scriptCheetah's return to the country is a step towards mission 'LiFE' | देश में चीते की वापसी मिशन ‘लाइफ’ की ओर कदम | Patrika News

देश में चीते की वापसी मिशन ‘लाइफ’ की ओर कदम

  • फिर लौटेगा चीता: टिकाऊ पर्यावरण के साथ विकासवादी संतुलन होगा बहाल
  • यों तो चीते की पुन: वापसी कुनो में हो रही है, पर उसकी तादाद में संभावित वृद्धि होने पर चीते को गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश सहित अन्य राज्यों में प्रवेश कराया जा सकता है।

Published: September 12, 2022 08:48:03 pm

भूपेंद्र यादव
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन और श्रम एवं रोजगार मंत्री
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चीते की वापसी की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और भारत एक बार फिर से जमीन के सबसे तेज जानवर का स्वागत करने का बेताबी से इंतजार कर रहा है, जिसकी गुर्राहट कभी ऊंचे पहाड़ों और तटों के सिवाए समूचे देश के जंगलों में प्रतिध्वनित होती थी। 17 सितंबर को चीते भारत में वापस लौटेंगे। जल्दी ही चीता मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में विचरण कर रहा होगा।
भूपेंद्र यादव, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन और श्रम एवं रोजगार मंत्री
भूपेंद्र यादव, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन और श्रम एवं रोजगार मंत्री
भारत में चीतों के न रहने के लिए असंख्य कारण जिम्मेदार रहे हैं, जिनमें पथ-निर्धारण, इनाम और शिकार के खेल के लिए बड़े पैमाने पर जानवरों को पकडऩा, पर्यावास में व्यापक बदलाव और उसके परिणामस्वरूप उनके शिकार के आधार का सिकुडऩा जैसे कारण शामिल हैं। ये सभी कारण मानव की कार्रवाइयों से प्रेरित हैं, और सिर्फ यह एक बात प्रतीक है प्राकृतिक दुनिया पर मनुष्य के पूर्ण प्रभुत्व की कोशिशों का। इसलिए जंगल में चीते की दोबारा वापसी एक पारिस्थितिकीय गलती को सुधारने और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दुनिया को दिए गए मिशन ‘लाइफ’ (लाइफस्टाइल फॉर द इनवायरनमेंट) के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को पूरा करने की दिशा में उठाया गया कदम है। मिशन ‘लाइफ’ का उद्देश्य ऐसी समावेशी दुनिया का निर्माण है, जिसमें मनुष्य का लालच वनस्पतियों व जीव-जंतुओं के अस्तित्व की जरूरत को लांघता नहीं, बल्कि जहां मनुष्य, जीव-जंतुओं सहित प्रकृति के साथ सद्भाव से रहते हैं।
प्रतीकात्मक चित्रविकास के पश्चिमी मॉडल ने इस धारणा को जन्म दिया कि मानव सर्वोच्च है और प्रौद्योगिकी की शक्ति से युक्त यह ‘सर्वोच्च मानव’ हर उस चीज को हासिल कर सकता है, जिस पर वह अपना दावा करता है। जब इस मॉडल को व्यवहार में लाया गया, तो मानव के साथ ही उनके द्वारा अस्थायी रूप से अर्जित समृद्धि की भावना भी गुम हो गई। इस मॉडल ने न केवल अनेक प्रजातियों को खतरे में डाला, बल्कि पृथ्वी ग्रह के अस्तित्व को ही खतरे में डाल दिया है।
युगों से भारत ‘प्रकृति रक्षति रक्षिता’ पर विश्वास करता आया है। हम आबादी के आकार और विकास संबंधी जरूरतों के बावजूद बाघ, शेर, एशियाई हाथी, घडिय़ाल और एक सींग वाले गैंडे सहित कई महत्त्वपूर्ण प्रजातियों व उनके पारिस्थितिक तंत्रों को संरक्षित करने में सक्षम रहे हैं। बीते कुछ वर्षों में भारत प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट लायन और प्रोजेक्ट एलिफेंट के साथ बेहद महत्त्वपूर्ण प्रजातियों की तादाद बढ़ाने में भी समर्थ रहा है। जहां एक ओर बाघ, वन प्रणालियों की एक प्रमुख अग्रणी प्रजाति का प्रतिनिधित्व करता है, वहीं चीता खुले जंगलों, घास के मैदानों और चारागाहों के शून्य को भर देगा। चीते की वापसी धरती के टिकाऊ पर्यावरण के निर्माण की दिशा में एक महत्त्वाकांक्षी कदम है, क्योंकि एक शीर्ष परभक्षी की वापसी ऐतिहासिक विकासवादी संतुलन को बहाल करती है जो उनके पर्यावास की बहाली और शिकार के आधार के संरक्षण पर व्यापक प्रभाव डालती है। चीता उस विकासवादी स्वाभाविक चयन प्रक्रिया का हिस्सा रहा है जिसके कारण हिरण और चिंकारा जैसी प्रजातियों में उच्च गति से अनुकूलन हुआ है। चीते की वापसी लुप्तप्राय प्रजातियों और खुले वन पारिस्थितिकी तंत्र सहित उसके शिकार-आधार की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी, जो कि कुछ हिस्सों में विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं।
प्रोजेक्ट चीता उपेक्षित पर्यावासों को बहाल करने के लिए संसाधन लाएगा, जिससे उनकी जैव विविधता का संरक्षण होगा, उनके पारिस्थितिकी तंत्र की सेवाओं और कार्बन कैप्चर करने की उनकी अधिकतम क्षमता का उपयोग हो सकेगा। स्थानीय समुदाय को भी बड़े पैमाने पर लाभ होगा, क्योंकि चीते के लिए जिज्ञासा और सरोकारों के परिणामस्वरूप उत्पन्न पारिस्थितिक तंत्र से उनकी आजीविका के विकल्प बढ़ेंगे और उनके रहन-सहन की स्थिति में सुधार लाने में मदद मिलेगी।
आज पूरी दुनिया विशाल मांसाहारी पशुओं और उनके पारिस्थितिकी तंत्रों को संरक्षित किए जाने की जरूरत के प्रति जागरूक हो चुकी है। विशाल मांसाहारी पशुओं की संख्या में हो रही गिरावट के क्रम को रोकने या उलटने के लिए दुनिया भर में उनके पुन: प्रवेश और संरक्षण/स्थानांतरण का उपयोग किया जा रहा है। चूंकि भारत, ग्रह के संरक्षक के रूप में आने वाली पीढिय़ों के लिए टिकाऊ भविष्य का निर्माण करने के अपने वादे को पूरा करने के लिए पूरे दिल से आगे बढ़ रहा है, इसलिए उसने भी चीते की वापसी का विकल्प चुना है।
यों तो चीते की पुन: वापसी कुनो में हो रही है, पर उसकी तादाद में संभावित वृद्धि होने पर चीते को गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश सहित अन्य राज्यों में प्रवेश कराया जा सकता है। इससे वन्यजीवन के अन्य रूपों और संबद्ध पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के साथ-साथ भारत की खोई हुई विरासत को पूरी तरह बहाल करने में मदद मिलेगी।

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