प्रशिक्षण के नाम पर बजट हड़पने का खेल

घूसकांड ने यह भी साबित किया है कि रोजगार देने के मिशन में भ्रष्टाचार बड़ी बाधा है।

By: Patrika Desk

Published: 14 Sep 2021, 02:54 PM IST

राजस्थान राज्य कौशल विकास निगम में हाल ही उजागर हुए घूसकांड में दो अधिकारियों की गिरफ्तारी और दो आइएएस अधिकारियों की कथित भूमिका हतप्रभ करने वाली है। लंबित बिल पास करवाने और काली सूची से हटाने की एवज में 5 लाख रुपए की घूस ली गई। जरूरतमंद और गरीबों को प्रशिक्षण देने के नाम पर जिस तरह करोड़ों का बजट हड़पने का खेल चल रहा है, वह चिंताजनक है। दोनों आइएएस अधिकारियों की संलिप्तता कितनी है, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा, लेकिन 70 कम्पनियों को ब्लैकलिस्ट करने के बाद 45 को बहाल कर देने से कई सवाल खड़े होते हैं। इससे निगम की उपयोगिता और कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं।

कौशल विकास निगम गरीब और कम पढ़े-लिखे युवाओं को तकनीकी रूप से प्रशिक्षित करने वाला संस्थान है। यहां अपना हुनर निखार कर युवा सक्षम बन अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं। युवाओं को स्वरोजगार से जोडऩे, कौशल और उद्यमिता विकास के लिए केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकार भी बड़ा बजट जारी करती है। खेल इस बजट को हड़पने का ही है।

कौशल विकास के नाम पर फर्जीवाड़ा और अनियमितता की शिकायतें लम्बे समय से चल रही हैं। दो-तीन साल पूर्व औचक निरीक्षण में कौशल विकास केंद्र पर गड़बडिय़ों की भरमार उजागर हुई थी। कहीं कागजों में नौकरी चल रही थी, कहीं नियोक्ता ही नदारद थे, कहीं प्रशिक्षण लेने वाले गायब थे। आइटीआइ प्रशिक्षण केंद्र की जगह बच्चों का प्राथमिक स्कूल चलता हुआ मिला। युवाओं को प्रशिक्षण में दिखाने के लिए उनके अंगूठे के क्लोन तैयार कर लिए गए। कौशल विकास निगम को पैसा बनाने का कारखाना बना दिया गया है, यह भ्रष्टाचार मुक्त होने के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है।

इस घूसकांड ने यह भी साबित किया है कि रोजगार देने के मिशन में भ्रष्टाचार बड़ी बाधा है। इसीलिए कौशल विकास जैसी महत्त्वपूर्ण और महत्त्वाकांक्षी योजनाएं भी फ्लॉप हो जाती हैं। इस तरह न तो रोजगार देने का लक्ष्य पूरा हो सकता है और न ही किसी जरूरतमंद का भला हो सकता है। इस प्रवृत्ति के चलते बेरोजगारी चुनौती बनी ही रहेगी। भ्रष्टाचार मुक्त शासन देने में सरकार नाकाम रहती है, तो उसी पर सवाल उठते हैं। इतने बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का यह हाल है, तो पंचायत, तहसील और जिला स्तर पर भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन मिलेगा, यह कोरी कल्पना है।(र.श.)

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