जघन्य!

Sunil Sharma

Publish: Oct, 13 2017 03:36:50 PM (IST)

विचार
जघन्य!

कन्या वध जैसे जघन्य अपराध करने वालों चाहे वे मां-बाप ही क्यों न हों कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। रूढिय़ों को तोड़ नई शुरुआत करनी होगी।

देश में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान जोर-शोर से चल रहा है। ताकि महिलाओं में आत्मविश्वास जाग्रत किया जा सके। लोक सभाध्यक्ष के साथ विदेश मंत्री और रक्षा मंत्री के पद पर महिलाएं आसीन हैं। राजस्थान, पश्चिमी बंगाल और जम्मू-कश्मीर में महिलाएं मुख्यमंत्री पद संभाल रहीं हैं तो झारखण्ड, गोवा और मणिपुर में राज्यपाल के पद पर महिलाएं विराजमान हैं।

बीते सालों में मैरी कॉम , के. मल्लेश्वरी, सायना नेहवाल, साक्षी मलिक और पी.वी. सिंधु ने ओलम्पिक खेलों में भारत को पदक दिलाकर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कीं। ये बदलते भारत की प्राचीर का एक पहलू है जो दिल को सुकून देता है। बेटियों को मिल रहे प्रोत्साहन की गवाही देता है। लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू अब भी ये सोचने पर विवश कर देता है कि हम किस दौर में जी रहे हैं।

राजस्थान के झालावाड़ से आई खबर रोंगटे खड़े करने वाली है। छठी बार बेटी होने पर एक मां-बाप अपनी सात दिन की दुधमुंही के सिर पर पत्थर रखकर भाग खड़े हुए ताकि बेटी से हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाए। जागरूक लोगों ने भागते माता-पिता को पकडक़र पुलिस के हवाले कर दिया। सात दिन की बच्ची अस्पताल में दम तोड़ दिया। बच्ची का कुसूर क्या था? क्या यही कि वह बेटा नहीं थी। हम इक्कीसवीं सदी में है लेकिन एक वर्ग की मानसिकता अब भी १८वीं-१९वीं सदी से बाहर आने की नहीं लग रही।

ऐसा नहीं कि बेटियों के प्रति नफरत के ऐसे भाव अनपढ़ लोगों में ही हों। पढ़े-लिखे लोग भी पुत्र मोह को छोड़ नहीं पा रहे। ऐसे मां-बाप इंसान कहलाने के लायक नहीं माने जा सकते। पीढिय़ों की सोच को बदले बिना समाज को बदलने की अवधारणा पूरी नहीं हो सकती। सवाल ये कि क्या वंश सिर्फ पुत्र से ही चलता है? क्या पुत्री वंश को आगे नहीं ले जा सकती? इसी सोच को बदलने की जरूरत है। बिना स्त्री सृष्टि ही संभव नहीं है। यह परम् सत्य है।

बेटी को मारने से नहीं बल्कि अच्छे लालन-पालन से ही विकास की राह बनती है। कन्या वध जैसे जघन्य अपराध करने वालों चाहे वे मां-बाप ही क्यों न हों कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। रूढिय़ों को तोड़ नई शुरुआत करनी होगी, तभी देश आगे बढ़ेगा।

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