जमा पूंजी : कर अपवंचन नहीं, कर नियोजन करें

- धारा 24 के तहत गृह ऋण पर छूट बैंक ही नहीं, अन्य स्रोत से ऋण लेने पर भी मिलती है

By: विकास गुप्ता

Published: 03 Mar 2021, 09:01 AM IST

असीम त्रिवेदी

कल ही मनोज का सपत्नीक आना हुआ, मिठाई का डिब्बा हाथ में था। आखिरकार घर ले ही लिया, मैंने बधाई दी। मनोज की पत्नी बोलीं - भाईसाहब, मकान तो चार साल पहले बन जाता लेकिन बैंक लोन देने को तैयार नहीं था, अब पिताजी और ताऊजी को मनाकर उनसे 25 लाख रुपए 10% ब्याज पर लिए हैं। मनोज बोला - ऊपर से 5 लाख रुपए रजिस्ट्री में लग गए। पिताजी और ताऊजी को कहा है - ब्याज आज से चालू लेकिन लोन अगले साल से चुकाऊंगा। मनोज बोला - भाईसाहब, एक सलाह लेनी थी, मुझे संशय है कि छोटा व्यवसायी होने के नाते मुझे घर खरीदने के कारण आयकर में छूट मिलेगी या नहीं? क्योंकि मैंने ऋण बैंक या वित्तीय संस्थान से नहीं लिया।

मैंने कहा - ध्यान से सुनो, इस वर्ष से तुमको अधिकतम 2 लाख की ब्याज की छूट मिलेगी धारा 24 में, और इसके अतिरिक्त इस वर्ष धारा 80(सी) के तहत पंजीयन के खर्चों की 1 लाख 50 हजार तक की छूट ले सकते हो। यानी इस वर्ष तुम लगभग 1 लाख का कर बचाने के अधिकारी हो। अगले साल से धारा 24 में ब्याज की छूट जरूर लेना, हालांकि 80(सी) की छूट तुम्हें नहीं मिलेगी, क्योंकि ऋण बैंक से नहीं लिया है। धारा 24 के लिए यह जरूरी नहीं कि ऋण बैंक से लिया जाए। तुम्हारे मामले में तुम्हें तो छूट मिल ही रही है, पिताजी-ताऊजी को 10त्न ब्याज मिल रहा है, बैंक और पोस्ट ऑफिस योजनाओं से कहीं ज्यादा।

यह जान लेना भी जरूरी है कि अगर हाउस लोन लिया है तो भी पहले साल पंजीयन की छूट लेना न भूलें। क्योंकि पहले साल ऋण में ब्याज का भाग ज्यादा होता है मूलधन का नगण्य भाग होता है, इसलिए अक्सर लोग 80(सी) की छूट नहीं लेते, परंतु वे भूल जाते हैं कि 80(सी) में कुछ पंजीयन खर्चों की भी छूट होती है। देखा जाता है कि एक भ्रम-सा है कि मकान के ऋण पर ब्याज पर आयकर छूट (धारा 24) सिर्फ बैंक व वित्तीय संस्थानों से ऋण लेने पर ही मिलती है, जबकि यह छूट हर तरह के ऋण पर उपलब्ध है। सबसे अच्छा कर नियोजन तब होगा जब पति-पत्नी दोनों ने बैंक से संयुक्त ऋण लिया हो और दोनों मकान के संयुक्त स्वामी हों। दोनों मिलकर लगभग 2 लाख तक का कर हर वर्ष बचा सकते हैं। तो देर किस बात की, कर की छूटों का लाभ लीजिए और ऋण पर ब्याज की प्रभावी दर को कम कर लीजिए।
(लेखक सीए, ऑडिटिंग एंड अकाउंटिंग स्टैंडर्ड और कानूनी मामलों के जानकार हैं)

विकास गुप्ता
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