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प्रसंगवश: सुशासन के दावों के बीच आमजन की अनदेखी

सरकार ने इस सुविधा की आड़ में निजी बस संचालकों को भरपूर कमाई का अवसर भी दे दिया है

Published: May 12, 2022 08:33:36 pm

राजस्थान में गुरुवार से शुरू हो रही पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में बैठने वालों को रोडवेज बसों में नि:शुल्क यात्रा सुविधा तो दे दी गई है लेकिन पिछले साल ही हुई रीट परीक्षा के दौरान यात्रियों को हुई असुविधा को नजरंदाज कर दिया गया है। लगता है कि लोकलुभावन घोषणाओं के दौर में सरकार वोट बैंक को साधने का कोई भी मौका नहीं छोडऩा चाहती। बेरोजगारों को भर्ती परीक्षा के लिए सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा सुविधा देने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन जब आम यात्रियों की सुविधाओं की कीमत पर सरकार 18 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के लिए रोडवेज बेड़े की सभी बसें लगा दे तो यह निर्णय सोचने पर मजबूर भी करता है। चार दिन तक चलने वाली इस परीक्षा में आवेदकों को दी गई इस सुविधा के चलते आम यात्री सरकारी बसों के सफर से न केवल वंचित रहेंगे बल्कि निजी बसों में ज्यादा किराया देकर यात्रा करने पर भी मजबूर होंगे। सरकार ने अभ्यर्थियों को सुविधा की आड़ में निजी बस संचालकों को भरपूर कमाई करने का अवसर भी दे दिया है।
प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक चित्र
देखा जाए तो सरकार का यह फैसला गोद वाले बच्चे को भगवान भरोसे छोड़कर पेट में पलने वाले बच्चे की तरफ ज्यादा ध्यान देने जैसा ही है। अवसर विशेष पर आम जन को नि:शुल्क यात्रा करवाने की परिपाटी-सी चल पड़ी है। पिछले दिनों राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा के दौरान भी अभ्यर्थियों के लिए बड़ी संख्या में रोडवेज बसें लगाई गई थीं। बहरहाल, सरकार निशुल्क यात्रा करवाने की परिपाटी भले ही निभाए लेकिन इससे आम यात्रियों को किसी तरह की तकलीफ न हो इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। प्रदेश सरकार को रोडवेज बसों के साथ-साथ अन्य विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए, क्योंकि रोडवेज की ही बसों को मुफ्त सफर में लगा देना व्यावहारिक नहीं है। जब चुनाव के दौरान रोडवेज बसों का संचालन होता रहता है तो परीक्षा के समय इनका संचालन आम यात्री के लिए बाधित क्यों? सरकार जब प्रदेश में पेयजल संकट जैसे मसले पर विशेष ट्रेन चला सकती है तो परीक्षाओं के दौरान भी इसी तर्ज पर ट्रेन चलाने पर विचार क्यों नहीं हो सकता। चुनाव में निजी वाहनों का अधिग्रहण हो सकता है तो फिर परीक्षा के दौरान ऐसा कौन-सा धर्मसंकट है जो यह सब करने से रोक देता है। एक वर्ग को सहूलियत के प्रयास में दूसरों को परेशानी में डालना कतई उचित नहीं। (म.सिं.शे.)

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