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प्रसंगवश : जनता को सजगता की सजा क्यों दे रही है सरकार

- बेहतर तो यह है कि सरकार पहले पट्टा ले चुके उन लोगों को राशि वापस लौटाए, जिनसे ज्यादा शुल्क ले लिया गया है

नई दिल्ली

Published: November 02, 2021 09:59:55 am

राजस्थान सरकार का प्रशासन गांवों-शहरों के संग अभियान प्रारंभिक चरण में ही पिछड़ता दिखा तो सरकार ने रियायतों की पोटली खोल दी। शुरुआती दौर में अपेक्षित परिणाम न मिलने से सरकार को हड़बड़ाहट में कई छूट और सुविधाओं की घोषणा करनी पड़ी। प्रशासन शहरों के संग अभियान में गहलोत सरकार ने 300 वर्गमीटर तक की कृषि भूमि से अकृषि के लिए प्रीमियम दरों में 75 प्रतिशत तक की छूट देने का बड़ा निर्णय किया। इस निर्णय का असर यह हुआ कि पहले 300 वर्गमीटर भूखंड का पट्टा लेने के 3 लाख से अधिक रुपए देने पड़ते थे। सरकार की ओर से राहत देने के बाद अब भूखंडधारी को महज 60 हजार रुपए देने होंगे।

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राज्य सरकार ने न सिर्फ पट्टा लेने की दर को घटाया है, बल्कि आंतरिक विकास कार्य, साइट प्लान सहित चार शुल्क भी शून्य कर दिए। जिन लोगों ने अभियान की शुरुआत में पट्टे ले लिए, उनमें सरकार के इस फैसले से खासी नाराजगी है। एेसे लोगों का तो यहां तक कहना है कि सजगता और जल्दबाजी भारी पड़ गई। लाखों रुपए का नुकसान हो गया। अगर महीने भर रुक जाते, तो काफी फायदा हो जाता। प्रदेशभर के निकायों, यूआइटी और विकास प्राधिकरणों में ५० हजार से अधिक पट्टे जारी हो चुके हैं। जिन लोगों को अब तक पट्टे जारी हो चुके हैं, उनमें से अधिकतर ने लाखों रुपए खर्च कर पट्टे लिए हैं। अब इनके पड़ोसी पट्टा लेंगे, तो उनको लाख रुपए के भीतर ही 300 वर्ग मीटर तक का पट्टा मिल जाएगा। ये भी हो सकता है कि एक ही अभियान में अधिक शुल्क चुकाने वाले लोग वैधानिक कार्रवाई के लिए कानूनी प्रावधानों का सहारा लेने का प्रयास करें।

राज्य सरकार को भी निर्णय लेने से पहले यह सोचना चाहिए था कि जिन लोगों ने पुरानी और अधिक दरों पर पट्टा ले लिया है, उनको कैसे लाभ दिया जाए या उनके इस नुकसान की भरपाई कैसे की जाए? अब भी समय है कि राज्य सरकार अधिक शुल्क चुकाने वालों के लिए सहानुभूतिपूर्वक विचार करे और उनसे वसूली गई अधिक राशि का पुनर्भरण करे। वर्ना भविष्य में जब भी कोई अभियान चलेगा, लोग अभियान की शुरुआत में कोई पहल नहीं करेंगे और आखिरी समय में ही हालात को भांपते हुए अपना निर्णय करेंगे, जिससे अव्यवस्था के साथ-साथ अभियान की सफलता भी प्रभावित होगी। (सं.कौ.)

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