scriptEfforts to ease the suffering of the people of Afghanistan | अफगानिस्तान की जनता की तकलीफ कम करने के प्रयासों पर जोर | Patrika News

अफगानिस्तान की जनता की तकलीफ कम करने के प्रयासों पर जोर

दिल्ली की घोषणा ने सुरक्षित और स्थिर अफगानिस्तान के लिए समर्थन को दोहराया। इस सम्मेलन के बाद आया वक्तव्य मानवीय और अफगानिस्तान की जनता के हित में था। दिल्ली घोषणा पत्र में सम्मेलन के भागीदारों ने अफगानिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और उससे जुड़ी अफगानिस्तान के लोगों की परेशानी पर चिंता जताई।

नई दिल्ली

Published: November 17, 2021 08:38:34 am

अरुण जोशी
(दक्षिण एशियाई कूटनीतिक मामलों के जानकार)

क्षेत्र में अफगानिस्तान पर दो सम्मेलन हुए। एक भारत में और दूसरा पाकिस्तान में। सिद्धान्तत:दोनों सम्मेलन का मुद्दा एक ही था कि अफगानिस्तान में हालात कैसे संभाले जाएं? अफगानिस्तान में मानवता पर आए सबसे बड़े संकट से लोगों को बचाना जरूरी है, खास तौर पर सर्दियों के मौसम में। अफगानिस्तान के लिए ये सर्दियां आम सर्दी के मौसम जैसी नहीं होंगी। पाकिस्तान की मदद से अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद यह वहां की पहली सर्दी होगी। तालिबान ने अमरीका के पूरी तरह से अफगानिस्तान छोड़ देने के पहले ही अफगानिस्तान पर काबिज होकर अराजकता और अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई। यह स्थिति समय के साथ और खतरनाक हो रही है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) की भारत में हुई बैठक में रूस और ईरान के अलावा पांच मध्य एशियाई देशों उÓबेकिस्तान, किर्गिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, कजाकिस्तान और ताजिकिस्तान के सुरक्षा सलाहकार मौजूद रहे। सबका एक ही मकसद था, अफगानिस्तान के लोगों की तकलीफ को कम करना। भारत का एक प्राथमिक उद्देश्य है कि अफगानिस्तान के लोगों को चुनौतियों का सामना करने के लिए संबल प्रदान किया जाए। अब यह जगजाहिर है कि तालिबान और पाकिस्तान एक दूसरे के लिए काम कर रहे हैं। उन्हें जनता की चिंता नहीं है। तालिबान अंतरराष्ट्रीय मान्यता और सहायता पाने में लगा है, जबकि पाकिस्तान अफगानिस्तान में सरकार चलाने के लिए हर मोर्चे पर तालिबान की मदद कर रहा है।
दिल्ली सम्मेलन के बाद आया वक्तव्य मानवीय और अफगानिस्तान की जनता के हित में था। दिल्ली घोषणा पत्र में सम्मेलन के भागीदारों ने अफगानिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था और उससे जुड़ी अफगानिस्तान के लोगों की परेशानी पर चिंता जताई। साथ ही उन्होंने कंदुज, कंधार और काबुल में आतंकी हमलों की भी निंदा की। दक्षिणी व मध्य एशियाई क्षेत्रों के लिए सम्पूर्ण सुरक्षा और स्थिरता के लिहाज से अफगानिस्तान में स्थिरता होना बहुत महत्त्वपूर्ण है। सर्दियों में अफगानिस्तान के नागरिकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की घोषणा ने शांतिपूर्ण, सुरक्षित और स्थिर अफगानिस्तान के लिए अपने मजबूत समर्थन को दोहराया। उसकी संप्रभुता, अखंडता और क्षेत्रीय एकता का सम्मान करते हुए उसके अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने पर जोर दिया गया। यहां इशारा चीन और पाकिस्तान की ओर था कि इन्हें अफगान धरती का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं करना चाहिए। ऐसा होने पर ही क्षेत्र में शांति और स्थाइत्व सुनिश्चित किया जा सकता है। इस प्रकार भारत ने क्षेत्र में अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया, खास तौर पर अफगानिस्तान जैसे क्षेत्रीय मसले पर।

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