खिलाड़ी बन रहे रोल मॉडल

Sunil Sharma

Publish: Jul, 14 2018 11:28:26 AM (IST)

विचार
खिलाड़ी बन रहे रोल मॉडल

आज के सिनेप्रेमी सच्ची घटनाओं से रूबरू होने के साथ ही उनसे प्रेरित भी होना चाहते हैं। इसीलिए ‘सचिन ए बिलियन ड्रीम्स’ जैसी डॉक्यूमेंट्री फिल्म को भी खूब पसंद किया जाता है जबकि इनमें मनोरंजन का पक्ष गौण होता है।

- मनोज जोशी, खेल पत्रकार

इन दिनों बॉलीवुड में बायोपिक्स की बाढ़ आ गई है। ऐसी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सोना उगल रही हैं। हाल ही रिलीज हुई ‘सूरमा’ ऐसी ही बायोपिक है जो हॉकी खिलाड़ी संदीप सिंह की कहानी पर केंद्रित है। इससे पहले मैरीकॉम, एमएस धोनी, भाग मिल्खा भाग, दंगल और सच्ची घटना पर आधारित चक दे इंडिया को रिकॉर्डतोड़ कामयाबी मिली थी जबकि पान सिंह तोमर को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

ऐसी फिल्में निश्चय ही देश में खेलों की संस्कृति विकसित करने में मददगार साबित हो रही हैं। यह ‘दंगल’ फिल्म के जनमानस पर पड़े असर का ही कमाल था कि कुश्ती में भी महिलाओं की संख्या में इजाफा हुआ।

वर्ष 2002 के मैनचेस्टर कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतने की कहानी जब ‘चक दे इंडिया’ में दिखाई गई तो इसका महिला हॉकी पर सकारात्मक असर पड़ा। फिल्म रिलीज के आठ साल में ही भारतीय महिलाएं इस खेल में 36 साल के बाद ओलिम्पिक के लिए क्वालिफाई करने में सफल रहीं। इसी तरह मेरीकॉम से प्रभावित होकर काफी संख्या में लड़कियों ने मुक्केबाजी को अपनाया। ‘भाग मिल्खा भाग’ से पहले आज की पीढ़ी मिल्खा सिंह की रिकॉर्डतोड़ सफलताओं से वाकिफ नहीं थी लेकिन ऐसी फिल्मों के बदौलत आज मिल्खा सिंह, पान सिंह तोमर, गीता फोगट व मेरीकॉम युवा पीढ़ी के रोल मॉडल बन गए।

आज सिनेप्रेमी सच्ची घटनाओं से रूबरू होने के साथ ही उनसे प्रेरित होना चाहते हैं। इसीलिए ‘सचिन ए बिलियन ड्रीम्स’ जैसी डॉक्यूमेंट्री फिल्म को भी खूब पसंद किया जाता है जबकि उसमें मनोरंजन का पक्ष गौण होता है। दर्शकों की रुचि में ये बदलाव खेलों में भारत के लगातार सुधरते प्रदर्शन की वजह से आया है। अस्सी के दशक में फिल्म ‘अश्विनी’ और ‘हिप-हिप हुर्रे’ जैसी खेल की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्मों को दर्शकों ने खारिज कर दिया था। लेकिन ‘बॉक्सर’ और ‘जो जीता वही सिकंदर’ जैसे फिक्शन को दूसरे कारणों से पसंद किया गया। खेलों पर फिल्मों का यह सिलसिला हॉलीवुड में काफी पहले शुरू हो गया था।

वर्ष २००० के बाद खेलों पर जो फिक्शन भी बने, उनमें से ज्यादातर ने अच्छा बिजनेस किया। अब बारी सूरमा की है, उसके बाद आपको जल्द ही बलबीर सिंह, सायना नेहवाल, पीवी सिंधू, गोपीचंद, पीटी उषा, ध्यानचंद, खाशाबा जाधव, कपिलदेव, मिताली राज व पैराएथलीट मुरलीकांत के जीवन पर आधारित फिल्में देखने को मिल सकती हैं।

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