डेटा स्टोरी : मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं 2020 के लक्ष्यों से भटकी दुनिया

एटलस 2020 से सामने आया राष्ट्रों का उदासीन रुख, अब 2030 के लिए नए लक्ष्य। दुनिया के तमाम देश अपने लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जरूरी सेवाएं मुहैया कराने में नाकाम रहे और 'कॉम्प्रिहेंसिव मेंटल हेल्थ एक्शन प्लान' के तहत तय लक्ष्य हासिल नहीं कर सके।

By: Patrika Desk

Published: 11 Oct 2021, 03:38 PM IST

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 अक्टूबर) पर इस बार विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 'सभी के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल: आओ मिलकर इसे वास्तविक रूप दें' थीम दी। साथ ही 'मेंटल हेल्थ एटलस' का वर्ष 2020 संस्करण भी जारी किया। यह बताता है कि दुनिया के तमाम देश अपने लोगों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जरूरी सेवाएं मुहैया कराने में नाकाम रहे और 'कॉम्प्रिहेंसिव मेंटल हेल्थ एक्शन प्लान' के तहत तय लक्ष्य हासिल नहीं कर सके। जबकि कोविड-19 के चलते इसकी जरूरत और ज्यादा थी। अब कुछ नए लक्ष्य शामिल कर समय 2030 तक बढ़ा दिया गया है। एटलस में 171 देशों के आंकड़े शामिल हैं।

भागीदारी की दर-
2020 के लिए एटलस प्रश्नावली के जरिए सदस्य राष्ट्रों की भागीदारी की दर सभी डब्ल्यूएचओ क्षेत्रों में 73% या अधिक रही।

वैश्विक (194 में से 171) - 88%
एएफआर (47 में से 39) - 83%

एएमआर (35 में से 33) - 94%
ईएमआर (21 में से 20) - 95%
ईयूआर (53 में से 46) - 87%
एसईएआर (11 में से 8) - 73%
डब्ल्यूपीआर (27 में से 25) - 93%

नोट: डब्ल्यूएचओ सदस्य राष्ट्र के समूह 6 क्षेत्रों में बांटे गए हैं - अफ्रीका (एएफआर), अमरीकी (एएमआर), पूर्वी भूमध्यसागरीय (ईएमआर), यूरोप (ईयूआर), दक्षिण-पूर्व एशिया (एसईएआर) और पश्चिमी प्रशांत (डब्ल्यूपीआर)

भागीदारी दर की तुलना (एटलस 2014, 2017 और 2020 में )-
2014 में 88% (194 में से 171)
2017 में 91% (194 में से 171)
2020 में 88% (194 में से 171)

ध्यान तो दिया, पर प्रभावी सेवाएं नहीं-
सदस्य राष्ट्रों की प्रमोशन एंड प्रिवेंशन प्रोग्राम में रिपोर्टिंग बढ़ी -
41% 2014 में
52% 2020 में

कुल रिपोर्ट किए गए प्रोग्राम में से-
31% के लिए समर्पित मानव व वित्तीय संसाधन नहीं।
27% के लिए परिभाषित योजना नहीं।
39% के लिए प्रभावी होने या प्रगति के साक्ष्य ही नहीं।

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