scriptFive Ways to stay Sane in a Chaotic World | अराजक दुनिया में संतुलित रहने के लिए क्या करें | Patrika News

अराजक दुनिया में संतुलित रहने के लिए क्या करें

बदलावों के साथ सामंजस्य बिठाने का मंत्र है अंदरूनी तौर पर स्थिर और सुरक्षित महसूस करना

Published: May 13, 2022 09:07:39 pm

रवि वेंकटेशन
(बिजनेस लीडर, सोशल आंत्रप्रनर और 'वॉट द हेक डू आइ डू विद माइ लाइफ? हाउ टु फ्लरिश इन ए टर्ब्युलेंट वर्ल्ड' के लेखक)

'यह स्वर्णिम समय था, यह सबसे बुरा। यह बुद्धिमानी का दौर था, यह मूर्खता का। यह विश्वास का युग था, यह संदेह का। यह रोशनी का काल था, यह अंधकार का। यह उम्मीदों का वसंत था, यह निराशा का जाड़ा।'
- चार्ल्स डिकन्स (ए टेल ऑफ टू सिटीज, 1859)

भले ही आप उन चुनिंदा भाग्यशाली लोगों में से हों, जिनकी जिंदगी व्यक्तिगत तौर पर काफी अच्छी चल रही हो, फिर भी ऐसा होना बहुत मुश्किल है कि आप पर इस दुनिया की उथल-पुथल का असर न पड़े। कोरोना अपने अंतिम चरण में है पर इसका असर अब भी दिखाई दे रहा है, खास तौर पर आसमान छूती महंगाई के रूप में। इसके अलावा इन दिनों चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध की परिणति क्या होगी, यह तो स्पष्ट नहीं है पर इतना जरूर है कि इससे विश्व में ध्रुवीकरण बढ़ेगा, उदारीकरण के दिन लद जाएंगे और खाद्य सामग्री, ऊर्जा व वस्तुओं की कीमतें बुरी तरह से बढ़ जाएंगी।
प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक चित्र
कई देशों में निरंकुश नेताओं के लिए उत्कर्ष का दौर है और इसके चलते हर जगह नागरिक स्वतंत्रता व अधिकार पीछे छूटते जा रहे हैैं। असमानता तेजी से बढ़ने लगी है। अच्छा काम न मिल पाने के कारण आधे से ज्यादा भारतीयों ने नौकरी ढूंढना बंद कर दिया है। इस बीच, गत वर्ष भारतीय अरबपतियों की सम्पत्ति में एक तिहाई बढ़त देखी गई। कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली में सामुदायिक संघर्ष का भयावह रूप सामने आया है। दूसरी ओर पृथ्वी जलवायु संकट के दौर से गुजर रही है। दुनिया अनुमान से कहीं अधिक तेजी से गर्म हो रही है। मार्च माह में दोनों ध्रुवों का तापमान सामान्य से काफी ज्यादा 40 डिग्री सेल्सियस था। देश में 122 सालों में सर्वाधिक तापमान दर्ज किया गया। हमने केवल 50 सालों में ही दो तिहाई जैव विविधता खो दी है। इससे पहले 6.6 करोड़ साल पहले ऐसी सामूहिक विलुप्ति देखने को मिली थी। ऐसी ही बुरी खबरों की फेहरिस्त बहुत लम्बी है। दरअसल, हम बहुत बड़े बदलाव के दौर में जी रहे हैं। यहां परिवर्तन ही स्थायी है और अनिश्चितता ही निश्चित। अप्रत्याशित बदलाव अवसरों के साथ ही बड़ी चुनौतियां भी लाते हैं। चूंकि दुनिया में परिवर्तन की गति बढ़ गई है, हमारा सामना ज्यादा अनिश्चितता, विकल्पों, नकारात्मक चलन से हो रहा है। हममें से बहुत से लोग गुमराह, चिंतित, अभिभूत और अवसादग्रस्त हैं। रोजमर्रा की इस उथल-पुथल के बीच स्वयं को शांत और सकारात्मक बनाए रखने में ये पांच सूत्र कारगर हो सकते हैं -
