आपकी बात, क्या सरकार की कथनी और करनी में अंतर से कोरोना संक्रमण बढ़ा है?

पत्रिकायन में सवाल पूछा गया था। पाठकों की मिलीजुली प्रतिक्रिया आईं, पेश हैं चुनिंदा प्रतिक्रियाएं।

By: Gyan Chand Patni

Published: 01 Apr 2021, 06:31 PM IST

चुनाव प्रचार में नियमों की अनदेखी
सरकार की कथनी और करनी में अंतर होने के कारण कोरोना जैसी महामारी विकराल रूप लेती जा रही है। सरकार लोगो से तो आग्रह कर रही है कि दूरी बनाए रखें और मास्क पहन कर रखें, लेकिन मंत्री और नेता चुनाव-प्रचार के दौरान इन नियमों का ध्यान नहीं रखते। अगर मंत्री और नेता सरकार के बनाए नियमों की पालन करें, तो आम जनता को भी प्रेरणा मिलती है।
-ओमप्रकाश सतनामी, रीवा, मप्र
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कथनी और करनी में अंतर
निश्चय ही सरकार की कथनी और करनी में अंतर से कोरोना बढ़ा है। चुनाव को देखते हुए बड़ी सभाएं हो रही हैं। इनमें कोरोना गाइडलाइन की पालना नहीं की जा रही। इससे कथनी और करनी में अंतर स्पष्ट हो जाता है।
-सागर सुराणा, राजसमंद
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चुनावी घमासान में कोरोना का ध्यान ही नहीं
जिन पांच राज्यों में चुनावी माहौल हैै, वहां रैलियों में जनसैलाब देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी को भी कोरोना की दूसरी लहर का कोई डर नहीं। इन राज्यों में कोरोना गाइडलाइन की जिस तरह से धज्जियां उड़ रही है, उससे सरकार की कथनी और करनी में अंतर साफ दिखाई देता है।
-एकता शर्मा,गरियाबंद, छत्तीसगढ़
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नेता जुटा रहे हैं भीड़
मास्क लगाना, दो गज की दूरी रखना, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों मे ना जाना प्रमुख रूप से कोरोना से बचाव की गाइडलाइन हैं। केन्द्र और राज्य सरकारों के विभिन्न मंत्रियों द्वारा विभिन्न राज्यों की चुनावी रैलियों में पूरी तरह से इन नियमों की अवहेलना की जा रही है। अपनी चुनावी सभाओं मे लाखों की भीड़ जमा करना वाले नेता कोरोना की गाइडलाइन पर ध्यान ही नहीं दे रहे। इससे सरकारों की कथनी और करनी मे अंतर जाहिर है।
-छाया कानूनगो, बेंगलुरु, कर्नाटक
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सरकार नहीं, आम जनता लापरवाह
सामान्यत: देखने में आया है कि कोरोना संक्रमण की पहली लहर के समय लोग सावचेत थे। इससे संक्रमण में कमी आयी, लेकिन जनता के लापरवाह होनेे के कारण फिर से संक्रमण में वृद्धि हुई है। लोग सब कुछ जानते-समझते हुए भी नादानी कर रहे हैं। सरकार की ओर से कोई कमी नहीं की गई है। चिकित्सा व्यवस्था मजबूत करने से लेकर मानव संसाधन की पूर्ति पर ध्यान दिया गया है। मुश्किल यह है कि आमजन लापरवाह हो चला है। आम व्यक्ति मास्क नहीं लगाना, दो गज की दूरी रखना, सैनेटाइजेशन आदि भूल गया है। सरकार के द्वारा सख्ती बरती जा जा रही है। चालान काटे जा रहे है, परन्तु आमजन अब भी नही समझ रहा है।
-खुशवंत कुमार हिंडोनिया, चित्तौडग़ढ़
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हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी
सरकार की कथनी और करनी में अंतर के कारण तो कोरोना बढ़ा ही है, साथ ही साथ लोगों की जन जागरूकता की कमी एवं उदासीन रवैए ने भी कोरोना के संक्रमण को बढ़ाया है। सिर्फ अकेले सरकार को दोषी नहीं माना जा सकता है। कोरोना जैसी बीमारी की लड़ाई में हर व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है।
