कोरोना - बहुराष्ट्रीय त्रासदी में खड़ा भारत

कोरोना महामारी तो बहुराष्ट्रीय त्रासदी है, लेकिन इस त्रासदी ने विशेषकर हम भारतीयों को अनेक सीख दी है। 'वसुधैव कुटुंबकम' की उदार नीति ने भारत को विश्व में आज एक नयी पहचान दी है।

By: Prashant Jha

Published: 23 Apr 2020, 02:33 PM IST

प्रभात झा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भाजपा एवं पूर्व सांसद

बहुराष्ट्रीय त्रासदी कोरोना के कारण देश में लॉकडाउन का एक माह हो गया। सब कुछ ठप रहा पर भारत चलता रहा। इस एक माह के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सक्रियता से यह संदेश दिया कि उनमें विश्व का नेतृत्व करने की ताकत है। नेतृत्व की इस क्षमता के पीछे राष्ट्र के रूप में भारत की लोकतांत्रिक ताकत है।‘ भारत’ संसदीय प्रणाली की सरकार वाला एक स्वतंत्र प्रभुसत्ता सम्पन्न लोकतंत्रात्मक गणराज्य है, और संविधान में सरकार के संसदीय स्वरूप की व्यवस्था है।

कुछ अपवादों को अगर छोड़ दें, भारत का यह सौभाग्य रहा है कि यहां संविधान के दायरे में सरकार की शक्ति और जनता के अधिकार में अद्भुत संतुलन रहा है, जो वैश्विक जगत को भी अचम्भित करता है। भारतीय गणतंत्र की सफलता के मूल में जनता द्वारा अधिकार की आराधना से अधिक कर्तव्य की साधना रही है। यह भारत की सनातन प्रकृति रही है, संस्कृति रही है, जो चुनौतियों की विकृति को कभी लम्बे समय तक हावी नहीं होने दिया।

आज पूरा विश्व अदृश्य शत्रु कोरोना वायरस से युद्ध कर रहा है। भारत भी इस युद्ध को मजबूती से लड़ रहा है। लेकिन कोरोना के विरुद्ध इस युद्ध के कारण आज जो लॉकडाउन की स्थिति है, राष्ट्र के रूप में भारत और भारतीय नागरिकों ने इसे चुनौती से अधिक अवसर के रूप में लिया है। चुनौती है। गंभीर चुनौती है। लेकिन नागरिक बोध, आत्मविश्वास और जागृति के एक नए युग की शुरुआत भी हुई है। नागरिकों का आत्मविश्ववास बढ़ा है और आत्मसम्मान जगा है। बहुराष्ट्रीय त्रासदी के दौरान नागरिक कर्तव्य क्या हो, यह परिभाषित हुआ है। जनता और सरकार के बीच परस्पर विश्वास, अधिकार और कर्तव्यबोध परिभाषित हुआ है। सरकार क्या है? सरकार कैसी हो? किसके लिए हो? दायित्व क्या हो? सरकार की आवश्यकता क्यों? इन प्रश्नों को सार्थक उत्तर मिला है। 'कोउ नृप होय हमें का हानी', इस दायत्वहीन जन बोध का ज्ञानशोधन हुआ है। किताब का ज्ञान तो ज्ञान मात्रा है, राष्ट्र की घटना से मिलने वाला ज्ञान गंगा की तरह अविरल प्रवाहमान रहता है।

आज लॉकडाउन के इस दौर में लोगों ने घर में रहकर राष्ट्र की आराधना की है। सामूहिकता, पड़ोसी भाव, रिस रहे रिश्ते की मजबूती, अपनत्व, आत्मीयता, उदारता, सेवा-भाव को उचित स्थान मिला है। 'कोई भूखा नहीं रहेगा' का भाव जगा है। 'साईं इतना दीजिये, जा मे कुटुम समाय, मैं भी भूखा न रहूं साधु ना भूखा जाय' का भाव जगा है। सरकार के आग्रह और नागरिकों के कर्तव्य से संकट की इस घड़ी में नागरिकबोध का जागरण हो रहा है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक आज एक ही जनभावना है 'मैं भी जीऊं,और सब जियें'। जनश्रद्धा और जनआस्था जैसे सामाजिक-सांस्कृतिक भारतीय मूलतत्व ने अपना पुनः स्थान प्राप्त किया है। सहिष्णुता, सहानुभूति, संवेदनशीलता और सद्भाव का ऐसा अद्भुत दृश्य भारतीय समाज ने पूर्व में शायद ही देखा हो।

जनप्रतिनिधियों ने भी लॉकडाउन के दौरान अपने वास्तविक कर्तव्य को निभा रहे हैं। अब तक जनप्रतिनिधियों से यही अपेक्षा रहती थी कि नाली, नाले-खरंजा और सड़क का निर्माण करवाया जाए। विकास के यही मायने थे। लेकिन आज यह साबित हो गया है कि जनप्रतिनिधि का पहला कर्तव्य है जान-माल की सुरक्षा। जनता और जनप्रतिनिधि दोनों इस आत्मबोध से युक्त हुए हुए हैं। समाज के सभी वर्गों ने कोरोना महामारी से निपटने और लॉकडाउन की स्थिति से उबरने में अपना योगदान दिया है।

