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शरीर ही ब्रह्माण्ड - सृष्टि विस्तार का अनुष्ठान : नवरात्रा

- नवरात्रा शक्ति का ही पूजन है। नवरात्रा शब्द नवीनता कासूचक है। नवो नवो भवति जायमानो रूप में नवशक्तियों के जागरण की रात्रियां ही नवरात्रा कहलाती हैं। गीता में कहा गया है कि जब संसार सोता है, तब योगी जागता है।
- नवरात्रा में हम जहां सृष्टि के नवभाव की कामना करते हैं वहीं मुक्ति की प्रार्थना भी इस काल में आवश्यक है। हमारा परम लक्ष्य इस सांसारिक आवागमन चक्र का निरोध ही है। अध्यात्म संस्था में मानव भी अक्षर प्राणों से समन्वित रहता है। अत: उसमें भी देवासुर भावों की उपस्थिति है।

नई दिल्ली

Updated: October 09, 2021 08:39:21 am

शरीर ही ब्रह्माण्ड - सृष्टि विस्तार का अनुष्ठान : नवरात्रा
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