1. अपने प्रभाव क्षेत्र पर सतत फोकस बनाए रखिए। स्टीवन कोव ने अपनी बेस्टसेलर 'प्रभावशाली लोगों की सात आदतें' में लिखा है हम उन चीजों पर फोकस करते हैं, जिन पर हमारा वश चलता है या जिन्हें हम प्रभावित कर सकते हैं। न कि उन चीजों पर अपना समय और ऊर्जा व्यर्थ गंवाते हैं जो चिंताजनक हैं पर हमारे वश में नहीं हैं। यहां महात्मा गांधी का कथन उल्लेखनीय है - 'स्वयं में वह बदलाव लाइए जिसकी अपेक्षा आप दुनिया से करते हैं।' इसीलिए मैं यूक्रेन मुद्दे पर कोई खास चिंतित नहीं हूं, बल्कि इस बात पर फोकस करता हूं कि मैं अपने ग्रहों का प्रभाव कम कर स्थिर जीवन कैसे जिऊं। मैं उन लोगों के लिए कुछ खास नहीं कर सकता जो घृणा फैलाते हैं लेकिन मैं प्रेम फैला सकता हूं और मेरे आसपास के वैमनस्य को खत्म कर सकता हूं। यह सलाह कारगर है। इससे मैं अपने बारे में अच्छा अनुभव करता हूं। छोटे-छोटे काम मुझे ऊर्जावान बनाए रखते हैं और मेरा प्रभाव क्षेत्र भी बढ़ जाता है।
2. मनपसंद साथी चुनिए। अक्सर कहा जाता है कि आप उन पांच लोगों का औसत हैं, जिनके साथ समय बिताना पसंद करते हैं। जिन लोगों की संगति में आप रहते हैं, उनका प्रभाव आपकी धारणाओं, भावनाओं व व्यवहार पर पड़ता है। इसलिए आप सकारात्मक, उदार, विचारवान व स्नेहीजनों के बीच रहना पसंद करते हैं, ऐसे लोगों के साथ उठना-बैठना पसंद नहीं करते जो विषाक्तता व नकारात्मकता से भरे हैं।
3. मीडिया का मंथन कीजिए। यानी सही चुनाव कीजिए। ज्यादातर मीडिया शोर शराबा, गलत जानकारी और नफरत फैला रहा है बजाय वस्तुनिष्ठ समाचार और संतुलित विचार के। एरिक श्मिट ने ट्विटर और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया को 'मूर्खों की हरकतों को बढ़ावा देने वाला' बताया है। इसलिए निशुल्क मीडिया से सावधान रहें क्योंकि उसके लिए आप ही उत्पाद हैं। दो साल पहले मैंने टीवी और सोशल मीडिया से दूरी बना ली और अब मैं सही खबरें छापने वाले अखबार और पत्रिका खरीद कर पढ़ता हूं।
4. ध्यान-योग कीजिए। अस्थिरता के इस दौर में जहां हर स्थिर चीज पिघल रही है और हर सांस के साथ एक घटना घटित होती है। ऐसे में समझदारी रखने और बदलावों के साथ सामंजस्य बिठाने का मंत्र है अंदरूनी तौर पर स्थिर और सुरक्षित महसूस करना। दार्शनिक एकहार्ड टोल के अनुसार, हमारी प्रसन्नता में सबसे बड़ी बाधा है हमारी सोच का मस्तिष्क में चल रहे विचारों से तालमेल की समस्या। मेरी ध्यान लगाने की बहुत कम आदत के बावजूद मैं स्वयं को अपने भीतर चल रहे विचारों से अलग कर पाता हूं।
5. अंतत: आध्यात्मिक जीवन शुरू करें। हम आध्यात्मिक अनुभव लेने आए मानव नहीं हैं, बल्कि ऐसी आध्यात्मिक इकाई हैं जो मनुष्य होने का अनुभव लेने आए हैं।
हम उस दौर में हैं, जो चरम परिवर्तन का साक्षी है। अभी हमने अशांति के दौर की झलक मात्र देखी है। अत्यधिक परिवर्तन अप्रत्याशित अवसर लेकर आता है। अगर आप सही मानसिकता व कौशल से इन परिवर्तनों को अपनाते हैं और बदलाव के कई दौर से गुजरते हैं तो आपके आसपास कितनी भी उथल-पुथल हो, आप शानदार जीवन जी सकते हैं। अगर आप बैठे-बैठे दुनिया को खत्म होते देखते रहेंगे और अपने बच जाने का इंतजार करेंगे तो जीवन दूभर हो जाएगा।

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