ई-कॉमर्स क्षेत्र में चुनौतियां भी बढ़ीं

खुदरा कारोबार में डिजिटलीकरण मेँ विदेशी निवेश बढ़ने से जहाँ ई-कॉमर्स की रफ्तार बढ़ती गई है, वहीं देश के ई-कॉमर्स क्षेत्र में चुनौतियाँ भी बढ़ी है। ऐसे में देश के लिए बहुआयामी नई ई-कॉमर्स नीति आवश्यक दिखाई दे रही है।

By: shailendra tiwari

Updated: 30 Jul 2020, 01:23 PM IST

-डॉ. जयंतीलाल भंडारी, आर्थिक मामलों के जानकार

कोरोना संकट के इस दौर में सबका ध्यान तकनीक के अधिकाधिक इस्तेमाल पर है। यही वजह है कि देश के टेक्नोलॉजी क्षेत्र की ओर वैश्विक कंपनियों का ध्यान जा रहा है। सबसे बड़ी वजह तो लॉकडाउन, ऑनलाइन एजुकेशन तथा वर्क फ्राम होम की प्रवृत्ति बढना है जिससे देश में डिजिटल दौर तेजी से आगे बढ़ा है।


एक तरह से यह कह सकते हैं कि कोरोना के कारण बदले हालत में देश में इंटरनेट के उपयोगकर्ता छलांगे लगाकर आगे बढ़ रहे हैं।
देशभर में डिजिटल इंडिया के तहत सरकारी सेवाओं के डिजिटल होने, करीब 32 करोड़ से अधिक जनधन खातों में लाभार्थियों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) से भुगतान, तेजी से बढ़ी ऑनलाइन खरीदारी, लोगों की क्रय शक्ति के अनुसार मोबाइल फोन व अन्य डिजिटल चीजों की सरल आपूर्ति के कारण भी देश में डिजिटलीकरण आगे बढ़ा है।

कई ऐसी और वजह हैं जिनके कारण वैश्विक डिजिटल कंपनियाँ भारत में लगातार अपनी रूचि बढ़ाते हुए दिखाई दे रही हैं। भारत प्रति व्यक्ति डेटा खपत के मामले में दुनिया में पहले क्रम पर है। मोबाइल ब्रॉडबैंड ग्राहकों की तादाद के मामले में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है। डिजिटल भुगतान ने भी डिजिटल दौर को भारी प्रोत्साहन दिया है। देश में जो डिजिटल पेमैंट कोरोना के पहले जनवरी 2020 में करीब 2.2 लाख करोड़ रुपए के थे, वे जून 2020 में 2.60 लाख करोड़ रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गए हैं।
निसंदेह देश में खुदरा कारोबार में डिजिटलीकरण के तहत विदेशी निवेश बढ़ने से जहाँ ई-कॉमर्स की रफ्तार बढ़ती गई है, वहीं देश के ई-कॉमर्स क्षेत्र में चुनौतियाँ भी बढ़ी है।

ऐसे में देश के लिए बहुआयामी नई ई-कॉमर्स नीति आवश्यक दिखाई दे रही है। नई ई-कॉमर्स नीति में ऐसी कुछ बातें पर खासतौर से ध्यान दिया जाना होगा, जिनका संबंध ई-कॉमर्स की वैश्विक और भारतीय कंपनियों के लिए समान अवसर मुहैया कराने से है ताकि छूट और विशेष बिक्री के जरिए बाजार को न बिगाड़ा जा सके। ई-कॉमर्स से देश की विकास आकांक्षाएं पूरी हों तथा बाजार भी विफलता और विसंगति से बचा रहे। नई ई-कॉमर्स नीति से ऑनलाइन शॉपिंग से जुड़ी कंपनियों के बाजार, बुनियादी ढांचा, नियामकीय व्यवस्था जैसे बड़े मुद्दे शामिल किए जाने जरूरी हैं। नई ई-कॉमर्स नीति में छोटे खुदरा कारोबारियों औऱ ट्रेडर्स के हितों का ध्यान रखा जाना होगा। चूंकि ई-कॉमर्स में विदेशी निवेश के मानक बदले गए हैं जिससे ई-कॉमर्स कंपनियों में ढांचागत बदलाव की आवश्यकता है। नई ई-कॉमर्स नीति में सिर्फ विदेशी कारोबारियों को ही नहीं, बल्कि घरेलू कारोबारियों की भी अहम भूमिका होना चाहिए ।


इस परिप्रेक्ष्य में केन्द्र सरकार पिछले एक वर्ष में वर्तमान ई-कॉमर्स नीति को बदलने की डगर पर आगे बढ़ी है और सरकार के द्वारा प्रस्तुत नई ई-कॉमर्स नीति के मसौदें पर विभिन्न पक्षों का विचार-मंथन सामने आ चुका है। अब उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के द्वारा नई ई-कॉमर्स नीति को अंतिम रूप दिए जाने का परिदृश्य दिखाई दे रहा है।
इसमें कोई दो मत नहीं है कि कोविड-19 के बाद नई वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के तहत भविष्य में डेटा की वही अहमियत होगी जो आज क्रूडआयल की है। अतएव डेटा को एक अहम आर्थिक संसाधन के रूप में मान्यता देनी होगी और नई ई-कॉमर्स नीति के नए मसौदे में डेटा के स्थानीय स्तर पर भंडारण के विभिन्न पहलुओं पर जोर दिया जाना होगा। चूंकि अब डिजिटल वैश्विक कंपनियाँ भारत के टेक्नोलॉजी क्षेत्र में तेजी से कदम आगे बढ़ाते हुए दिखाई दे रही है। ऐसे में ध्यान दिया जाना होगा कि भारतीय सर्वर पर भंडारित डेटा का दुरुपयोग न हो। जब तक देश में डेटा संरक्षण कानून पारित न हो, तब तक नई कॉमर्स नीति में डेटा संरक्षण के समुचित प्रावधान समाहित किए जाने चाहिए।

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