scriptEfforts to control high petrol prices | पेट्रोल की ऊंची कीमतों को काबू में करने के प्रयास | Patrika News

पेट्रोल की ऊंची कीमतों को काबू में करने के प्रयास

जीवाश्म ईंधन की खपत अमरीकी राजनीतिक अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग है। 31 मार्च का बाइडन का संबोधन तेल पर निर्भरता कम करने पर केंद्रित रहा, जबकि उनकी ज्यादातर नीतियां कम समय में तेल आपूर्ति बढ़ाने से संबंधित रहीं। ऊर्जा संचरण को गति देने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए अमरीका को अपना तेल उपभोग कम करना होगा।

Published: April 19, 2022 08:15:32 pm

ग्रेगोरी ब्रू
पोस्ट डॉक्टरल फेलो,
येल विश्वविद्यालय

हाल ही राष्ट्रपति जो बाइडन ने नई ऊर्जा नीति की घोषणा की है। इसका प्रारूप कुछ इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह पेट्रोल के बढ़ते दामों से मुकाबला कर सके। पेट्रोल की कीमतें कम करने के लिए अमरीका अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों से रोजाना 10 लाख बैरल पेट्रोल आपूर्ति के लिए देगा। यह प्रक्रिया छह महीने तक चलेगी। साथ ही, बाइडन इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण के लिए आवश्यक खनिजों के विकास को गति देने के लिए रक्षा उत्पादन अधिनियम के तहत अपने अधिकार का इस्तेमाल करेंगे। बाइडन ने कहा कि विश्व को तेल पर निर्भरता कम करनी होगी।
बाइडन सरकार बड़े पैमाने पर संरक्षण उपाय सुझाने को लेकर सावधानी से चल रही है। इसका कारण है-देश के भीतर तेल व पेट्रोल उद्योग से जुड़ी राजनीति, जो 2010 से फली-फूली है। दोनों ही दलों के राजनेता 'ऊर्जा स्वतंत्रता' की बात करते हैं। परन्तु यह नीति अमरीकी अर्थव्यवस्था को कार्बनमुक्त करने और जलवायु परिवर्तन से मुकाबले के लिए जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने की राह में मुश्किलें खड़ी कर सकती है।
बीसवीं सदी के पूर्वाद्र्ध में अमरीका ही पेट्रोल का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता हुआ करता था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद उपभोग बढ़ गया, क्योंकि वैश्विक उत्पादन के चलते जीवाश्म ईंधन का उपयोग भी बढऩे लगा। 1970 में अचानक ही इस उद्योग में आई रफ्तार थम गई और 1973-74 में आपूर्ति ठप हो गई। अरब ने अपने तेल पर पाबंदी लगा दी और ओपेक ने तेल की कीमतें बढ़ा दी। 1970 में अमरीकी तेल उत्पादन चरम पर रहा। इन्हीं दिनों अमरीका की विदेशी तेल पर निर्भरता भी बढ़ी।
राष्ट्रपति रिचर्ड एम. निक्सन के प्रोजेक्ट इंडिपेंडेंस के बाद ईंधन दक्षता, संघीय सरकार की ओर से गति सीमा निर्धारण की पहल और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर रुझान के चलते तेल आयात में कमी आई। राष्ट्रपति गेराल्ड फोर्ड ने ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 1975 का अनुकरण किया। इससे पेट्रोल की बचत हुई और इसका भंडार बन सका। 1977 में जिमी कार्टर ने तेल के बढ़ते उपभोग और आयात पर निर्भरता को 'नैतिकता के खिलाफ युद्ध' की संज्ञा दी और कहा कि अमरीकियों को मिल-जुल कर इस चुनौती से निपटना होगा। 1979 में महंगाई बढऩे व ईरानी क्रांति के चलते जब तेल की कमी हो गई तो 1980 में अमरीकी तेल आयात घट गया। इससे पेट्रोल की खपत 2 फीसदी घट गई और इसकी मांग में 5 प्रतिशत कमी आई। इसके बाद आए रोनाल्ड रीगन ने ऊर्जा संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने का संदेश दिया। 2000 तक आते-आते दुनिया के तेल भंडार खाली हो गए। इसके बाद राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने नवीनीकरण योग्य ऊर्जा के बारे में शोध पर बल दिया ताकि तेल की मांग कम की जा सके।
तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश ने अपने संबोधन में कहा कि अमरीका को 'तेल की लत लग चुकी है'। उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा प्रोत्साहन कार्यक्रम शुरू किया। बाद में राष्ट्रपति बने बराक ओबामा ने 2009 में पद संभालते ही जलवायु परिवर्तन के खतरों के प्रति आगाह किया। उन्होंने तेल पर निर्भरता को आतंकी खतरे से जोड़ा और तय किया कि अगले बीस सालों में तेल की खपत 35 फीसदी कम कर देंगे। 2000 में प्रति व्यक्ति पेट्रोल की खपत 457 गैलन थी जो घटकर 2015 में 412 गैलन रह गई। इसके बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर तेल की खपत बिल्कुल नहीं घटी। इसी दौरान तेल उत्पादन जरूर बढ़ गया। उनके बाद आए राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने 'अमरीकी ऊर्जा प्रभुत्व' का सुझाव देते हुए कहा कि अमरीका इस क्षेत्र में सऊदी अरब और रूस को पीछे छोड़ दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक बन सकता है। कोरोना महामारी के चलते जहां तेल उत्पादन घटा, अमरीका एक बार फिर बड़ा तेल निर्यातक बन गया। इसके राजनीतिक परिणाम व्यापक स्तर पर दिखेंगे। जलवायु परिवर्तन के खतरे के बावजूद अब तेल के भंडारण को लेकर सोच बदली है। बाइडन अपना राजनीतिक आधार मजबूत बनाए रखने के लिए जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर ही जोर देना चाहते हैं। साथ ही, नवीनीकरण योग्य ऊर्जा में निवेश और तेल की खपत कम करने का समर्थन कर रहे हैं।
इसके अलावा जीवाश्म ईंधन की खपत अमरीकी राजनीतिक अर्थव्यवस्था का अभिन्न अंग है। 31 मार्च का बाइडन का संबोधन तेल पर निर्भरता कम करने पर केंद्रित रहा, जबकि उनकी ज्यादातर नीतियां कम समय में तेल आपूर्ति बढ़ाने से संबंधित रहीं। ऊर्जा संचरण को गति देने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने के लिए अमरीका को अपना तेल उपभोग कम करना होगा। विडम्बना यह है कि राजनेता यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि जनता को पेट्रोल पम्पों पर कम खर्च करना पड़े। साथ ही, यह भी कह रहे हैं कि सांसदों का काम केवल अरसे से चले आ रहे पर्यावरण संकट को खत्म करना ही नहीं है।
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