

हर दिल का अरमान है हिंदी,
हिंदुस्तान की जुबान है हिंदी !
ममता का एहसास है हिंदी,
हम सबका विश्वास है हिंदी !
हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी,
विकास की आशा है हिंदी !
भारत की तकदीर है हिंदी,
राष्ट्रीयता की तस्वीर है हिंदी !
प्यार का इजहार है हिंदी,
हमारी एकता का तार है हिंदी !
जन-जन के हर कंठ का गान है हिंदी,
मां भारती की आन, बान व शान है हिंदी !
हमारी आशा और अभिलाषा है हिंदी,
संस्कृति, साहित्य व इतिहास की जिज्ञासा है हिंदी !
अखंड भारत निर्माण की आस है हिंदी,
राष्ट्र के परम वैभव का अहसास है हिंदी !
जीवन के भटकाव का ठहराव है हिंदी,
साहित्य यात्रा का अंतिम पड़ाव है हिंदी !
उन्नति की अकूट संभावनाओं की खान है हिंदी,
भारतवासियों का स्वाभिमान है हिंदी !
मन मस्तिष्क के विचारों का प्राण आधार है हिंदी,
अभिव्यक्ति का माध्यम व शब्दागार है हिंदी !
सामाजिक सांस्कृतिक ताने-बाने का प्रगाढ़ बंधन है हिंदी,
जन-जन का अभिनंदन है हिंदी !
स्वाधीनता आंदोलन के संघर्ष की याद है हिंदी,
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का संवाद है हिंदी !
हर सवाल का जवाब व जीवन का सार है हिंदी!
-कैलाश सामोता, कुंभलगढ़, राजसमंद

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