जिद और जुनून से हारा कोरोना

इस समय पूरी दुनिया में कोरोना से निपटने में न्यूजीलैंड माॅडल की चर्चा हो रही है। वहां अब अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कवायद शुरू हो गयी है।

By: shailendra tiwari

Updated: 14 Jun 2020, 04:12 PM IST

एनके सोमानी, विदेश मामलों के जानकार

प्रशांत महासागर में स्थित न्यूजीलैंड ने वैश्विक महामारी कोविड-19 पर विजय प्राप्त कर ली है। पिछले 17 दिनों से न्यूजीलैंड में कोरोना का कोई नया मामला नहीं आया हैं। अस्पताल में भर्ती अंतिम मरीज को उपचार के बाद स्वस्थ होने पर घर भेज दिया गया है। प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न जिस वक्त न्यूजीलैंड को कोरोना मुक्त देश बनने की घोषणा कर रही थी उस वक्त उनका उत्साह, जोश और खुशी देखने वाली थी।


प्रधानमंत्री जेसिंडा की इस घोषणा के साथ ही न्यूजीलैंड में जिन्दगी फिर शुरू हो गयी है। सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों पर लगाई गयी पाबंदियां पूरी से हटाली गई है. खास बात यह है कि अपने नागरिकों को बेहतर नेतृत्व देने वाली 39 वर्षीय जेसिंडा ने जबरदस्त उत्साह वाली इस कामयाबी के बाद भी अपना धैर्य नहीं खोया है। उन्होंने नागरिकों से सावधान रहने की अपील करते हुए इस वास्तविकता को भी स्वीकार किया कि हो सकता है, संक्रमण के मामले दोबारा आ जाएं। उन्होंने अपने नागरिकों के उत्साह को बनाए रखने के लिए यह भी कहा कि अगर संक्रमण के मामले दोबारा आते भी हैं, तो यह विफलता की निशानी नहीं होगी। यह इस वायरस की वास्तविकता है, हमें पूरी तैयारी रखनी है।


50 लाख की आबादी वाले न्यूजीलैंड में कोरोना संक्रमण का पहला मामला 28 फरवरी को सामने आया। देश में कुल 1154 लोग संक्रमित हुए थे। जबकि मरने वालों की संख्या केवल 22 है। ऐसे में सवाल यह है कि बिना वैक्सीन के न्यूजीलैंड इस खतरनाक महामारी पर कैसे काबू पा सका। सवाल यह भी उठ रहा है कि इटली जैसा बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं वाला देश जो काम नहीं कर सका वह न्यूजीलैंड कैसे कर गया । इस समय जबकि पूरी दुनिया में न्यूजीलैंड माॅडल की चर्चा हो रही है, वहीं न्यूजीलैंड में अब अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कवायद शुरू हो गयी है।


दरअसल, कोरोना के खिलाफ पूरी जंग में जेसिंडा ने मेडिकल एक्सपर्टस के साथ मिलकर 43 बिन्दूओं पर आधारित 4 सूत्री कार्यक्रम बनाया। 4 सूत्री कार्यक्रम के पहले चरण में संक्रमण के संभावित खतरे का अनुमान लगाकर उसे रोकने के उपाय किए गए थे। इसके तहत देश की सीमाओं को बंद करने के साथ-साथ टेस्टिंग पर जोर दिया गया। जैसिंडा ने इस बात को बहुत अच्छेे से जान लिया था कि संक्रमण को रोकने के लिए उसके चक्र को तोड़ना जरूरी है। यही वजह थी कि प्रथम चरण में जेसिंडा का मुख्य फोकस संक्रमितों की ट्रेवल हिस्ट्री और कांटेक्ट ट्रेसिंग पर रहा। दूसरे चरण के अंतर्गत 7 हफ्ते का लाॅकडाउन लागु कर प्रत्येक सप्ताह उसकी समीक्षा की जानी थी। तीसरे चरण में वायरस के रोकथाम के लिए व्यापक स्तर पर प्रबंध किए गए। फिजिकल डिस्टंेसिंग पर जोर दिया गया । चैथे चरण में देश में सख्त लाॅकडाउन की घोषणा की गयी। इमरजेंसी सर्विसेज को छोड़कर लोगों को घर में रहने की हिदायत दी गई। सभी सार्वजनिक स्थलों को बंद कर दिया गया और सभी तरह की यात्राओं पर रोक लगा दी गई। सरकार ने एनजेड कोविड टेसर एप लाॅच किया। कोरोना को कंट्रोल करने में इस एप का अहम योगदान रहा। एप की खास विशेषता यह थी कि यदि किसी व्यक्ति को आँफिस, सार्वजनिक भवन, दुकान या माॅल में जाना होता, तो उसे भवन या आॅफिस के बाहर ही एप से क्यूआरकोड को स्कैन करना होता है, इससे व्यक्ति के स्वास्थ्य और अन्य जानकारियां मिल जाती है।


