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patrika opinion हवाई अड्डों के रखरखाव में आपराधिक लापरवाही

देश के सिरमौर कहे जाने वाले दिल्ली एयरपोर्ट पर बरसात के बीच हुए इस हादसे में एक जने की जान चली गई और कुछ लोग घायल हो गए। हादसे की चपेट में कई गाडिय़ां भी आ गईं। यह एयरपोर्ट देश का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है और यहां दुनिया के विभिन्न हिस्सों से यात्री आते-जाते हैं। इस तरह का हादसा यह इंगित करता है कि एयरपोर्ट से जुड़ी इमारतों के रखरखाव पर समुचित ध्यान नहीं दिया जा रहा।

जयपुरJun 28, 2024 / 09:31 pm

Gyan Chand Patni

देश में एक तरफ हवाई अड्डों की संख्या बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ हवाई अड्डों पर यात्रियों की सुरक्षा के मामले में गंभीर लापरवाही की घटनाएं सामने आ रही हैं। दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल वन पर छत का ऊपरी हिस्सा गिरने का हादसा सचमुच चिंतित करने वाला है। सरकार ने हादसे में मरने वाले के परिजनों और घायलों को मुआवजे का ऐलान किया है। सवाल यह कि क्या मुआवजा, इस हादसे से प्रभावित परिवारों की मुसीबत को कम कर पाएगा? हादसा, जांच के आदेश और मुआवजा, हर ऐसी घटनाओं में यह रटारटाया सरकारी सिस्टम है। पर इसे हवाई अड्डों के रखरखाव में बरती गई आपराधिक लापरवाही ही कहा जाएगा।
देश के सिरमौर कहे जाने वाले दिल्ली एयरपोर्ट पर बरसात के बीच हुए इस हादसे में एक जने की जान चली गई और कुछ लोग घायल हो गए। हादसे की चपेट में कई गाडिय़ां भी आ गईं। यह एयरपोर्ट देश का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट है और यहां दुनिया के विभिन्न हिस्सों से यात्री आते-जाते हैं। इस तरह का हादसा यह इंगित करता है कि एयरपोर्ट से जुड़ी इमारतों के रखरखाव पर समुचित ध्यान नहीं दिया जा रहा। यह तो तब है जब पिछले एक दशक में एयरपोर्ट की दुगनी संख्या होने को लेकर सरकार खुद की पीठ थपथपाने में लगी है। यात्रियों की सुविधाओं और सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगें तो इस उत्साह का कोई मतलब नहीं है। एक तथ्य यह भी है कि तमाम प्रयासों के बावजूद श्रेष्ठ एक सौ हवाईअड्डों की वैश्विक सूची में दिल्ली समेत हमारे सिर्फ पांच एयरपोर्ट ही जगह बना पाए हैं। इनमें भी शीर्ष 20 में एक भी नहीं है। देश के सर्वश्रेष्ठ हवाई अड्डे पर ही यात्री सुरक्षित नहीं हैं, तो दूसरे हवाई अड्डों की बात करना बेमानी लगता है। इसीलिए एक दिन पहले ही जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट पर हुआ बड़ा हादसा भी चौंकाता नहीं है। दिल्ली के आइजीआइ एयरपोर्ट से प्रतिदिन करीब १२०० विमानों की आवाजाही होती है। जाहिर है यहां मामूली लापरवाही भी बड़े हादसे को जन्म दे सकती है। इस हादसे को लेकर भारी बरसात और पुराने निर्माण को दोष देने को लीपापोती ही कहा जाएगा। ऐसे स्थानों पर हर मौसम को ध्यान में रखकर निर्माण होते हैं। जहां तक पुराने निर्माण की बात है तो उसका भी रखरखाव होना चाहिए और यदि वह स्थान आवागमन के लिए खतरनाक होता है, तो वहां आवाजाही रोककर पुनर्निर्माण भी किया जा सकता है।
इस हादसे को लेकर सियासी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। जबकि इस सवाल पर फोकस किया जाना चाहिए एयरपोर्ट से जुड़ा जो हिस्सा हादसे की वजह बना क्या उसका समय-समय पर रखरखाव किया जा रहा था? जांच में रखरखाव के नाम पर खानापूर्ति सामने आए तो संबंधित अधिकारियों और एजेंसी के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज किया जाना चाहिए। जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के साथ ही यात्रियों की सुरक्षित आवाजाही भी सुनिश्चित होनी चाहिए।

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