-महेंद्र कुमार सिंह, जयपुर
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सरकारी कार्मिक ही नहीं लगाते मास्क
सरकार के दिए हुए स्लोगन नो मास्क, नो एंट्री की पालना सरकारी कार्मिक भी नहीं कर रहे हैं। अगर सरकारी कार्मिक खुद मास्क लगाएं, तो लोगों में जागरूकता आ सकती है। हालत यह है कि सरकारी बिल्डिंग में सैनिटाइजर की भी व्यवस्था नहीं है।
-निमत लाल मेनारिया, भीन्डर, उदयपुर
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प्रभावी नीति नहीं
नाइट कर्फ्यू लगाने से कोई फायदा नहीं है। रात में तो लोग वैसे भी घर पर रहते हैं और मिलना-मिलाना तो दिन में होता है। लॉकडाउन लगाने के फैसले में भी स्थिरता नहीं है। सब एक-दूसरे को आदेश दे रहे हंै। अत: सरकार को सभी की सहमति से प्रभावी नीति बनानी चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए।
-ज्योति दयालानी, बिलासपुर
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राजनीतिक दलों की मनमानी
भारत में कोरोना बढऩे का बहुत बड़ा कारण सरकार और राजनीतिक दलों की मनमानी है। आम जनता से जुड़े मामलों में तो बहुत बंदिशें लगाई गईं, लेकिन चुनावी रैलियों को नहीं रोका गया। कोरोना नियंत्रण के लिए आम जनता ने प्रयास किए थे, लेकिन राजनीतिक दलों ने इन प्रयासों पर पानी फेर दिया।
-सोनू शर्मा, जयपुर
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सिर्फ सरकार दोषी नहीं?
जिस देश में साम्प्रदायिकता को धर्म, स्वार्थ नीति को राजनीति और लूट को व्यापार कहा जाता है, वहां संकट बना रहता है। इसलिए केवल सरकार की कथनी-करनी का अंतर कोरोना संक्रमण बढऩे का कारण कैसे हो सकता है?
-अशोक कुमार मोहिते, शिवपुरी
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लापरवाही पड़ रही भारी
हाल ही मे कोरोना संक्रमण बढऩे के पीछे आम लोगों की लापरवाही ही सामने आई हैं। सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाना व मौज-मस्ती में घूमना तो लोगों की फितरत है। यदि हम यूं ही सरकार से सहयोग न कर केवल मनमानी ही करते रहेंगे, तो आने वाला समय ज्यादा मुश्किल भरा होगा। सरकार को दोष देना गलत है। कानून की पालना करना सभी का कर्तव्य हैं। मात्र सरकार और भगवान के भरोसे जीने की गलतफहमी छोड़ें, तभी हम बचेंगे।
- दीपा आनन्द पिडियार, अमरावती
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इम्यूनिटी बढ़ाने पर ध्यान दें
कोरोना से लड़ाई के लिए लॉकडाउन जैसे उपाय व्यर्थ हैं। बेहतर तो यह है कि मास्क पहनें। दो गज की दूरी और हाथ धोने पर ध्यान दें। बीमारी में दवा लें। कोरोना से हमारे शरीर की इम्यूनिटी ही लड़ सकती है। इसलिए इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए नियमित व्यायाम और खान-पान पर ध्यान देना चाहिए।
-कलाराम चौधरी, बेंगलुरु
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होम क्वारंटीन में ढिलाई
पहले घर-घर जाकर स्वास्थ्य विभाग की टीम कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग करती थी। कोरोना संक्रमितों की हालत के बारे में फोन से जानकारी ली जाती थी। अब ये सब बंद होने के कारण भी आंकड़े भयावह हो रहे हैं। होम क्वारंटीन के मामलों में ढिलाई नजर आ रही है। इसका खमियाजा दूसरे लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
-सरिता प्रसाद, पटना, बिहार

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