वोटों की चिंता से बढ़ रहा है अतिक्रमण

देश भर में शहरी व ग्रामीण इलाकों में वन भूमि पर अतिक्रमण के हजारों उदाहरण देखने को मिल जाएंगे, वे भी जहां अदालत के निर्देशों की अनदेखी कर अतिक्रमी काबिज हैं।

By: विकास गुप्ता

Published: 09 Jun 2021, 07:38 AM IST

जंगल की जमीन से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।' यह कहते हुए देश की शीर्ष अदालत जब अरावली वन क्षेत्र में बने दस हजार मकानों को ढहाने के निर्देश देती है, तो लुप्त होती हरियाली को संजीवनी मिलने की दिशा में उम्मीद की किरण नजर आती है। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार और फरीदाबाद नगर निगम को खोरी गांव में वन क्षेत्र में अतिक्रमण कर बने इन मकानों को छह सप्ताह के भीतर हटाने के निर्देश दिए हैं। फरीदाबाद तो कोरी बानगी भर है। देश भर में शहरी व ग्रामीण इलाकों में वन भूमि पर अतिक्रमण के हजारों उदाहरण देखने को मिल जाएंगे, वे भी जहां अदालत के निर्देशों की अनदेखी कर अतिक्रमी काबिज हैं।

कहीं वन भूमि में आबादी पसर गई है, तो कहीं नियमों को ताक पर रख कर उद्योग-धंधे तक खड़े करने की अनुमति दे दी गई है। ऐसा लगता है कि वनों के संरक्षण की चिंता सिर्फ पर्यावरण दिवस मनाने की खानापूर्ति करने तक ही की जाती है। दरअसल, अतिक्रमण का यह उद्योग जनप्रतिनिधियों की शह पर रंगत में आता है। फरीदाबाद में वन भूमि पर ये मकान भी कोई एक दिन में तो नहीं बन गए होंगे? कुछ तो नेताओं की राजनीतिक मजबूरी और कुछ प्रशासनिक ढिलाई ने देश भर में वन भूमि ही नहीं, बल्कि नदी-नालों तक अतिक्रमण करवा दिए हैं। सबको पता है कि जिनको चुनाव लडऩा है, उनको वोटों की चिंता भी है। इसीलिए कोई रोकने-टोकने वाला भी नहीं।

एक बार अतिक्रमण हो गया, तो फिर उसे बचाने के लिए राजनीतिक दबाव से लेकर कानूनी पेचीदगियों की अंधी सुरंगें तो हैं ही। कभी-कभार विरोध हुआ तो अतिक्रमण हटाओ अभियान भी चार कदम चल कर फुस्स हो जाते हैं। और फिर नेता खुद अतिक्रमण करने की नसीहत देने लग जाएं, तो फिर दूसरों की क्या कहें? अतिक्रमण की दुष्प्रवृत्ति पर काबू करने में जिम्मेदारों की विफलता कई सवाल खड़ी करती हैं। सरकारें ही अपने स्वार्थ पूरे करने के लिए कानून-कायदों में भी गलियां निकालते हुए गलत को सही साबित करने में जुट जाती हैं। सरकारें खुद जब अतिक्रमण के खेल में शामिल होती नजर आएं, तो फिर कोर्ट का डंडा ही इन्हें आईना दिखाता नजर आता है।

देश की शीर्ष अदालत ने फरीदाबाद में मकान हटाने की कार्रवाई के दौरान पुख्ता पुलिस बंदोबस्त करने के भी निर्देश दिए हैं। देखा जाए तो अवैध निर्माण व अतिक्रमण दोनों ही ऐसी समस्याएं हैं, जिनकी वजह से सब जगह विकास बाधित हो रहा है। सरकार को चाहिए वह समाज के दोषियों को प्रोत्साहित करने की बजाय, इन पर नियंत्रण करने की कोई ठोस योजना बनाए।

विकास गुप्ता
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