scriptEvery citizen should contribute in environmental purification | सामयिक: हर नागरिक मन में जगाए पर्यावरण शोधन का भाव | Patrika News

सामयिक: हर नागरिक मन में जगाए पर्यावरण शोधन का भाव

environmental purification : लॉकडाउन का एक दंश कोरोना महामारी के दिया है, दूसरा अब प्रदूषण देता दिख रहा है। 2016 में एक तकनीकी समिति के सारे सुझाव ठंडे बस्ते में रहे जिनमें डिफॉरेस्टेशन रोकने, वाटर ट्रीटमेंट, सीवेज व वेस्ट मैनेजमेंट, बायोडाइवर्सिटी, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन, एथेनॉल के प्रयोग, सौर ऊर्जा, लिथियम आयन बैटरी आदि विषयों पर कार्य होने थे। हुए भी लेकिन न्यूनतम परिणाम हासिल हुए और आज दिल्ली एनसीआर घर में कैद होने के लिए विवश है।

नई दिल्ली

Published: November 19, 2021 12:35:04 pm

आर.एन. त्रिपाठी
(प्रोफेसर, समाजशास्त्र, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय और सदस्य, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग)


environmental purification : मनुष्य जीवन में सुविधाएं सुहावनी तो लगती हैं लेकिन ये हमेशा कीमत वसूलती हैं, हमेशा ऐसी सोच बनाती हैं जिसमें मनुष्य सर्वजन की सुख-शांति के लिए नहीं, बल्कि सिर्फ अपने सुख के बारे में ही विचार करता है। आज प्रदूषण इसी सोच का परिणाम है, क्योंकि प्रकृति के प्रति श्रद्धा, सद्भाव को हमने भुला दिया है। स्थिति यह है कि उच्चतम न्यायालय को हस्तक्षेप करना पड़ रहा है और कहना पड़ा है कि 'यहां तो सरकारें आग लगने पर बाल्टी लेकर दौडऩे और कुआं खोदने का प्रयास कर रही हैं।' प्रश्न यह है कि क्या समाधान केवल सरकारी प्रयास से ही संभव है? उत्तर है - 'नहीं'। प्राचीन काल में साधन कम थे परंतु सद्भावनाएं ज्यादा थीं। प्रकृति व पुरुष का तादात्म्य था। यह टूटा तो महाविनाश शुरू हुआ।
अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर इस महाविनाश को रोकने के प्रयास किए भी जा रहे हैं। ग्लासगो सीओपी-26 में भारत ने 2030 तक अपनी ऊर्जा जरूरतों का 50 प्रतिशत नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त करने और 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने की घोषणा की है, जिसे आइएमएफ के चेयरमैन गैरी राइस ने भी सराहा है। दूसरा पक्ष देखें तो 31 मार्च 2020 तक अकेले दिल्ली में 1 करोड़ 18 लाख गाडिय़ां थीं, दो करोड़ की आबादी पर। लॉकडाउन का एक दंश कोरोना महामारी के दिया है, दूसरा अब प्रदूषण देता दिख रहा है। 2016 में एक तकनीकी समिति के सारे सुझाव ठंडे बस्ते में रहे जिनमें डिफॉरेस्टेशन रोकने, वाटर ट्रीटमेंट, सीवेज व वेस्ट मैनेजमेंट, बायोडाइवर्सिटी, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन, एथेनॉल के प्रयोग, सौर ऊर्जा, लिथियम आयन बैटरी आदि विषयों पर कार्य होने थे। हुए भी लेकिन न्यूनतम परिणाम हासिल हुए और आज दिल्ली एनसीआर घर में कैद होने के लिए विवश है।

निर्माण कार्य, उत्सर्जन, धूल, जाम में रेंग कर चलते वाहन, अक्टूबर-नवंबर का मौसम और इस पर उद्योगपतियों व किसानों का एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराना, परिणाम तो शून्य से नीचे ही है। कारण और निवारण सभी जानते हैं पर गले में घंटी कौन बांधे? नदियों को बचाने के लिए पहले स्वामी निगमानंद सरस्वती, फिर आइआइटी कानपुर में प्रोफेसर रहे जी.डी. अग्रवाल, जिन्हें स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के नाम से जाना गया, ने मृत्यु का वरण भी कर लिया, परंतु स्थिति आज भी वैसी की वैसी भयावह है। जीवन सुखद बनाने के लिए वैज्ञानिकों की परिकल्पनाएं सफल तो हुईं, पर प्राकृतिक पक्ष टूटता गया। भौतिकवाद मनुष्य को स्वेच्छाचारी बनाने में जुटा रहा और परिणाम यह हुआ कि वह अपने बनाए जाल में स्वयं फंसता गया।

