scriptConspiracy to revive terror in Jammu region too | जम्मू क्षेत्र में भी आतंक को पुनर्जीवित करने की साजिश | Patrika News

जम्मू क्षेत्र में भी आतंक को पुनर्जीवित करने की साजिश

- जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में तेजी से सुधरते हालात से बौखलाया पाकिस्तान आतंकी गतिविधियां बढ़ा रहा है। उस पर दबाव बढ़ाना जरूरी हो गया है।

नई दिल्ली

Published: October 26, 2021 08:50:35 am

प्रो. राकेश गोस्वामी, (क्षेत्रीय निदेशक, भारतीय जन संचार संस्थान, जम्मू)

जम्मू संभाग के पुंछ जिले में पिछले कुछ दिनों से सैन्य कार्रवाई चल रही है। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने जिले के जंगल को चारों तरफ से घेर रखा है और तलाशी अभियान चल रहा है। इसमें ड्रोन व हेलीकॉप्टर की भी मदद ली जा रही है। इसके पहले 2009 में पुंछ के पाटीदार इलाके में एक ऑपरेशन नौ दिन तक चला था। थल सेना प्रमुख के अभियान तेज करने के निर्देश यह समझने के लिए पर्याप्त है कि आतंकियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। कहा जा रहा है कि वे प्राकृतिक गुफाओं और गुज्जरों की डोको के बीच में छिपे हो सकते हैं। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक कोई न कोई लोकल गाइड उनके साथ है। जम्मू क्षेत्र के सीमावर्ती पुंछ और राजौरी जिलों में 90 के दशक से ही सीमा पार से आए आतंकी इसी तरकीब से बचते रहे हैं। आतंकी इस इलाके के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और घने जंगलों में आसानी से पनाह ले लेते हैं और फिर जंगलों से होते हुए ही दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले तक पहुंच जाते हैं।

जम्मू क्षेत्र में भी आतंक को पुनर्जीवित करने की साजिश
जम्मू क्षेत्र में भी आतंक को पुनर्जीवित करने की साजिश

डेरा की गली का जंगल मेंढर से शुरू होता हुआ भिंबर गली तक आता है। आतंकियों की घुसपैठ का रूट बालाकोट से शुरू होता है और पीरपंजाल की पहाडिय़ों के साथ कश्मीर के शोपियां तक फैला है। सर्दियों में इस इलाके में भारी बर्फबारी होती है और इसी दौरान आतंकी सीमा पार से भारत की जमीन पर घुसपैठ कर लेते हैं। जम्मू क्षेत्र में पाकिस्तान से दाखिल होने का दूसरा रास्ता कठुआ और सांबा जिलों में मौजूद 200 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा से होकर आता है। इस रास्ते से भारत में घुसपैठ करने वाले आतंकी उधमपुर, भद्रवाह, रामबन, किश्तवाड और डोडा के जंगलों में पहुंचते हैं। वहां से फिर ये दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले की तरफ चले जाते हैं। रामबन, किश्तवाड पहले डोडा जिले के ही हिस्से थे। 90 के दशक में डोडा के किश्तवाड़ इलाके का नवां पाची आतंकियों का गढ़ था। यहां आतंकियों का होल्डिंग एरिया बना हुआ था और यहीं से वे किश्तवाड़ से जंगलों से अनंतनाग पहुंचते थे।

साल 2013 आते-आते पुंछ, राजौरी, डोडा, रामबन, किश्तवाड़, भद्रवाह आदि इलाके आतंक से मुक्त हो गए। पिछले साल जब दिसंबर में जम्मू पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने पुंछ के बसूनी गांव से मुश्ताक इकबाल और मुर्तजा इकबाल नामक दो भाइयों को ग्रेनेड के साथ गिरफ्तार किया, तो लगा कि इस इलाके में एक बार फिर से आतंकवाद को पुनर्जीवित करने के प्रयास हो रहे हैं। इसके बाद इस साल सितंबर में सीमापार से घुसपैठ की खबर आई। ये आतंकी सूरनकोट, थानामंडी और भट्टाधूरियां के बीच के लगभग 16 वर्ग किलोमीटर के जंगल में सक्रिय थे। सभी जानते हैं कि धारा-370 हटने और राज्य के दो केंद्रशासित प्रदेशों में विभाजन के बाद जम्मू-कश्मीर में जिस तरह के सकारात्मक बदलाव दिखने लगे हैं, उससे आतंकियों के आकाओं में बेचैनी होने लगी है। हाल के दिनों में कश्मीर में हुई आम नागरिकों की हत्याएं इसी ओर इशारी करती हैं। इसी बीच जम्मू क्षेत्र में भी आतंक को पुनर्जीवित करने की साजिश शुरू हो गई है।

यह बात सच है कि जैसे—जैसे इस इलाके में शांति बहाल हुई, वैसे-वैसे सीमा और सुरक्षा प्रबंधन थोड़ा ढीला जरूर पड़ा। आतंकियों के आकाओं को लगा होगा कि सुरक्षा एजेंसियों का पूरा ध्यान कश्मीर पर है। ऐसे समय में जम्मू में कश्मीर जैसे हालात बनाना आसान होगा। उनका यह सोचना गलत साबित होगा। देश की सेना के हौसले बुलंद हैं और जरूरत पड़ी तो एक बार फिर से 'सर्प विनाश' जैसे बड़े अभियान से आतंकियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया जाएगा। आतंकियों को शह देने की पाकिस्तान की चाल कभी सफल नहीं होगी।

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