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Patrika Opinion: सोशल मीडिया से पनपे खतरों की जायज चिंता

अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की यह टिप्पणी इस चिंता को और बढ़ाती है जिसमें उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया तो बना ही दुनिया भर में लोकतंत्र कमजोर करने के लिए है। इतनी भ्रामक और अधकचरी सूचनाएं उड़ेल दी जाती हैं कि आमजन के लिए - सही क्या है और गलत क्या - यह समझ पाना संभव नहीं रह पाता।

Published: April 24, 2022 03:22:30 pm

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि सोशल मीडिया दुनिया में हर व्यक्ति की जिंदगी का अपरिहार्य हिस्सा बन चुका है। लेकिन चिंता की बात यह है कि मनोरंजन और जानकारी देने के साथ यह दुष्प्रचार व भ्रमित करने का जरिया भी बन गया है। इतना भयावह भी कि देशों के लोकतंत्र तक खतरे में हैं। अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की यह टिप्पणी इस चिंता को और बढ़ाती है जिसमें उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया तो बना ही दुनिया भर में लोकतंत्र कमजोर करने के लिए है। इतनी भ्रामक और अधकचरी सूचनाएं उड़ेल दी जाती हैं कि आमजन के लिए - सही क्या है और गलत क्या - यह समझ पाना संभव नहीं रह पाता।
प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक चित्र
उनका यह भी कहना है कि तकनीक का दुष्प्रभाव ऐसा भी है जिससे सोशल मीडिया का मकसद लोगों को गलत दिशा में धकेलना ही लगने लगा है। ओबामा का यह वक्तव्य हमारे देश के लिए प्रासंगिक और चिंता का सबब भी है। दूसरे देशों की तरह क्योंकि सोशल मीडिया के सारे दुष्परिणाम हमें भी भोगने पड़ रहे हैं, वास्तविक, गंभीर और जीवन में अहम स्थान रखने वाले मुद्दे व सूचनाएं या तो गौण हो जाती हैं या फिर गायब ही हो जाती हैं। भ्रामक व कम महत्त्व वाली जानकारियां व्यापक स्तर पर फैला दी जाती हैं। इसे ही सोशल मीडिया का दुरुपयोग कहते हैं, जो दुर्भाग्य से कई राजनीतिक पार्टियां भी कर रही हैं। इनके आइटी सेल एक-दूसरे के खिलाफ झूठी व घृणित सूचनाओं की बाढ़ ला देते हैं। सोशल मीडिया कंपनियों के समक्ष कई बार आपत्तियों के बावजूद ऐसा अब तक होता आ रहा है। सवाल उठता है कि क्या इसे रोका नहीं जा सकता? देखा जाए तो जिस तरह सूचनाओं के लिए संचार माध्यमों की जवाबदेही होती है, वह जिम्मेदारी निभाने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों को भी पाबंद किया जाना चाहिए। अभी ये कंपनियां यह कहकर बचने की कोशिश करती नजर आती हैं कि वे लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान कर रही हैं। लेकिन भला इस आजादी के नाम पर गलत सूचनाओं के प्रचार-प्रसार की इजाजत कैसे दी जा सकती है? कंपनियों को बाध्य किया जाए कि गलत-सही का निर्धारण उन्हें करना ही होगा।
सोशल मीडिया का प्रभाव व फैलाव चूंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है, इसलिए पूरे विश्व समुदाय को इसके लिए एक साथ आना होगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के संचालकों को भी यह तो सोचना ही होगा कि गलत सूचनाओं के कारण एक दिन वे लोगों का विश्वास खो देंगे, जो उनके लिए सबसे बड़ा आघात होगा।

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