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ब्रिटेन : मुक्त व्यापार समझौते में बाधक नहीं होगी नई सरकार

ब्रिटेन के चुनाव परिणाम चाहे जो भी हों, यूके-भारत संबंधों की निरंतरता बनी रहेगी। जैसे ही ब्रिटेन में नई सरकार बनेगी, एफटीए को लेकर फिर से सक्रियता बढ़ जाएगी। बहरहाल, उम्मीद है कि जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ती है, दोनों देशों में पारस्परिक रूप से लाभप्रद व्यापार साझेदारी के नए रास्ते भी खुलेंगे, जो राजनीतिक बदलावों से परे होंगे और आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकेंगे। दोनों देशों के संबंध मजबूती से आगे बढ़ेंगे।

जयपुरJun 24, 2024 / 07:13 pm

Gyan Chand Patni

हरेंद्रसिंह जोधा
प्रवासी भारतीय और राजस्थान एसोसियेशन यूके के समन्वयक
भा रत में चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी तीसरी बार सत्ता संभाल चुके हैं। चुनावी चकल्लस से ध्यान अब गवर्नेंस और डिलीवरी पर आ गया है, लेकिन ब्रिटेन में अब डोर से डोर चुनाव प्रचार का माहौल बना हुआ है। लेबर पार्टी, कन्जर्वेटिव पार्टी और दूसरे सभी दल मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए पूरी मशक्कत कर रहे हैं। ब्रिटेन में आगामी चुनाव का एक अहम पहलू देश के पहले भारतीय मूल के प्रधानमंत्री पर केंद्रित है। उल्लेखनीय है कि सत्तारूढ़ कन्जर्वेटिव पार्टी के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अक्टूबर 2022 में ऋषि सुनक ने पदभार ग्रहण किया था। अब वे मतदाताओं का सामना कर रहे हैं।
लगभग ७८ साल पहले भारतीय उपमहाद्वीप से ब्रिटिश राज के चले जाने के बावजूद, भारत और यूनाइटेड किंगडम के संबंध लचीले बने हुए हैं। अचानक ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने ४ जुलाई को चुनाव करवाने की घोषणा कर दी। उनके निर्णय ने सभी को चौंका दिया। अंतररराष्ट्रीय विश्लेषक विश्वास व्यक्त करते हैं कि चुनाव परिणाम चाहे जो आएं, भारत और ब्रिटेन के द्विपक्षीय संबंध स्थिर रहेंगे। फिलहाल सुनक के नेतृत्व में एफटीए हासिल करने की छोटी खिड़की चुनाव के कारण बंद हो गई है। उल्लेखनीय है कि यूरोपीय संघ छोडऩे के बाद ब्रिटेन ने तीन नए व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। ऑस्ट्रेलिया के साथ समझौते पर 2021 में और न्यूजीलैंड के साथ 2022 में हस्ताक्षर किए गए थे। ये समझौते मई 2023 के अंत में लागू हुए। वर्तमान में ब्रिटेन और भारत के बीच कोई व्यापार समझौता नहीं है। ध्यान रहे कि 17 जनवरी 2022 को मुक्त व्यापार समझौते के बारे में दोनों देशों में बातचीत शुरू हुई थी। भारत सरकार को उम्मीद थी कि यह बातचीत अक्टूबर 2022 तक पूरी हो जाएगी, लेकिन यह समय सीमा निकल चुकी है।
भारत और ब्रिटेन के बीच संबंध राजनीतिक परिदृश्य के हिसाब से आकार लेेते रहते हैं। भारतीय प्रवासियों का प्रभाव और आर्थिक सहयोग की संभावना इस रिश्ते में महत्त्वपूर्ण कारक हैं। भारत-ब्रिटेन संबंधों पर ब्रिटिश चुनावों का प्रभाव बहुआयामी है, जिसमें ऐतिहासिक संबंध, प्रवासी प्रभाव और आर्थिक संभावनाएं शामिल हैं। आगामी चुनाव निस्संदेह इस द्विपक्षीय रिश्ते की दिशा को आकार देंगे। भारत के साथ ब्रिटेन के जुड़ाव को इंडो-पैसिफिक धुरी के बड़े संदर्भ में देखा जाना चाहिए। राजकोषीय बाधाओं के साथ प्रतिस्पर्धी विदेश नीति प्राथमिकताओं को भी समझना होगा। यूक्रेन और गाजा में संघर्ष बड़ी चुनौती है। यूरोपीय संघ के साथ संबंधों को पुनर्जीवित करने की चुनौती भी बड़ी है। भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) वार्ता का उददेश्य द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना है।
