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PATRIKA OPINION : देखभाल कर खाएं, सेहत को बेहतर बनाएं

भारत की 140 करोड़ आबादी को सुरक्षित, पौष्टिक और किफायती भोजन उपलब्ध कराना ही राष्ट्र के लिए असली खाद्य सुरक्षा है। भोजन सुरक्षित है या नहीं, इसके बारे में लोगों को जानकारी होनी चाहिए।

जयपुरJun 07, 2024 / 04:20 pm

विकास माथुर

हाल ही भारत से निर्यातित मसालों के कुछ नमूनों में हांगकांग और सिंगापुर में एथिलीन ऑक्साइड (ईटीओ) गैस के कुछ अंश पाए जाने की खबरें सुर्खियों में रहीं। इन खबरों ने कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग और खाद्य सुरक्षा से संबंधित सरकारी संस्थानों पर सवालिया निशान खड़े किए।
भारतीय कृषि खाद्य उत्पादन के नए आयाम स्थापित किए हैं। भारत ने 2023-24 में खाद्यान्न उत्पादन में 330 मिलियन टन और बागवानी में 350 मिलियन टन का रेकॉर्ड उत्पादन किया। बढ़ते खाद्य और बागवानी उत्पादन के साथ भारत वैश्विक खाद्य व्यापार में 50 बिलियन अमरीकी डॉलर का खाद्य निर्यात कर वैश्विक खाद्य सुरक्षा में अहम योगदान दे रहा हैं। विडम्बना यह है कि खाद्य पदार्थों की पर्याप्त उपलब्धता होते हुए भी भारत के लोग खाने की गुणवत्ता, भोजन में पौष्टिक तत्वों की मात्रा और सुरक्षित भोजन से कोसों दूर हैं।
ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2023 की रिपोर्ट के अनुसार भारत को हंगर इंडेक्स के 125 देशों में 111वां स्थान दे कर देश में भूख की गंभीरता को दर्शाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में आज भी तकरीबन 22.4 करोड़ लोगों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन नहीं मिल रहा है और वे कुपोषण का शिकार हैं। हालांकि भारत की सरकार ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019-21 की रिपोर्ट का हवाला देकर देश में गरीबी और पोषण संकेतकों में काफी सुधार की पुष्टि की है। खाद्य सुरक्षा की उपयोगिता को समझते हुए पिछले कुछ वर्षों में भारत और राज्य सरकारों ने असुरक्षित भोजन और कुपोषण के मुद्दे को उच्च प्राथमिकता देकर कई योजनाओं को लागू किया है।
सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर बायोफोर्टिफाइड बीजों की किस्में जैसे कि आयरन और जिंक संवर्धित बाजरा, हाई ओलेक सरसों और मूंगफली को विकसित करने से लगाकर, मोटे अनाज और न्यूट्री सीरियल्स के प्रचलन, फोर्टिफाइड चावल और मिशन पोषण 2.0 के माध्यम से अनुशंसित आहार सेवन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। खाद्य जनित रोग, असुरक्षित भोजन और कुपोषण की इन ज्वलंत समस्याओं का हल अकेले सरकार नहीं कर सकती और इसके लिए हम सब को मिल कर गंभीर प्रयास करने होंगे। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस एक महत्त्वपूर्ण अवसर है, जिसका भरपूर फायदा उठाना चाहिए।
2019 में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अनुमोदन के बाद हर वर्ष 7 जून को विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस मनाया जाता है,जिसका उद्देश्य सुरक्षित भोजन, खाने से होने वाली बीमारियों का पता लगाने, उनको रोकने और इनके उपचार की ओर लोगोंं का ध्यान आकर्षित करना है। दुनिया भर में पिछले 6 वर्षों से विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को खाद्य मूल्य शृंखला प्रणाली व सुरक्षित भोजन के महत्त्व के बारे में जागरूक करना है।
भोजन सुरक्षित है या नहीं, इसके बारे में लोगों को जानकारी होनी चाहिए। खाद्य सामग्री चाहे खुली हो या पैकेट बंद, सभी चरणों जैसे कि खाद्य उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, वितरण और बिक्री के दौरान यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि खाद्य सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा गया है। भारत में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 (एफएसएस अधिनियम) के अंतर्गत स्थापित भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) राज्यों के खाद्य सुरक्षा अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को लागू करने और मानव उपभोग के लिए इन पौष्टिक खाद्य पदार्थों के उत्पादन, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात की सुरक्षित व्यवस्था सुनिश्चित करने का कार्य करता है।
एफएसएसएआइ ने ‘ईट राइट इंडिया’ अभियान चला रहा है। इसे देश के विभिन्न जिलों में सुरक्षित भोजन और खाद्य सुरक्षा के बारे में जागरूकता बढ़ाने में उनके प्रयासों को मान्यता देने के लिए जिलों और शहरों के बीच एक प्रतियोगिता के रूप में देखा जाता है। ‘ईट राइट इंडिया’ अभियान से देश भर में लोगों को ‘सुरक्षित भोजन’ यानी अगर यह सुरक्षित नहीं है, तो यह भोजन नहीं है, के बारे में जागरूक किया जा रहा है। ‘स्वस्थ आहार’ यानी भोजन केवल स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि शरीर और मन के लिए भी होना चाहिए और ‘सस्टेनेबल आहार’ यानी भोजन लोगों और प्लेनेट दोनों के लिए टिकाऊ होना चाहिए।
इस वर्ष विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2024 की थीम सभी से ‘अप्रत्याशित के लिए तैयार रहने’ का आग्रह कर खाद्य सुरक्षा से संबंधित अप्रत्याशित संकटों के लिए उपभोक्ताओं के तैयार रहने के महत्व पर जोर देती है, चाहे वह कितनी भी छोटी या गंभीर समस्या क्यों न हो। खाद्य सुरक्षा सरकारों, उत्पादकों और उपभोक्ताओं की सम्मिलित जिम्मेदारी है। खेत से लेेकर खाने की टेबल तक इस जिम्मेदारी को निभाना होगा, ताकि खाद्य पदार्थ सुरक्षित रहें और वे बीमारी का कारण न बनें। सुरक्षित खाद्य पदार्थों के प्रति जागरूकता बढ़ाने से बीमारियों पर होने वाले खर्च में भी कमी आएगी।
— भगीरथ चौधरी

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