सच तो यह है कि कोरोना से लड़ाई के दौरान प्रधानमंत्री जेसिंडा खुद पूरे समय फ्रंट लाइन में खड़ी दिखाई दी। वो शुरू से ही यह कहती रही कि इटली जैसे हालात अपने देश में नहीं होने देंगी। उन्होंने देश के लोगों को कोरोना की चैन तोड़ने के लिए टीम की तरह मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। वायरस का संक्रमण खतरनाक स्तर पर पहंुच पाता उससे पहले ही अर्डर्न ने लाॅकडाउन के कडे़ नियम लागू कर देश की सीमाओं को बंद करने जैसे कदम उठा लिए थे। 18 मार्च के बाद जब संक्रमितों की संख्या बढने लगी तो सरकार ने बिना देरी किए विदेश से आने वाले लोगों को क्वारंटाइन में रहने के आदेश दिए। बाहरी मुल्कों से आने वाले लोगों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया। 23 मार्च को पुरे देश में कठोर लाॅकडाउन का ऐलान कर दिया गया। सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति, कठोर अनुशासन, त्वरित निर्णय प्रक्रिया और बेहतर प्रबंधन को जेसिंडा ने कोरोना के खिलाफ लडाई में हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया और देश में संक्रमण को रोकने में सफल हुई। कुल मिलाकर कहा जाए तो जेसिंडा ने कोरोना के खिलाफ संघर्ष में जो योजना बनाई उसे ज़मीनी धरातल पर लागू किया गया। कोरोना के विरूद्व उनकी जंग में जनता ने भी भरपूर साथ दिया।


हालाँकि दुनिया के दूसरे देशों की तरह न्यूजीलैंड के लिए भी इस वैश्विक महामारी के खिलाफ जंग आसान नहीं रही। हजारों लोगों की नौकरी चली गई। देश की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देना वाला पर्यटन उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। संक्रमण पर नियंत्रण के बाद अब जेसिंडा देश की अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने की दिशा में कदम उठा रही हैं। विदेशी नागरिकोें के देश में आने पर प्रतिबंध होने के कारण वो घरेलू पर्यटन को बढ़ावा दे रही है। इसके लिए उन्होंने कर्मचारियों के काम और जीवन में संतुलन को बनाए रखने के लिए सप्ताह में चार दिन काम करने का सुझाव दिया है। उन्होंने अपने देश के नागरिकों से अपील की है कि उन्हें अपना वक्त ज्यादा से ज्यादा परिवार के साथ घूमने में बिताना चाहिए। उनका मानना है कि जब लोग सप्ताह में तीन दिन घूमने के लिए निकलेंगे तो अर्थव्यवस्था को पटरी पर आते वक्त नहीं लगेगा।


वायरस के प्रसार को रोकने के लिए दुनिया का हर छोटा-बडा देश जेसिंडा के प्रयासों की प्रशंसा कर रहा है। देश के भीतर भी लोग अपने पीएम की अद्भूत नेतृत्व शक्ति की प्रशंसा कर रहे हैं। लोग यह कहते हुए नहीं थक रहे हैं कि जेसिंडा के कड़े फैसलों और सरकार की दूरदर्शी सोच के चलते ही न्यूजीलैंड इस महामारी से उबर सका है। उन्हें अब तक का सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री भी कहा जाने लगा है।

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