किसान फिर हो सकेंगे खुशहाल

किसान के लोकल उत्पादों के समर्थन में आवाज उठानी होगी। और, जब “लोकल” के लिए पूरा समाज “वोकल” होगा तो उसी से हमारे “लोकल” को “ग्लोबल” बनाने का रास्ता खुलेगा ।

By: Prashant Jha

Published: 20 May 2020, 02:54 PM IST

आर. के. सिन्हा, टिप्पणीकार व पूर्व सांसद

हमारे देश में एक बहुत ही पुरानी कहावत प्रचलित है। “उत्तम खेती मध्यम बान, निकृष्ट नौकरी भीख निदान।” कहने का अर्थ यह है कि सबसे अच्छा कार्य या बेहतर पेशा तो खेती ही है और दूसरे दर्ज पर व्यापार है। नौकरी को तो कहा गया है कि वह तो निकृष्ट है, जो भीख मांगने के समान है। लेकिन, 70 वर्षों में विदेशों की नकल करके हमारे कर्णधारों ने देश की स्थिति को बदल दिया है। अब तो नौकरी को ही सबसे बढ़िया पेशा माना जा रहा है, और उसके ही बाद व्यापार भी है। सबसे निकृष्ट आज अन्नदाताओं का कार्य कृषि बन गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा था कि हमें “लोकल” को प्रोत्साहित करना होगा और “लोकल” के लिए “वोकल” होना होगा, यानी लोकल उत्पादों के समर्थन में आवाज उठानी होगी। और जब “लोकल” के लिए पूरा समाज “वोकल” होगा तो उसी से हमारे “लोकल” को “ग्लोबल” बनाने का रास्ता खुलेगा । क्योंकि, आज जितने भी बड़े बड़े अन्तरराष्ट्रीय ब्रांड हैं, वे सभी कभी न कभी एक छोटे से लोकल उद्यमी ने शुरू किया था । लेकिन, वहां की सरकारों ने और वहां के समाज ने उनका समर्थन करके उनको प्रोत्साहित करके उन्हें ग्लोबल बना दिया।

कोरोना से प्रभावित हालात को बूस्टर डोज देने के इरादे से केंद्र सरकार ने 10 हजार करोड़ रूपये की राशि उनके लिए रखी है जो छोटे उद्यमी हैं, जिनको माइक्रो फूड एंटरप्राइजेज या सूक्ष्म खाद्यान्न उद्यमी कहा जाता है । कोई मखाना तैयार करता है, तो कोई सत्तू बना रहा है, कोई बेसन तैयार कर रहा है, कोई मसाला कूट रहा है. इससे लाखों लोगों को रोजगार भी मिलेगा और देश भर में छोटे-छोटे हजारों लोकल उद्यमी खडे होंगे ।

सरकार की योजना के मुताबिक 2 लाख उद्यमियों को जब अपने कार्य विस्तार के लिये 10 हजार करोड रूपये का ऋण सस्ते ब्याज दर पर मिलेगा वह भी बिना गारंटी के. तब तो निश्चित रूप से हरेक उद्यमी पांच सात दस लोगों को अपने यहां रोजगार देगा और जिससे लाखों की संख्या में स्थानीय रोजगार पैदा भी होगें जिससे मजदूरों का पलायन भी रुकेगा या कम होगा ।

इस योजना के लिए अलग-अलग राज्यों को अलग-अलग उत्पादों के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा जैसे कि उत्तरप्रदेश में आम, बिहार में लीची और मखाना, जम्मू कश्मीर में केसर और पूर्वोत्तर के राज्यों में बांसों के नव अंकुरों से बनने वाले बहुत तरह के उत्पाद, तो आंध प्रदेश में मिर्च। इस तरह के अलग अलग राज्यों के लिये अलग अलग उत्पादों का चयन और वहां पर उनका प्रोत्साहन इस योजना के तहत किया जायेगा।

