नीयत और विकास

घर पर तिरंगा फहराना अलग बात है, यह विकास का द्योतक नहीं है। 24 करोड़ लोगों के पास बिजली नहीं है, पेयजल 56 प्रतिशत घरों तक पहुंच पाता है।

By: सुनील शर्मा

Published: 16 Jul 2018, 10:15 AM IST

चार राज्यों- राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में विधानसभा चुनाव और 2019 के आम चुनाव से पूर्व मोदी सरकार के वर्तमान कार्यकाल के आखिरी स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 2018) को भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में देशभक्ति की अलख जगाने के लिए एक नया अभियान शुरू करने जा रही है। ‘हर घर तिरंगा, हर गांव तिरंगा’ इसके तहत सभी घरों में नि:शुल्क तिरंगा भेजने की तैयारी की जा रही है। स्लोगन भी दिया गया है ‘साफ नीयत, सही विकास ; हर घर तिरंगा.....।’ भारतीय जनता पार्टी के नेता सीआर पाटिल ने ट्विटर पर यह शगूफा छोड़ा है। यह बात सही है कि स्वतंत्रता दिवस पर देश के हर नागरिक को अपने घर पर गर्व से तिरंगा फहराना चाहिए। लेकिन गर्व का यह भाव व्यक्ति में स्वत:स्फूर्त हो तो बेहतर है। भाजपा की नई घोषणा एक नया जुमला भर ही समझा जाएगा। आखिर चार साल बाद क्यों इस अभियान को चलाने की याद आई या जरूरत समझी गई?

भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने शायद 2016 के आइसीई 360 डिग्री सर्वे के आधार पर यह कल्पना की होगी कि वर्तमान में देश में 90 फीसदी से ज्यादा घरों में मोबाइल फोन है। इस अभियान के तहत देश के करीब सभी घरों तक पार्टी की नीतियां तिरंगे के जरिए पहुंचाई जा सकेंगी। तिरंगा पाने की प्रक्रिया भी तय कर दी गई है। इसके लिए के्रप्टिल डॉट कॉम वेबसाइट पर रजिस्टे्रशन कराना होगा। वेबसाइट पर एक फार्म भरवाया जाएगा जिसमें आवेदक का नाम, पता, राज्य, फोन नम्बर जैसी जरूरी सूचनाएं भरनी होंगी। नाम रजिस्टर होते ही कुछ ही दिन में मुफ्त तिरंगा मिल जाएगा। पार्टी की इस सोच का दूसरा पहलू यह भी है कि इस बहाने हर घर की जानकारी भी जुट जाएगी और पार्टी का एजेंडा भी तिरंगे के साथ पहुंच जाएगा। लेकिन अभियान के रचयिता यह भूल गए कि 90 फीसदी घरों में मोबाइल फोन तो हैं लेकिन इंटरनेट सेवा आज भी मेट्रो शहरों में 25 फीसदी तथा ग्रामीण या कस्बाई क्षेत्रों में 3 से 5 फीसदी मोबाइल धारकों के पास ही है।

पार्टी को अगर साफ नीयत और सही विकास ही दिखाना है तो पहले हर गांव और हर घर की मूलभूल जरूरतें पूरी करनी होंगी। वर्तमान में ज्यादातर नागरिक बिजली, पेयजल, शौचालय, सडक़ और लोक परिवहन की समस्याओं से जूझ रहे हैं। सही मायने में घर पर तिरंगा फहराना अलग बात है, यह विकास का द्योतक नहीं है। आज भी 24 करोड़ लोगों के पास बिजली नहीं है, पेयजल सिर्फ 56 प्रतिशत घरों तक पहुंच पाता है।

विडंबना ही कही जाएगी कि घरों में टॉयलेट होने के बावजूद तकरीबन 9 फीसदी लोग देश में आज भी खुले में शौच जाते हैं क्योंकि उनके यहां नल नहीं है। फिर क्या यह अभियान मात्र लोगों का डेटा जुटाने का जरिया भर नहीं होगा? पिछले चुनाव उन्होंने सबका साथ-सबका विकास के नारे के साथ जीता था। साथ तो सबका मिल गया पर विकास सबको नहीं मिला। बेहतर हो कि पार्टी हर जन तक आधारभूत विकास पहुंचाए। कहीं यह अभियान चुनावी बनकर न रह जाए।

सुनील शर्मा
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