लॉकडाउन समस्या के इस काल में पत्रकार, कलाकार, रचनाकार, शिक्षक, समाजसेवी सभी ने अपना योगदान दिया है। घर-घर से समाधान आया है। बच्चों ने अपने-अपने घर से जो संदेश दिया, पूरे राष्ट्र ने देखा। हम सब अपना-अपना राष्ट्रीय कर्तव्य निभा रहे हैं। मुंडन हो, उपनयन हो, विवाह हो, श्राद्ध कर्म हो, हम लोग सभी को फिलहाल स्थगित कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी अपने पूर्वाश्रम पिता के अंतिम दर्शन नहीं कर पाए। उन्होंने राष्ट्र को संदेश दिया कि पुत्रधर्म से बड़ा राष्ट्रधर्म है। यह प्रेरक त्याग है।

पूरे देश में इस समय अलग-अलग विभागों के लगभग 1 करोड़ 25 लाख कोरोना योद्धा अगली पंक्ति में कार्यरत हैं। जिनमें डॉक्टर्स, अस्पतालकर्मी, पुलिस, सफाईकर्मी आदि शामिल हैं। कोरोना योद्धाओं पर आक्रमण की कुछ अवांछित घटनायें हुई हैं, लेकिन गृह मंत्रालय ने संज्ञान लेकर ऐसे मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत कड़ी कार्रवाई करने को कहा है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में सख्ती से कार्रवाई की गयी है।

सार्वजनिक उपक्रम हो या निजी उपक्रम सभी ने अपने स्तर से योगदान दिया है। भारतीय रेल ने दवा और खाद्यान्न को देश के कोने-कोने तक पहुंचाया, वहीं रेल डिब्बों को अस्पताल में परिवर्तित किया है।विनिर्माण क्षेत्र में लगे उद्योगों ने मास्क, टेस्ट किट और पर्सनल प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट का निर्माण किया।
कोरोना महामारी तो बहुराष्ट्रीय त्रासदी है, लेकिन इस त्रासदी ने विशेषकर हम भारतीय को अनेक सीख दी है। 'वसुधैव कुटुंबकम' की उदार नीति ने भारत को विश्व में आज एक नयी पहचान दी है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर इस त्रासदी के बीच विश्व के 62 देशों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन सहित अनेक दवाओं की सप्लाई हो रही है।

विश्व त्रासदी के इस काल में अपने देश का नेतृत्व करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्क देशों और जी-20 देशों (जिसमें विश्व के अग्रणी देश शामिल हैं) की अगुवाई की है। अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, ब्राज़ील जैसे देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को न केवल बधाई दी, अपितु भारत का शुक्रिया भी अदा किया।

विश्व में कोरोना की त्रासदी विकराल रूप ले चुकी है। कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या विश्व में बढ़कर 25 लाख से अधिक हो गई है, और इसने पौने दो लाख से अधिक लोगों की जान ले ली है। साथ ही, यह राहत भरी खबर है कि विश्वभर में अब तक कोरोना महामारी से 6.56 लाख लोग ठीक भी हुए हैं। विश्व में अमेरिका की स्थिति सबसे गंभीर है, जहां 8 लाख से अधिक लोग संक्रमित हैं, वहीं 45 हज़ार से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई है। इटली, फ्रांस, स्पेन और जर्मनी में भी मरने वाले लोगों की संख्या हजारों में है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। जहां तक भारत का प्रश्न है, सबकुछ नियंत्रण में है। कोरोना संक्रमितों की संख्या अब तक लगभग 20 हजार है जिसमें लगभग 4 हजार से अधिक लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 650 से अधिक लोगों की मृत्यु हो चुकी है और 15 हजार संक्रमितों का अस्पतालों मे उपचार चल रहा है। गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड राज्य पूरी तरह कोरोना मुक्त घोषित हो चुका है। 22 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश और 12 करोड़ आबादी वाले बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या कम है। पूरे देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या की वृद्धि की गति में लगातार कमी आ रही है। भारत की यह सकारात्मक स्थिति नेतृत्व की अद्भुत शक्ति और नागरिक बोध की सजग कर्तव्यपरायणता का परिणाम है।

ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध आजादी की लड़ाई में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अगुवाई की और भारत को आजादी दिलाई। आज कोरोना के बहुराष्ट्रीय त्रासदी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के पारिवारिक मुखिया के रूप में जो भूमिका निभा रहे हैं उसके प्रति सामूहिक श्रद्धा का ज्वार उमड़ रहा है। भारत इस बहुराष्ट्रीय त्रासदी में न केवल विजय प्राप्त करेगा, अपितु आने वाले समय में विश्व का नेतृत्व भी करेगा। विश्व के कोने-कोने से यह स्वर सुनाई दे रहा है। यह मैं नहीं कह रहा हूं।

अमेरिका की एक संस्था ने 1 जनवरी से 14 अप्रैल के बीच इस बात को लेकर एक सर्वे करवाया कि कोरोना महामारी की रोकथाम में विश्व का कौन सा नेतृत्वकर्ता सबसे आगे है। सर्वे में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार सबसे आगे रहे। साफ है, आज पूरा विश्व मान रहा है कि कोरोना से लड़ाई में वे दुनिया सबसे अधिक प्रभावी हैं।

Prashant Jha
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