एक और बड़ी घोष णा जो की गयी है वह 20 हजार करोड़ रूपये की योजना है, जो कि मछुआरों के लिए है। मछली पालन के लिए 20 हजार करोड रूपये जिससे कि समुद्र के तटवर्ती इलाकों के मछुआरों को इससे बहुत बड़ा फायदा होगा। वे तरह तरह के छोटी-बड़ी नौकायें खरीद पाएंगे जिसपर सरकार 11 हजार करोड खर्च करेगी । उच्च छोटे-मोटे द्वीपों को मछली उत्पादन द्वीप के रूप में घोषित किया जायेगा। 11 हजार करोड़ रूपये इसमें खर्च होंगे और 9 हजार करोड़ रूपया के लिए फिसिंग हार्वड यानि कि मछुआरों के लिए छोटे-छोटे बंदगाहों को बनाने में खर्च होंगें जहां से वे जा सकेंगे मछली मारने के लिए । उनके मछलियों के लिए कोल्डस्टोरेज की व्यवस्था भी मछुआरे बंदरगाह पर ही होगी । इससे सरकार को उम्मीद है कि देष में सत्तर लाख टन मछली का उत्पादन अगले पांच वर्षों में होना संभव हो पायेगा जिससे कि बहुत बड़ा निर्यात का बाजार खुलेगा। मछली उत्पादन से लगभग पच्चपन लाख लोगों को रोजगार मिलेगा । अभी जो मछली का निर्यात का मार्केट एक लाख करोड का है वह सीधे दुगुना होकर दो लाख करोड़ का प्रति वर्श का हो जायेगा।

एक बड़ी घोषणा की पशुपालकों के लिए भी की गई। लगभग 13 हजार 3 सौ 43 करोड रूपये की योजना है जिससे शतप्रतिशत वैक्सीन भैंसों, गायों, भेड़ों, बकरियों, सुअरों के लिए कराने की व्यवस्था होगी जिसकी संख्या आज के दिन देशभर में लगभग 53 करोड आंकी गयी है । इन पशुओं में पैरों से लेकर मुंह तक के अलग-अलग तरह की बीमारियां होती हैं जिससे वे ग्रसित हो कर मर जाते हैं । इन 53 करोड जानवरों में अब तक मात्र डेढ करोड जानवरों को ही अभी तक वैक्सीन दिया जाता है। क्योंकि पशुपालक किसान गरीब होते हैं जो वैक्सीन में खर्च नहीं कर सकते हैं अब सरकार इसका खर्च वहन करेगी और सारा वैक्सीन सरकार द्वारा कराया जायेगा जो बहुत बड़ी राहत है पशुपालकों के लिए।
एक बड़ी घोषणा15 हजार करोड रूपये के पशुपालन इन्फ्रास्टचर डवलपमेंट फंड के रूप में की गयी। यह कहा गया कि अनेकों ऐसे इलाकें हैं जहां भी दुग्ध उत्पादन की बहुत बडी संभावनाएं हैं और जहां डेयरी के क्षेत्र में निजी उद्यमी भी निवेश करना चाहते हैं। लेकिन, ऐसे क्षेत्रों में जब तक कि डेयरी प्रोडक्ट की प्रोसेसिंग और उसके मूल्य में वैल्यू ऐडिसन और कैटल फिड के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार नहीं किये जायेंगे तो यह संभव नहीं हो सकेगा। इसी के लिए यह 15 हजार करोड रूपये का पशुपालन ढांचागत निर्माण योजना की यह घोषणा की गयी है।

फल और सब्जी उत्पादन करने वाले किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि उनका उत्पाद जब तैयार होता तो उसे एक दिन में ही बाजार में जाना जरूरी होता था या उसे कोल्डस्टोरेज में संरक्षित किया जाना जरुरी चाहिए। यह नहीं हो पाता था। चाहे वह पपीता हो, तर बुजा, खरबूजा हो कोई भी ऐसी सब्जी हो जो सड़ गल सकती थी, उसके संरक्षण का कोई इंतजाम नहीं था । सरकार का भी इस पर कोई विशेष ध्यान नहीं था। एक योजना टॉप की थी यानि टोमैटो, ओनियन और पोटैटो, यानि मात्र प्याज, टमाटर और आलू के लिए योजना थी । लेकिन, अब टॉप से टोटल की योजना बनी है, यानि कि हर प्रकार के इस प्रकार के उत्पाद जो सड़-गल सकते है उसके संरक्षण के लिए पांच सौ करोड की योजना सरकार ने बनायी है। इससे किसानों को ऐसे फसलों के उत्पादन में प्रोत्साहन मिलेगा जिन्हें क्रॉप या नगदी फसल कहा जाता है। ऐसे फसलों के उत्पादन से किसान हिचकते थे कि अगर बाजार नहीं मिला समय से, तो उसका क्या होगा। लेकिन अब टॉप टू टोटल योजना से पांच सौ करोड रूपये खर्च करके सरकार जगह-जगह कोल्डस्टोरेज बनवायेगी या बनवाने वाले को प्रोत्साहित करेगी जिससे उसका लाभ किसानों को ही मिलेगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार के इन नवाचारों से खेती -किसानी फिर से उत्कृष्ट काम माना जाएगा

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