जब अंत:करण से इस समस्या का समाधान खोजेंगे तो पाएंगे कि यह नितांत वैयक्तिक प्रकरण है, इसके लिए संवेदनाओं का जागरण करना होगा। भारतीय संस्कृति में 'दशपुत्रो समो द्रुम:' अर्थात दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष की अवधारणा है जिसे हमने भुला दिया है। सहजीवन हमारे सद्भाव का प्रयोग स्थल था।

हमें चाहिए कि श्रमशीलता और स्वास्थ्य के सिद्धांत को अपनाएं। सदप्रवृत्तियों के जागरण से दिखावापन की प्रवृत्ति खत्म होती है इसलिए इसे बढ़ावा दें। हमारा ऐश्वर्य हमारे दिखावे से नहीं, बल्कि हमारे विचारों, क्रियाओं और प्रतिक्रियाओं पर निर्भर करता है जो हम समाज के प्रति देते हैं अथवा करते हैं। 'माता भूमि: पुत्रो अहं पृथिव्या:' कहते हैं तो पृथ्वी के साथ हम पुत्र की तरह व्यवहार करें। जीवित इकाई नदियां किसी कानूनी दर्जे से शुद्ध नहीं होंगी, वे तभी शुद्ध हो सकती हैं जब हम उन्हें माता का दर्जा देंगे। घर में भगवान के प्रसाद के रूप में शाकवाटिकाएं, तुलसी लगाएं, और सार्वजनिक भूमि पर पंच पल्लव अर्थात पीपल, गूलर, पाकड़, आम और वट के वृक्ष।

पर्यावरण शोधन का भाव, अंत:करण के शोधन से ही जागृत किया जा सकता है। इस दिशा में अंत:करण की साधना ही प्रत्येक व्यक्ति और समाज को सुखी और समृद्ध बनाएगी। ध्यान रहे कि व्यक्ति वही इतिहास में दर्ज होता है जिसने अंत:करण की साधना और त्याग से आगे आने वाली पीढ़ी और समाज को कुछ दिया हो।

सामयिक:  हर नागरिक मन में जगाए पर्यावरण शोधन का भाव
सामयिक: हर नागरिक मन में जगाए पर्यावरण शोधन का भाव

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

Video Weather News: कल से प्रदेश में पूरी तरह से सक्रिय होगा पश्चिमी विक्षोभ, होगी बारिशVIDEO: राजस्थान में 24 घंटे के भीतर बारिश का दौर शुरू, शनिवार को 16 जिलों में बारिश, 5 में ओलावृष्टिदिल्ली-एनसीआर में बनेंगे छह नए मेट्रो कॉरिडोर, जानिए पूरी प्लानिंगश्री गणेश से जुड़ा उपाय : जो बनाता है धन लाभ का योग! बस ये एक कार्य करेगा आपकी रुकावटें दूर और दिलाएगा सफलता!पाकिस्तान से राजस्थान में हो रहा गंदा धंधाइन 4 राशि वाले लड़कों की सबसे ज्यादा दीवानी होती हैं लड़कियां, पत्नी के दिल पर करते हैं राजहार्दिक पांड्या ने चुनी ऑलटाइम IPL XI, रोहित शर्मा की जगह इसे बनाया कप्तानName Astrology: अपने लव पार्टनर के लिए बेहद लकी मानी जाती हैं इन नाम वाली लड़कियां

बड़ी खबरें

Mizoram Earthquake: मिजोरम में महसूस किए गए भूकंप के झटके, रिक्टर पैमाने पर रही 5.6 तीव्रताराष्ट्रीय युद्ध स्मारक में विलय की गई अमर जवान ज्योति की लौ; देखें VIDEO'हिजाब' पर कर्नाटक के शिक्षा मंत्री के बयान पर बवाल! जानिए क्या है पूरा मामलाUP Election 2022: राहलु और प्रियंका ने जारी किया कांग्रेस का घोषणा पत्र, युवाओं पर फोकसदिल्ली उपराज्यपाल ने आप सरकार के प्रस्ताव को किया खारिज, वीकेंड कर्फ्यू हाटने और प्रतिबंधों में ढील से इनकारकर्नाटक: शनिवार व रविवार को भी खुलेंगे बाजार लेकिन एक शर्त हैIND vs SA: मायूस विराट कोहली के चेहरे पर आई खुशी, ऋषभ पंत का सिक्स देखकर करने लगे डांसतत्काल पैसों की जरुरत है? तो जानिए वो 25 बैंक जो दे रहे हैं सबसे सस्ता Personal Loan
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.