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Leadership: हाइब्रिड ऑफिस में स्पष्ट होनी चाहिए संचार प्रथाएं

स्पष्ट संचार के अलावा, कर्मचारियों के बीच असमानता, गलतफहमी, या भ्रम को रोकने वाली प्रथाएं लागू करना भी अनिवार्य है

Published: June 13, 2022 07:43:24 pm

प्रो. हिमांशु राय
(निदेशक, आइआइएम इंदौर)

मैंने अपने पिछले लेखों में हाइब्रिड वर्किंग के प्रचलन पर चर्चा की। निरंतर विकसित और परिवर्तित होती कार्यस्थल की संस्कृति को लचीला बनाने के लिए वर्तमान समय सर्वश्रेष्ठ है। हालांकि, बिना किसी हस्तक्षेप के संस्कृति के अपने आप विकसित होने की प्रतीक्षा से बेहतर है, प्रबंधक और लीडर स्वयं अपने अधीनस्थों के साथ मिल कर रणनीति तैयार करें। परिवर्तन के साथ सामंजस्य स्वत: हो जाए, इसकी प्रतीक्षा करने का अर्थ है कि संगठनात्मक संस्कृति का उप-संस्कृतियों में विखंडन नहीं रोका जा सकेगा।
प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक चित्र
वर्तमान समय संगठन में संस्कृति को आकार देने के तरीके का सावधानीपूर्वक संज्ञान लेने, संस्कृति को बहाल करने, व इसे और अधिक समावेशी, लचीला और आकर्षक बनाने में एक लीडर की भूमिका को समझने का है। रिमोट और इन-ऑफिस मॉडल से प्रथाओं और मानदंडों के सम्मिश्रण के साथ-साथ, सभी कर्मचारियों के लिए पहचान और एकजुटता की एक सामान्य भावना उत्पन्न करना लीडर की प्राथमिकता होनी चाहिए। इससे वे कर्मचारियों के लिए आरामदायक वातावरण का निर्माण कर सकते हैं, फिर चाहे वे रिमोट, इन-ऑफिस या हाइब्रिड मोड पर ही क्यों न हों।
प्रबंधक और लीडर निस्संदेह नीतियों और हस्तक्षेप करने के अधिकारों से संपन्न होते हैं, पर उन्हें संगठनात्मक संस्कृति को सशक्त बनाने के लिए अपने विशेष दृष्टिकोण के जरिए विशिष्ट कार्ययोजना तैयार करने की जरूरत होती है। इन्हीं में सबसे अहम है स्पष्ट संचार। हाइब्रिड ऑफिस में, कई बार छोटी किन्तु महत्त्वपूर्ण बातें ध्यान से चूक सकती हैं। हो सकता है कई आवश्यक बातें रेकॉर्ड न हो पाएं - और ऐसे में कार्यालय से काम कर रहे और ऑनलाइन उपस्थित कर्मियों के बीच सूचना विषमता उत्पन्न हो सकती है। ऐसी समस्या के समाधान के लिए संचार प्रथाएं अनिवार्य रूप से स्पष्ट की जानी चाहिए। सुनिश्चित किया जाए कि हर समय और निर्णय की जानकारी व्यवस्थित तरीके से दर्ज या व्यक्त की जाए। उभरते हुए मानदंडों, अनुष्ठानों, प्रथाओं, यहां तक कि संगठनात्मक संस्कृति के परिप्रेक्ष्य से कर्मचारियों की अपेक्षाओं पर भी यही लागू होता है। इन सांस्कृतिक तत्वों की मौखिक या लिखित अभिव्यक्ति, एकरूपता सुनिश्चित करने व अस्पष्टता खत्म करने के लिए की जा सकती है।
स्पष्ट संचार के अलावा, कर्मचारियों के बीच असमानता, गलतफहमी, या भ्रम को रोकने वाली प्रथाएं लागू करना अनिवार्य है। दिन-प्रतिदिन की बातचीत और चर्चाओं में भी, लीडरों और पर्यवेक्षकों को चाहिए कि वे टीम के अन्य सदस्यों को प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित करें। प्रबंधकों को सुलभ और सहायक होना चाहिए। वे 'मुझसे कुछ भी पूछें' या 'आस्क मी एनीथिंग' सेशन, और अनौपचारिक मुलाकात (आमने-सामने या आभासी) जैसी नई प्रथाएं भी शुरू कर सकते हैं ताकि कर्मचारियों को बिना किसी डर के अपने काम से संबंधित चिंताओं को साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

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