जनवरी 2022 में शुरू हुई भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) वार्ता ने द्विपक्षीय व्यापार को महत्त्वपूर्ण रूप से बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है। यह व्यापार संबंध दोनों देशों के लिए अपार संभावनाएं रखता है। अधिकतर चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में अग्रणी विपक्षी लेबर पार्टी ने इन वार्ताओं को पूरा करने का वादा किया है। हालांकि, टाइम लाइन के प्रति अनिश्चितता बनी हुई हैं। ब्रिटेन में अचानक चुनाव की घोषणा से एफटीए को अंतिम रूप देने में बाधा जरूर उत्पन्न हो गई। राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बावजूद लेबर पार्टी व्यापार समझौते के लिए अपने समर्थन के प्रति दृढ़ बनी हुई है। लेबर पार्टी इस बार सत्ता में आने के प्रति आश्वस्त नजर आ रही है। लेबर पार्टी का सकारात्मक दृष्टिकोण भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने का संकेत नजर आता है। एफटीए में वस्तुओं, सेवाओं, निवेश और बौद्धिक संपदा अधिकारों सहित विभिन्न पहलुओं को शामिल करते हुए 26 अध्याय शामिल हैं। भारतीय उद्योग यूके के बाजार में आइटी और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों के कुशल पेशेवरों के लिए अधिक पहुंच की वकालत करता है। इसके साथ ही, यूके स्कॉच व्हिस्की, इलेक्ट्रिक वाहन, मेमने का मांस, चॉकलेट और चुनिंदा कन्फेक्शनरी उत्पादों जैसी वस्तुओं पर आयात शुल्क में पर्याप्त कटौती चाहता है। प्रस्तावित एफटीए से ब्रिटेन को रसायनों, परिवहन उपकरण, इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड मोटर वाहनों और व्हिस्की सहित अन्य के निर्यात को बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। कपड़ा और जूते जैसे श्रम प्रधान भारतीय निर्यात को कम ब्रिटिश शुल्क से लाभ हो सकता है। अभी भारत और यूके के बीच व्यापार एक साल में 38.1 अरब पाउंड के करीब है। यदि निवेश गति पकड़ता है, तो दोतरफा द्विपक्षीय व्यापार प्रवाह में वृद्धि होना तय है।
भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि प्रस्तावित व्यापार समझौते के लिए अध्याय-वार बातचीत लगभग बंद हो गई है और वस्तुओं और सेवाओं पर कार्यक्रम बातचीत के उन्नत चरण में है। भारतीय टीम ने लंबित मुद्दों को सुलझाने के उद्देश्य से 16-19 अप्रेल को यूके का दौरा किया। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटेन में जल्द चुनाव वार्ता के लिए सकारात्मक हैं। जुलाई की शुरुआत तक, यूके और भारत दोनों सरकारों के पास नए जनादेश होंगे। नया माहौल बातचीत को जल्दी और उद्देश्यपूर्ण ढंग से फिर से शुरू करने की अनुमति देगा। भारत और यूके के बीच जनवरी 2022 में वार्ता शुरू होने के बाद, व्यापार समझौते के लिए से बातचीत चल रही है। दोनों पक्षों के बीच 14वें दौर की बातचीत खत्म हो चुकी है। समय सीमा चूकने और दो साल से अधिक समय से बातचीत चलने के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि वार्ता की राह में कोई नई बाधा नहीं आएगी।
ब्रिटेन के चुनाव परिणाम चाहे जो भी हों, यूके-भारत संबंधों की निरंतरता बनी रहेगी। जैसे ही ब्रिटेन में नई सरकार बनेगी, एफटीए को लेकर फिर से सक्रियता बढ़ जाएगी। बहरहाल, उम्मीद है कि जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ती है, दोनों देशों में पारस्परिक रूप से लाभप्रद व्यापार साझेदारी के नए रास्ते भी खुलेंगे, जो राजनीतिक बदलावों से परे होंगे और आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकेंगे। दोनों देशों के संबंध मजबूती से आगे बढ़ेंगे।

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