script'Digital legislation' will increase the participation of the public | तंत्र में लोक की भागीदारी बढ़ाएगा 'डिजिटल विधान' | Patrika News

तंत्र में लोक की भागीदारी बढ़ाएगा 'डिजिटल विधान'

वैसे सदन की कार्यवाही, तारांकित व अतारांकित सवाल और उनके जवाब, समिति की रिपोर्ट वगैरह को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का काम तो कई विधानसभाओं में काफी पहले हो चुका है। संसद में तो इसकी शुरुआत हुए एक दशक से ज्यादा का समय बीत गया।

Published: June 17, 2022 08:40:50 pm

एक देश, एक विधान के बाद अब राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (नेवा) देशभर की विधानसभाओं को एक राष्ट्र, एक अनुप्रयोग से जोड़ रहा है। इसके तहत अब विधानसभाओं के डिजिटलीकरण का नया दौर शुरू हो गया है, जिससे न केवल संसद और विधानसभाओं से संबंधित जानकारी डिजिटल मिलेगी बल्कि सदन के भीतर का 'लुक' और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के कामकाज का अंदाज भी बदल जाएगा। यह मानना होगा कि इस प्रयोग से जनभागीदारी भी बढ़ेगी।
वैसे सदन की कार्यवाही, तारांकित व अतारांकित सवाल और उनके जवाब, समिति की रिपोर्ट वगैरह को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का काम तो कई विधानसभाओं में काफी पहले हो चुका है। संसद में तो इसकी शुरुआत हुए एक दशक से ज्यादा का समय बीत गया। अब विधानसभाओं की कार्यवाही का भी यू-ट्यूब और फेसबुक जैसे माध्यमों से सीधा प्रसारण होने लगा है। राजस्थान सहित कई राज्यों की विधानसभाओं ने इस प्रक्रिया को अपना रखा है। इसके बावजूद 'नेवाÓ के जरिए अब सभी विधायिकाएं एक प्लेटफॉर्म पर आ गईं हैं। सबकुछ ठीक रहा तो जल्दी ही विधानसभाओं व संसद के दोनों सदनों में भी सांसदों-विधायकों के सामने कागज-पेन की जगह लैपटॉप होगा। उन्हें सदन के भीतर ही संदर्भ सामग्री भी मिल सकेगी। 18 राज्यों की विधानसभाओं ने डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। उत्तरप्रदेश भी हाल ही इसमें जुड़ा। हालांकि राजस्थान में इस साल बजट सत्र में विधायकों को आइफोन तो दिए, लेकिन डिजिटलीकरण में राज्य विधानसभा अभी पीछे है।
डिजिटलीकरण बढऩे से कागज की बचत होगी ही, इससे पर्यावरण की रक्षा होगी। परन्तु इससे भी अधिक सांसद-विधायकों के कामकाज और सोच का अंदाज बदल जाएगा। राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (नेवा) प्लेटफॉर्म से देशभर के सदनों की कार्यवाही, तारांकित व अतारांकित सवाल व उनके जवाब, समिति की रिपोर्ट वगैरह भी एक जगह उपलब्ध हो सकेंगे। उत्तर प्रदेश में तो विधानसभा की समूची कार्यप्रणाली कागज रहित हो गई है। नगालैंड पहला राज्य है, जहां मार्च में नेवा लागू हो गया।
नेवा प्रणाली में एक वेबसाइट और एक मोबाइल एप का इस्तेमाल होता है। नवम्बर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'एक राष्ट्र, एक विधायी प्लेटफॉर्म' का सुझाव देते हुए कहा था कि 'एक डिजिटल प्लेटफॉर्म, एक पोर्टल' से न केवल संसदीय प्रणाली तकनीकी रूप से उन्नत होगी, बल्कि सभी लोकतांत्रिक इकाइयां भी आपस में जुड़ जाएंगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी उम्मीद जताई है कि सभी विधायिकाओं की कार्यवाही-संसद के दोनों सदन और राज्य विधानसभाओं व विधान परिषदों की कार्यवाही वर्ष 2023 तक एक प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो सकेगी। नेवा की वेबसाइट पर कहा गया है कि 'कई हजार टन कागज की बचत होगी, जिससे सालाना लाखों पेड़ कटने से बचाए जा सकेंगे।Ó हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने 2014 में नेवा पायलट प्रोजेक्ट लागू किया था। सरकार की वेबसाइट बताती है कि डिजिटलीकरण से राज्य में सालाना 6,000 पेड़ों को कटने से बचाया और खर्च भी करीब 15 करोड़ रुपए कम हुआ।
दुनियाभर के देशों की सरकारें विधायिकाओं का डिजिटल स्वरूप अपनाने को तैयार हैं। दिसम्बर में दुबई सरकार सौ फीसदी कागज रहित कार्यप्रणाली अपनाने वाली विश्व की पहली सरकार बनी। सरकारी वक्तव्य के अनुसार, दुबई सरकार के खर्च में 350 मिलियन अमरीकी डॉलर की कमी आएगी और कामकाज के समय में 14 मिलियन घंटों की कमी आएगी। अमरीका में 2022 के अंत तक सरकारी एजेंसियां कागज का इस्तेमाल बंद कर देंगी। ऐसा नहीं है कि पूर्णत: डिजिटलीकृत व्यवस्था अपनाना आसान होगा, चुनौतियां भी आएंगी। अंतरराष्ट्रीय संसदीय संघ में भारत समेत 170 से अधिक देश शामिल हैं। इस संगठन की 2018 में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया था कि बड़ी चुनौती पहुंच की है। खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों से चुनकर आए विधायकों के पास उपकरण न होना, अच्छी इंटरनेट सेवा और बिजली का अभाव अपनी तरह की समस्याएं हैं। अपनी 2020 की रिपोर्ट में संगठन ने कहा कि प्रशिक्षण की कमी और सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं डिजिटलीकरण की राह में नई चुनौतियां हैं। अब तक नेवा से जुडऩे के लिए पंजाब, ओडिशा, बिहार, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर, गुजरात, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, पुडडूचेरी, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, सिक्किम, हरियाणा, उत्तरप्रदेश व झारखंड राज्य एमओयू कर चुके हैं। इनमें से 13 राज्य विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार कर चुके हैं, जिनमें पंजाब, ओडिशा, बिहार, नगालैंड, मणिपुर, सिक्किम, तमिलनाडु, मेघालय, हरियाणा, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, मिजोरम व अरुणाचल प्रदेश परियोजना के लिए फंड भी जारी कर चुके हैं। एडिट डेस्क
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